नड्डा के आरोपों पर मंत्रियों का पलटवार, बोले- हिमाचल को दावों नहीं, केंद्र से वास्तविक सहयोग की जरूरत – भारत केसरी टीवी

नड्डा के आरोपों पर मंत्रियों का पलटवार, बोले- हिमाचल को दावों नहीं, केंद्र से वास्तविक सहयोग की जरूरत

[मदन शर्मा]

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शिमला, 14 जून। शिक्षा मंत्री रोहित ठाकुर और तकनीकी शिक्षा मंत्री राजेश धर्माणी ने आज प्रेस वार्ता में केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री एवं वरिष्ठ भाजपा नेता जगत प्रकाश नड्डा के बयानों का खंडन करते हुए कहा कि हिमाचल प्रदेश की जनता को राजनीतिक दावों और आत्मप्रशंसा नहीं, बल्कि तथ्य और ठोस परिणाम चाहिए।

मंत्रियों ने कहा कि जे.पी. नड्डा हिमाचल प्रदेश से आने वाले केंद्र सरकार के सबसे वरिष्ठ नेताओं में से एक हैं, इसलिए प्रदेश की जनता की उनसे अपेक्षाएं भी अधिक हैं। लोगों को उम्मीद है कि वे राज्य के वित्तीय हितों, विकासात्मक प्राथमिकताओं और जनसरोकारों को राष्ट्रीय स्तर पर मजबूती से उठाएंगे।

उन्होंने कहा कि हिमाचल प्रदेश ने हमेशा तब प्रगति की है जब केंद्र और राज्य सरकारों के बीच बेहतर समन्वय रहा है। राज्य में स्थापित कई बड़े शैक्षणिक संस्थान, स्वास्थ्य सुविधाएं और विकास परियोजनाएं कांग्रेस सरकारों के कार्यकाल में शुरू हुई थीं।

मंत्रियों ने कहा कि वर्तमान समय में राज्य को सहकारी संघवाद (Cooperative Federalism) की उसी भावना की आवश्यकता है, विशेषकर तब जब हिमाचल वित्तीय दबाव, आपदा पुनर्निर्माण और बढ़ती विकासात्मक जरूरतों का सामना कर रहा है।

उन्होंने कहा कि राज्य के सामने सबसे बड़ी चिंताओं में से एक राजस्व घाटा अनुदान (Revenue Deficit Grant – RDG) का बंद होना है। संविधान के अनुच्छेद 275(1) के तहत यह हिमाचल जैसे पहाड़ी राज्यों के लिए महत्वपूर्ण वित्तीय सहायता का माध्यम रहा है। इसके बंद होने से राज्य को प्रतिवर्ष 8,100 करोड़ रुपये से अधिक का नुकसान होने की आशंका है, जिससे शिक्षा, स्वास्थ्य, बुनियादी ढांचे और सामाजिक कल्याण योजनाओं पर अतिरिक्त दबाव पड़ेगा।

मंत्रियों ने कहा कि वर्ष 2023 की प्राकृतिक आपदा ने हिमाचल प्रदेश में भारी तबाही मचाई थी। सड़कें, पुल, शैक्षणिक संस्थान, पेयजल योजनाएं, स्वास्थ्य सुविधाएं और अन्य सार्वजनिक ढांचे बुरी तरह प्रभावित हुए थे। राज्य सरकार ने राहत, पुनर्वास और पुनर्निर्माण के लिए केंद्र से विशेष सहायता मांगी थी, लेकिन प्रधानमंत्री द्वारा घोषित 1,500 करोड़ रुपये की सहायता राशि अभी तक प्राप्त नहीं हुई है।

स्वास्थ्य क्षेत्र का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार द्वारा किए जाने वाले दावों और वास्तविक सहायता में बड़ा अंतर दिखाई देता है। आयुष्मान भारत योजना के तहत 90:10 फंडिंग पैटर्न की बात की जाती है, लेकिन वर्ष 2025-26 में लगभग 155 करोड़ रुपये के स्वास्थ्य दावों के मुकाबले हिमाचल को केंद्र से केवल 49 करोड़ रुपये ही प्राप्त हुए हैं।

मंत्रियों ने बताया कि वर्ष 2018-19 से 2025-26 के बीच स्वास्थ्य बीमा योजनाओं के तहत लगभग 599 करोड़ रुपये के उपचार दावे आए, जिनका बड़ा हिस्सा राज्य सरकार को अपने संसाधनों से वहन करना पड़ा। इसके बावजूद सरकार ने स्वास्थ्य सेवाओं को प्रभावित नहीं होने दिया और हाल ही में हिमकेयर की लंबित देनदारियों के भुगतान के लिए 100 करोड़ रुपये जारी किए हैं।

उन्होंने कहा कि वित्तीय चुनौतियों के बावजूद प्रदेश सरकार स्वास्थ्य क्षेत्र के आधुनिकीकरण पर लगभग 3,000 करोड़ रुपये खर्च कर रही है। चमियाना, आईजीएमसी शिमला और डॉ. राजेंद्र प्रसाद मेडिकल कॉलेज टांडा में आधुनिक प्रयोगशालाएं स्थापित की जा रही हैं। रोबोटिक सर्जरी, पीईटी स्कैन, कैंसर उपचार सुविधाएं, ट्रॉमा सेंटर और आधुनिक जांच तकनीकों का विस्तार किया जा रहा है।

शिक्षा मंत्री रोहित ठाकुर ने कहा कि वित्तीय चुनौतियों के बावजूद हिमाचल शिक्षा के क्षेत्र में उत्कृष्ट प्रदर्शन कर रहा है। हाल ही में जारी परफॉर्मेंस ग्रेडिंग इंडेक्स (PGI) 2.0 में प्रदेश ने राष्ट्रीय स्तर पर छठा और राज्यों में तीसरा स्थान हासिल किया है तथा ‘प्रचेष्टा-2’ श्रेणी में जगह बनाई है।

मंत्रियों ने भाखड़ा ब्यास प्रबंधन बोर्ड (BBMB) से जुड़े मुद्दों पर भी चिंता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि हिमाचल अपने जल संसाधनों, बिजली लाभ और वित्तीय हितों से जुड़े मामलों को लगातार उठाता रहा है और उम्मीद करता है कि केंद्र सरकार राज्य के वैध अधिकारों की रक्षा में सहयोग करेगी।

उन्होंने कहा कि राज्य सरकार कोई विशेष रियायत नहीं मांग रही, बल्कि केवल वही चाहती है जो संवैधानिक, कानूनी और वित्तीय रूप से हिमाचल के लोगों का अधिकार है। प्रदेश को समय पर वित्तीय सहायता, आपदा राहत और विकासात्मक सहयोग की आवश्यकता है।

मंत्रियों ने कहा कि लोकतंत्र में राजनीतिक मतभेद स्वाभाविक हैं, लेकिन राष्ट्रीय स्तर पर राज्य का प्रतिनिधित्व करने वाले नेताओं को ऐसे बयान देने से बचना चाहिए जो हिमाचल के हितों को नुकसान पहुंचाएं। उन्होंने जे.पी. नड्डा से आग्रह किया कि वे दलगत राजनीति से ऊपर उठकर राज्य के लिए अधिक वित्तीय सहायता, आपदा राहत और विकास परियोजनाएं सुनिश्चित करने में अपनी भूमिका निभाएं।

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