शिक्षा के क्षेत्र में हिमाचल प्रदेश ने रचा विकास का नया इतिहास – उपमुख्यमंत्री – भारत केसरी टीवी

शिक्षा के क्षेत्र में हिमाचल प्रदेश ने रचा विकास का नया इतिहास – उपमुख्यमंत्री

[मदन शर्मा]

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उपमुख्यमंत्री ने पीटरहॉफ में नवाजे दसवीं और बारहवीं के मेधावी छात्र

 

उपमुख्यमंत्री ने आज मेधावी विद्यार्थियों को सम्मानित करते हुए कहा कि हिमाचल प्रदेश ने शिक्षा के क्षेत्र में पिछले कुछ दशकों के दौरान अभूतपूर्व प्रगति की है। उन्होंने कहा कि आज प्रदेश देश के अग्रणी शिक्षित राज्यों में शामिल है और शिक्षा की गुणवत्ता के मामले में भी लगातार नई ऊंचाइयों को प्राप्त कर रहा है।

उन्होंने कहा कि एक समय ऐसा था जब प्रदेश के अनेक क्षेत्रों में शिक्षा सुविधाओं का अभाव था तथा साक्षरता दर भी अत्यंत कम थी। विशेष रूप से महिलाओं की शिक्षा की स्थिति चुनौतीपूर्ण थी। लेकिन दूरदर्शी नेतृत्व और निरंतर प्रयासों के परिणामस्वरूप आज हिमाचल प्रदेश शिक्षा के क्षेत्र में देशभर के लिए एक आदर्श मॉडल बनकर उभरा है।

उपमुख्यमंत्री ने कहा कि हाल के वर्षों में शिक्षा क्षेत्र में किए गए सुधारों के परिणामस्वरूप हिमाचल प्रदेश राष्ट्रीय स्तर पर शिक्षा प्रदर्शन में उल्लेखनीय प्रगति करते हुए देश के शीर्ष राज्यों में शामिल हुआ है। उन्होंने शिक्षा मंत्री और शिक्षा विभाग के प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि गुणवत्तापूर्ण शिक्षा सुनिश्चित करने के लिए अनेक महत्वपूर्ण कदम उठाए गए हैं, जिनका सकारात्मक प्रभाव अब स्पष्ट रूप से दिखाई दे रहा है।

उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार ने सरकारी विद्यालयों में आधुनिक और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध कराने के लिए केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (सीबीएसई) पाठ्यक्रम को चरणबद्ध तरीके से लागू करने की पहल की है। इससे विद्यार्थियों को राष्ट्रीय स्तर की प्रतिस्पर्धाओं और अवसरों के लिए बेहतर तैयारी का अवसर मिलेगा। इसके लिए शिक्षकों के विशेष प्रशिक्षण और चयन की प्रक्रिया भी संचालित की जा रही है।

उपमुख्यमंत्री ने कहा कि हिमाचल प्रदेश में शिक्षा का व्यापक विस्तार हुआ है। राज्य में विद्यालयों, महाविद्यालयों, औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थानों (आईटीआई), नर्सिंग कॉलेजों तथा तकनीकी शिक्षण संस्थानों की संख्या में लगातार वृद्धि हुई है। प्रदेश के दूरदराज क्षेत्रों तक उच्च शिक्षा की पहुंच सुनिश्चित करने के लिए पिछले वर्षों में बड़ी संख्या में डिग्री कॉलेज स्थापित किए गए हैं, जिससे विशेष रूप से छात्राओं को लाभ मिला है।

उन्होंने कहा कि प्रदेश में उच्च शिक्षा और तकनीकी शिक्षा का आधार भी लगातार मजबूत हुआ है। आज हिमाचल प्रदेश में कृषि, बागवानी, इंजीनियरिंग और अन्य व्यावसायिक क्षेत्रों से संबंधित अनेक प्रतिष्ठित संस्थान कार्यरत हैं। इन संस्थानों ने प्रदेश के युवाओं को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और रोजगार के बेहतर अवसर उपलब्ध कराए हैं।

उपमुख्यमंत्री ने कहा कि शिक्षा के प्रसार का सबसे बड़ा लाभ महिलाओं और ग्रामीण क्षेत्रों के विद्यार्थियों को मिला है। विद्यालयों और महाविद्यालयों की बढ़ती उपलब्धता के कारण छात्राओं की उच्च शिक्षा में भागीदारी बढ़ी है तथा समाज में सकारात्मक परिवर्तन देखने को मिला है।

उन्होंने विद्यार्थियों से नई तकनीक, नवाचार और डिजिटल शिक्षा के अवसरों का लाभ उठाने का आह्वान करते हुए कहा कि वर्तमान समय ज्ञान, कौशल और तकनीक का युग है। प्रदेश के युवा अपनी प्रतिभा और मेहनत के बल पर राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान बना रहे हैं और भविष्य में भी हिमाचल प्रदेश के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।

उपमुख्यमंत्री ने विश्वास व्यक्त किया कि शिक्षा के क्षेत्र में जारी सुधारों और निवेश के परिणामस्वरूप हिमाचल प्रदेश आने वाले वर्षों में देश के सर्वश्रेष्ठ शिक्षा मॉडल के रूप में और अधिक मजबूत पहचान स्थापित करेगा।

 

शिक्षा के क्षेत्र में हिमाचल प्रदेश ने स्थापित किए नए मानक – शिक्षा मंत्री

शिक्षा मंत्री ने कहा कि आज के छात्र केवल अपने परिवार और प्रदेश का ही नहीं, बल्कि राष्ट्र के भविष्य का प्रतिनिधित्व करते हैं। उन्होंने विद्यार्थियों को शुभकामनाएं देते हुए कहा कि उनके ज्ञान, प्रतिभा और परिश्रम से देश के निर्माण को नई दिशा मिलेगी।

उन्होंने कहा कि हिमाचल प्रदेश ने शिक्षा के क्षेत्र में पिछले सात दशकों में उल्लेखनीय प्रगति की है। स्वतंत्रता के समय प्रदेश की साक्षरता दर मात्र 7 प्रतिशत थी, जबकि महिलाओं की साक्षरता दर केवल 2 प्रतिशत के आसपास थी। आज हिमाचल प्रदेश देश के सबसे अधिक साक्षर राज्यों में शामिल है और गोवा के साथ शीर्ष राज्यों की श्रेणी में अपनी पहचान बना चुका है। पिछले वर्ष प्रदेश ने लगभग 99.30 प्रतिशत साक्षरता दर दर्ज कर एक महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की।

शिक्षा मंत्री ने कहा कि प्रदेश की सरकार ने शिक्षा की गुणवत्ता को सर्वोच्च प्राथमिकता दी है। उन्होंने बताया कि कुछ वर्ष पूर्व विभिन्न राष्ट्रीय आकलनों में हिमाचल प्रदेश की स्थिति अपेक्षाकृत कमजोर हुई थी। राष्ट्रीय उपलब्धि सर्वेक्षण (NAS) तथा अन्य प्रदर्शन सूचकांकों में प्रदेश की रैंकिंग में गिरावट दर्ज की गई थी। इस चुनौती को स्वीकार करते हुए सरकार ने शिक्षा व्यवस्था में व्यापक और संरचनात्मक सुधार आरंभ किए।

उन्होंने कहा कि पिछले साढ़े तीन वर्षों के दौरान शिक्षा क्षेत्र में कई महत्वपूर्ण कदम उठाए गए हैं। प्रदेश में लगभग 8,000 शिक्षकों की नियुक्ति की गई है, जो राज्य के इतिहास की सबसे बड़ी भर्ती प्रक्रियाओं में से एक है। इसके अतिरिक्त 5,000 से अधिक नई नियुक्तियों की प्रक्रिया भी जारी है, जिससे विशेष रूप से दूर दराज और दुर्गम क्षेत्रों के विद्यालयों में शिक्षकों की उपलब्धता सुनिश्चित की जा सकेगी।

शिक्षा मंत्री ने कहा कि नई शिक्षा नीति-2020 को प्रभावी ढंग से लागू करने की दिशा में हिमाचल प्रदेश अग्रणी राज्यों में शामिल है। विद्यालयी शिक्षा से लेकर उच्च शिक्षा तक सुधारों की श्रृंखला प्रारंभ की गई है, जिसके सकारात्मक परिणाम सामने आने लगे हैं। विश्वविद्यालयों, पुस्तकालयों और विद्यालयी शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार के लिए निरंतर प्रयास किए जा रहे हैं।

उन्होंने बताया कि वित्तीय चुनौतियों के बावजूद प्रदेश सरकार ने शिक्षा के बजट में कोई समझौता नहीं किया है। वर्तमान वित्तीय वर्ष में कुल बजट का लगभग 18 प्रतिशत हिस्सा शिक्षा क्षेत्र के लिए निर्धारित किया गया है, जो सरकार की शिक्षा के प्रति प्रतिबद्धता को दर्शाता है।

शिक्षा मंत्री ने प्रदेश के शिक्षकों, शिक्षा अधिकारियों और शिक्षा विभाग की पूरी टीम की सराहना करते हुए कहा कि उनके समर्पण और प्रयासों से सरकारी विद्यालयों का प्रदर्शन लगातार बेहतर हुआ है। बोर्ड परीक्षाओं में भी सरकारी विद्यालयों के विद्यार्थियों ने उत्कृष्ट परिणाम देकर शिक्षा की गुणवत्ता में हुए सुधार को प्रमाणित किया है।

उन्होंने विद्यार्थियों से आह्वान किया कि वे अपने जीवन के इस महत्वपूर्ण चरण का सदुपयोग करें, नई ऊंचाइयों को प्राप्त करें और प्रदेश व राष्ट्र का नाम रोशन करें। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि हिमाचल प्रदेश के युवा आने वाले समय में विभिन्न क्षेत्रों में उत्कृष्ट उपलब्धियां हासिल कर देश के विकास में महत्वपूर्ण योगदान देंगे।

 

केवल डिग्री नहीं, कौशल और आत्मविश्वास से मिलेगी सफलता – राजेश धर्माणी

तकनीकी शिक्षा मंत्री राजेश धर्माणी ने कहा कि सभी मेधावी छात्रों को बधाई देते हुए कहा कि जिन बच्चों को सम्मानित किया गया है उन्होंने एक मुकाम हासिल किया है पर आगे अभी एक लम्बा रास्ता तय करना है। उन्होंने बच्चों के उज्जवल भविष्य की कामना करते हुए कहा कि जीवन में आगे चुनौतियां बहुत आएगी जिसके लिए बच्चों को तैयार रहना होगा। उन्होंने कहा कि सिर्फ पढाई के बल पर जीवन में आगे बढ़ना आसान नहीं होगा, बच्चों को स्मार्ट बनना होगा। उन्होंने कहा कि जितना आप अपने लक्ष्य के प्रति सजग होंगे तभी तभी आप आगे चलकर कामयाब होंगे। उन्होंने कहा कि बच्चों में आत्मविश्वास होना जरूरी है और स्थिरता के साथ उन्हें आगे बढ़ना होगा। उन्होंने कहा “नॉलेज विथाउट एक्शन इस ऑफ़ नो यूज़”, एकाधिक डिग्री लेने से कोई लाभ नहीं होगा जब तक उसका व्यावहारिक सदुपयोग न हो। उन्होंने कहा कि बच्चे काबिल बने ताकि उन्हें नौकरी के लिए भटकना न पड़े।

इस दौरान महापौर सुरेंद्र चौहान, उप महापौर उमा कौशल, कुलपति हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय महावीर सिंह सहित अन्य गणमान्य भी मौजूद रहे।

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