मछुआरों को बड़ी राहत: जलाशयों में मछली पकड़ने पर रॉयल्टी घटाकर 1 प्रतिशत की गई – भारत केसरी टीवी

मछुआरों को बड़ी राहत: जलाशयों में मछली पकड़ने पर रॉयल्टी घटाकर 1 प्रतिशत की गई

[मदन शर्मा ]

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6500 मछुआरों की आय बढ़ाने के लिए राज्य सरकार ने मछली पकड़ने पर रॉयल्टी घटाकर एक प्रतिशत की

राज्य के विभिन्न जलाशयों में मत्स्य पालन से जुड़े मछुआरों की आय को सुदृढ़ करने के उद्देश्य से राज्य सरकार ने वर्ष 2026-27 के बजट प्रावधानों के अनुरूप जलाशयों में मछली पकड़ने पर लगने वाली रॉयल्टी को 7.5 प्रतिशत से घटाकर मात्र एक प्रतिशत करने का निर्णय लिया है। इससे पहले राज्य सरकार ने पिछले वर्ष रॉयल्टी दर को 15 प्रतिशत से घटाकर 7.5 प्रतिशत किया था।

इस निर्णय से गोबिंद सागर, पौंग बांध, चमेरा, रंजीत सागर तथा कोल बांध जलाशयों पर आजीविका के लिए निर्भर 6500 से अधिक मछुआरा परिवारों को प्रत्यक्ष लाभ मिलेगा। यह पहल मत्स्य क्षेत्र को सशक्त बनाने की सरकार की प्रतिबद्धता का हिस्सा है, जो ग्रामीण अर्थव्यवस्था में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने के साथ-साथ पोषण और प्रोटीन सुरक्षा में भी अहम योगदान देता है।

मुख्यमंत्री Sukhvinder Singh Sukhu ने कहा कि राज्य सरकार नीतिगत सहयोग, आधारभूत संरचना विकास और मूल्य संवर्धन पहलों के माध्यम से मछुआरों की आय दोगुनी करने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा कि रॉयल्टी और लाइसेंस शुल्क में कमी से मछुआरों को बड़ी आर्थिक राहत मिलेगी, उनकी आजीविका मजबूत होगी और जीवन स्तर में सुधार आएगा।

मुख्यमंत्री ने मत्स्य विभाग को व्यापक जागरूकता अभियान चलाने के निर्देश दिए ताकि सभी पंजीकृत मछुआरे संशोधित नीति का लाभ उठा सकें। उन्होंने कहा कि पूर्व में लागू रॉयल्टी व्यवस्था का प्रतिकूल प्रभाव मछुआरा सहकारी समितियों तथा व्यक्तिगत मछुआरों की आय पर पड़ रहा था। रॉयल्टी को एक प्रतिशत तक घटाने से लाभप्रदता बढ़ेगी, जलाशय क्षेत्रों से पलायन कम होगा और राज्य की उभरती हुई ब्लू इकोनॉमी को भी मजबूती मिलेगी।

उन्होंने कहा कि सरकार मत्स्य क्षेत्र के आधुनिकीकरण के लिए कई कदम उठा रही है, जिनमें मछली उतार केंद्रों (फिश लैंडिंग सेंटर) का विकास, आइस बॉक्स उपलब्ध कराना तथा बेहतर मूल्य सुनिश्चित करने के लिए विपणन नेटवर्क को मजबूत करना शामिल है। इन पहलों और रॉयल्टी में कमी से मछुआरों की शुद्ध आय में वृद्धि होगी तथा मत्स्य पालन ग्रामीण युवाओं के लिए अधिक आकर्षक और टिकाऊ आजीविका विकल्प बनेगा।

मुख्यमंत्री ने कहा कि यह निर्णय मछुआरों की मेहनत और योगदान के सम्मान के साथ-साथ जलाशयों पर निर्भर समुदायों के समावेशी ग्रामीण विकास और आर्थिक समृद्धि को बढ़ावा देने की सरकार की प्रतिबद्धता को दर्शाता है।

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