किन्नौर में “विकसित वाइब्रेंट विलेज कार्यक्रम” का आगाज, देशभर के 100 युवा देखेंगे अनूठी हिमाचली-किन्नौरी संस्कृति – भारत केसरी टीवी

किन्नौर में “विकसित वाइब्रेंट विलेज कार्यक्रम” का आगाज, देशभर के 100 युवा देखेंगे अनूठी हिमाचली-किन्नौरी संस्कृति

[ MADAN SHARMA]

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*देश भर से आए 100 युवा देखेंगे अनूठी किन्नौरी संस्कृति*

 

*विकसित वाइब्रेंट विलेज कार्यक्रम का आगाज

 

* एक सप्ताह के लिए किन्नौर पहुंचे कई राज्यों के युवा प्रतिभागी

 

शिमला। देश भर से आए करीब 100 युवा हफ्ते भर तक हिमाचल प्रदेश और खासकर किन्नौर की संस्कृति, रहन सहन, खानपान, विरासत, रणनीतिक महत्व और परंपराओं से रूबरू होंगे।

विकसित वाइब्रेंट विलेज कार्यक्रम–2026 के तहत किन्नौर के इस भ्रमण के दौरान युवाओं को यहां के अलग अलग गांवों में जाकर स्थानीय लोगों,पंचायतों, स्थानीय प्रशासन और सुरक्षा कर्मियों से मिलने का अवसर भी मिलेगा। जिससे वे न केवल देश की विविधतापूर्ण संस्कृति से अवगत होंगे बल्कि एक भारत श्रेष्ठ भारत की भावना के विभिन्न आयामों को जान सकेंगे।

इस कार्यक्रम का आयोजन युवा कार्यक्रम एवं खेल मंत्रालय के अंतर्गत संचालित माई भारत (MY Bharat) द्वारा किया गया है। “विकसित वाइब्रेंट विलेज कार्यक्रम–2026” का शुभारंभ कल भारत-तिब्बत सीमा पुलिस (आईटीबीपी) के बेस कैंप, रिकांगपिओ (किन्नौर) में हुआ।

इस राष्ट्रीय स्तर के कार्यक्रम में बिहार, दमन एवं दीव, झारखंड, महाराष्ट्र, राजस्थान, तमिलनाडु तथा उत्तर प्रदेश सहित कई राज्यों के प्रतिभागी शामिल हुए हैं। शिविर स्थल पर सभी प्रतिभागियों का पारंपरिक हिमाचली रीति-रिवाजों के अनुसार हिमाचली टोपी और खतक भेंट कर स्वागत किया गया।

कार्यक्रम के तहत प्रतिभागियों को कार्यक्रम से संबंधित आवश्यक सामग्री, दिशा-निर्देश पुस्तिका तथा अन्य उपयोगी वस्तुओं से युक्त किट वितरित की गई। पहले दिन प्रतिभागियों को शिविर की रूपरेखा, उद्देश्यों और आगामी गतिविधियों की जानकारी भी दी गई।

इस कार्यक्रम के जरिए देश के विभिन्न भौगोलिक और सांस्कृतिक क्षेत्रों से आए युवाओं को आपस में परिचित होने, विचारों का आदान-प्रदान करने और नई मित्रताएं स्थापित करने का अवसर मिल रहा है। प्रतिभागियों ने कार्यक्रम को राष्ट्रीय एकता और सांस्कृतिक समन्वय को मजबूत करने वाला महत्वपूर्ण मंच बताया।

उल्लेखनीय है कि विकसित वाइब्रेंट विलेज कार्यक्रम का उद्देश्य सीमावर्ती गांवों के समग्र विकास, स्थानीय संस्कृति के संरक्षण, युवाओं की सहभागिता तथा राष्ट्र निर्माण में उनकी सक्रिय भूमिका को प्रोत्साहित करना है। कार्यक्रम के दौरान प्रतिभागियों को सीमांत क्षेत्रों की सामाजिक, सांस्कृतिक और विकासात्मक गतिविधियों से अवगत कराया जाएगा, जिससे वे ग्रामीण विकास और आत्मनिर्भर भारत के लक्ष्य को समझ सकें।

माई भारत अभियान के मुताबिक यह पहल युवाओं के माध्यम से राष्ट्रीय एकीकरण, सांस्कृतिक आदान-प्रदान, सामाजिक जागरूकता और विकसित भारत के संकल्प को साकार करने की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।

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