सुक्खू सरकार का मुकाबला अब विपक्ष से नहीं, अपनी ही कांग्रेस से; रोहड़ू-रामपुर के पोस्टरों से वीरभद्र सिंह गायब क्यों : राजेंद्र राणा – भारत केसरी टीवी

सुक्खू सरकार का मुकाबला अब विपक्ष से नहीं, अपनी ही कांग्रेस से; रोहड़ू-रामपुर के पोस्टरों से वीरभद्र सिंह गायब क्यों : राजेंद्र राणा

 

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Shimla bero Subhash Sharma. दिनांक: 5 अक्तूबर, 2026

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सुक्खू सरकार का मुकाबला अब विपक्ष से नहीं, अपनी ही कांग्रेस से; रोहड़ू-रामपुर के पोस्टरों से वीरभद्र सिंह गायब क्यों : राजेंद्र राणा

मंत्रिमंडल विस्तार की घोषणाएं बार-बार, कभी सुंदर सिंह ठाकुर तो कभी आशीष बुटेल का नाम चर्चा में; चार साल पूरे होने को आए, विस्तार अभी भी इंतजार में : राणा

 

शिमला। भाजपा के वरिष्ठ प्रदेश प्रवक्ता एवं पूर्व विधायक राजेंद्र राणा ने मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि प्रदेश सरकार का राजनीतिक मुकाबला अब विपक्ष से कम और अपनी ही कांग्रेस के अंदर ज्यादा दिखाई दे रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि जैसे-जैसे विधानसभा चुनाव नजदीक आ रहे हैं, कांग्रेस की अंदरूनी खींचतान खुलकर सामने आ रही है।

 

राणा ने कहा कि पिछले करीब चार वर्षों में पूर्व मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह के साथ लंबे समय तक जुड़े रहे नेताओं और उनके समर्थकों के साथ सरकार के संबंधों को लेकर बार-बार सवाल उठे हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि मुख्यमंत्री के रोहड़ू-रामपुर प्रवास के दौरान लगाए गए पोस्टरों में वीरभद्र सिंह को अपेक्षित स्थान नहीं दिए जाने को लेकर कांग्रेस से जुड़े लोग भी सोशल मीडिया पर सवाल उठा रहे हैं।

 

उन्होंने कहा, “भाजपा में गुटबाजी खोजने से पहले मुख्यमंत्री अपनी कांग्रेस की दशा और दिशा देखें। जिस पार्टी को संभालने की जिम्मेदारी सरकार और उसके नेतृत्व की थी, उसी कांग्रेस के भीतर असंतोष की खबरें लगातार सामने आ रही हैं।”

 

राजेंद्र राणा ने कहा कि कांग्रेस की प्रदेश प्रभारी रजनी पाटिल ने भी हाल में संगठन के भीतर अनुशासन और समन्वय को लेकर चिंता जताई थी। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार में जनप्रतिनिधियों की अपेक्षा मुख्यमंत्री के करीबी लोगों का प्रभाव बढ़ा है और इसी कारण कांग्रेस के भीतर असंतोष बढ़ता जा रहा है।

 

मंत्रिमंडल विस्तार घोषणा है या जुमला : राणा

 

राजेंद्र राणा ने कहा कि मुख्यमंत्री ने मंत्रिमंडल विस्तार को लेकर बार-बार सार्वजनिक बयान दिए, लेकिन चार साल का कार्यकाल पूरा होने के करीब पहुंचने के बावजूद मंत्रिमंडल का एक पद आज भी रिक्त है।

 

उन्होंने कहा, “कभी कहा गया कि कुल्लू के विधायक सुंदर सिंह ठाकुर जल्द मंत्री पद की शपथ लेंगे, फिर मंत्रिमंडल विस्तार की तारीखें चर्चा में आती रहीं। बाद में सुंदर सिंह ठाकुर के साथ पालमपुर के विधायक आशीष बुटेल का नाम भी राजनीतिक चर्चाओं में सामने आया। अब कांग्रेस की प्रदेश प्रभारी कह रही हैं कि मुख्यमंत्री की तरफ से मंत्रिमंडल विस्तार का प्रस्ताव ही नहीं आया। मुख्यमंत्री प्रदेश को बताएं कि आखिर सच क्या है?”

 

राणा ने कहा कि मुख्यमंत्री ने हाल ही में एक बार फिर सरकार के चार वर्ष पूरे होने से पहले मंत्रिमंडल विस्तार की संभावना जताई है। उन्होंने तंज कसते हुए कहा, “हर चौक-चौराहे पर मंत्रिमंडल विस्तार की चर्चा होती है, लेकिन विस्तार जमीन पर दिखाई नहीं देता। मंत्रिमंडल विस्तार अब सरकार का सपना और राजनीतिक जुमला बनकर रह गया है।”

 

उन्होंने कहा कि मंत्रिमंडल में स्थान किसे देना है, यह कांग्रेस का आंतरिक विषय है, लेकिन जब मुख्यमंत्री स्वयं बार-बार सार्वजनिक तौर पर विस्तार की बात करते हैं तो जनता को यह जानने का अधिकार है कि इतने लंबे समय से रिक्त पद क्यों नहीं भरा गया।

 

सरकार में ‘मित्र मंडली’ का प्रभाव : राणा

 

राजेंद्र राणा ने आरोप लगाया कि मुख्यमंत्री ने सरकार के आसपास “मित्र मंडली” खड़ी कर रखी है और निर्वाचित विधायकों तथा मंत्रियों की अपेक्षा गैर-निर्वाचित करीबियों का प्रभाव अधिक दिखाई देता है।

 

उन्होंने कहा कि कई बार कांग्रेस के अपने नेताओं की नाराजगी सार्वजनिक रूप से सामने आती रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि विधायकों को पर्याप्त समय नहीं मिलता और कई मौकों पर मंत्रियों को भी अपने विभागों से संबंधित निर्णयों को लेकर असहज स्थिति का सामना करना पड़ता है।

 

राणा ने कहा, “व्यवस्था परिवर्तन का नारा देते-देते मुख्यमंत्री ने कांग्रेस के भीतर ही ऐसी व्यवस्था खड़ी कर दी है, जिस पर उनकी अपनी पार्टी के नेता सवाल उठा रहे हैं।”

 

कर्ज को लेकर सरकार जारी करे श्वेतपत्र

 

राजेंद्र राणा ने प्रदेश की वित्तीय स्थिति को लेकर भी सरकार पर हमला बोला। उन्होंने दावा किया कि हिमाचल प्रदेश का कुल कर्ज करीब ₹1.15 लाख करोड़ के स्तर तक पहुंच चुका है और वर्तमान सरकार के कार्यकाल में बड़ी मात्रा में नया कर्ज लिया गया है।

 

उन्होंने मांग की कि प्रदेश सरकार अपने कार्यकाल में लिए गए कुल कर्ज, उसके उपयोग, ब्याज भुगतान और विकास कार्यों पर हुए खर्च को लेकर श्वेतपत्र जारी करे, ताकि प्रदेश की जनता के सामने वास्तविक वित्तीय स्थिति स्पष्ट हो सके।

 

उन्होंने कहा कि कर्मचारी अपने वित्तीय लाभों को लेकर आवाज उठा रहे हैं, महिलाएं चुनावी गारंटियों का हिसाब मांग रही हैं, युवा रोजगार की प्रतीक्षा कर रहे हैं और बागवान अपनी समस्याओं को लेकर लगातार सरकार के सामने मांगें उठा रहे हैं।

 

राणा ने कहा कि सरकार को राजनीतिक प्रचार से हटकर इन वर्गों के मुद्दों का समाधान करना चाहिए।

 

कांग्रेस की अंदरूनी लड़ाई पर स्थिति स्पष्ट करें मुख्यमंत्री

 

राजेंद्र राणा ने कहा कि मुख्यमंत्री को यह स्पष्ट करना चाहिए कि कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं, मंत्रियों, विधायकों और संगठन के बीच समन्वय की वास्तविक स्थिति क्या है।

 

उन्होंने कहा, “सरकार विपक्ष पर आरोप लगाने में जितनी ऊर्जा लगा रही है, उतनी ऊर्जा यदि कांग्रेस के भीतर संवाद स्थापित करने और प्रदेश के विकास कार्यों को गति देने में लगाई जाती तो हिमाचल को अधिक लाभ होता।”

 

राणा ने कहा कि भाजपा सरकार की नीतियों और कामकाज पर तथ्यों के आधार पर सवाल उठाती रहेगी और प्रदेश की आर्थिक स्थिति, रोजगार, कर्मचारियों के मुद्दे, महिलाओं से किए गए वादे तथा विकास कार्यों को लेकर सरकार से जवाब मांगती रहेगी।

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