नशे के खिलाफ एकजुट होकर लड़ने की जरूरत, सरकार अपना रही जीरो टॉलरेंस नीति: स्वास्थ्य मंत्री – भारत केसरी टीवी

नशे के खिलाफ एकजुट होकर लड़ने की जरूरत, सरकार अपना रही जीरो टॉलरेंस नीति: स्वास्थ्य मंत्री

[मदन शर्मा]

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स्वास्थ्य, सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्री डॉ. (कर्नल) धनीराम शांडिल ने आज नशे के दुरुपयोग और तस्करी से निपटने के लिए हितधारकों की एक दिवसीय कार्यशाला की अध्यक्षता की। उन्होंने कहा कि नशे का सेवन शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य दोनों के लिए बेहद हानिकारक है तथा इसके खिलाफ सरकार, परिवार और समाज को मिलकर प्रयास करने होंगे।

उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार ने नशे के खिलाफ जीरो टॉलरेंस नीति अपनाई है और नशे के दुरुपयोग एवं तस्करी पर रोक लगाने के लिए विधानसभा में कड़े कानून पारित किए गए हैं। इनमें मृत्युदंड, आजीवन कारावास, भारी जुर्माने और संपत्ति जब्त करने जैसे सख्त प्रावधान शामिल हैं।

मंत्री ने बताया कि प्रदेश सरकार ने 15 नवंबर, 2025 को शिमला के ऐतिहासिक रिज से एंटी-चिट्टा वॉकाथॉन की शुरुआत की थी। इसका उद्देश्य चिट्टे के खिलाफ लोगों की आवाज को एकजुट कर इस लड़ाई को जन आंदोलन का रूप देना था। धर्मशाला, हमीरपुर और बिलासपुर में भी वॉकाथॉन आयोजित किए गए, जिनमें हजारों युवाओं, महिलाओं और सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधियों ने भाग लिया।

उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय नशा मुक्ति अभियान के तहत प्रदेश में व्यापक स्तर पर जागरूकता अभियान चलाया जा रहा है। पिछले वर्ष सभी जिलों में करीब 18.5 लाख लोगों को नशे के दुष्प्रभावों के बारे में जागरूक किया गया, जिसमें 17,304 शिक्षण संस्थानों के विद्यार्थी भी शामिल थे।

डॉ. शांडिल ने कहा कि हिमाचल प्रदेश देश का पहला राज्य बन गया है जहां पंचायत स्तर पर नशा तस्करों और नशे का सेवन करने वाले लोगों, विशेषकर चिट्टे से जुड़े मामलों की पहचान की जा रही है। मामलों की संख्या के आधार पर पंचायतों को विभिन्न श्रेणियों में विभाजित किया जा रहा है।

उन्होंने बताया कि प्रदेश में PIT-NDPS अधिनियम को सख्ती से लागू किया जा रहा है और अब तक 63 करोड़ रुपये से अधिक की संपत्ति जब्त की जा चुकी है। वर्तमान राज्य सरकार के कार्यकाल में नशे से संबंधित 5,642 मामले दर्ज किए गए हैं और 8,250 आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है।

मंत्री ने बताया कि कुल्लू, ऊना, हमीरपुर और कांगड़ा में पुरुषों के लिए चार नशा मुक्ति एवं पुनर्वास केंद्र संचालित किए जा रहे हैं, जबकि रेडक्रॉस सोसायटी कुल्लू द्वारा महिलाओं के लिए एक केंद्र चलाया जा रहा है। हाल ही में मशोबरा में ‘नव-जीवन’ महिला नशा मुक्ति एवं पुनर्वास केंद्र शुरू किया गया है, जो प्रदेश का पहला महिला नशा मुक्ति एवं पुनर्वास केंद्र है। यहां महिलाओं को उपचार के साथ सम्मानजनक जीवन में वापस लौटने के अवसर भी उपलब्ध करवाए जाएंगे। इसके अलावा सिरमौर जिले के कोटला बड़ोग में 100 बिस्तरों वाला अत्याधुनिक नशा मुक्ति केंद्र स्थापित किया जा रहा है।

उन्होंने कहा कि नशे की लत बच्चों सहित लोगों के समग्र विकास को गंभीर रूप से प्रभावित करती है। उन्होंने कहा कि नशे की गिरफ्त में आए व्यक्ति को समाज द्वारा कलंकित करने के बजाय एक बीमारी से पीड़ित व्यक्ति के रूप में देखा जाना चाहिए, जिसे उचित उपचार और मार्गदर्शन की आवश्यकता है।

डॉ. शांडिल ने कहा कि हिमाचल प्रदेश को देवभूमि के रूप में जाना जाता है और यहां की सामाजिक एवं धार्मिक परंपराएं मजबूत रही हैं। ऐसे में युवाओं का पारंपरिक मूल्यों के बजाय नशे की ओर बढ़ना परिवार और समाज के लिए भी गंभीर चिंता का विषय है। बच्चों को सही राह पर लाकर उन्हें देवभूमि की समृद्ध परंपराओं का वाहक बनाना सरकार, अभिभावकों और समाज की साझा जिम्मेदारी है।

उन्होंने अभिभावकों से बच्चों को स्वस्थ जीवनशैली अपनाने, अच्छी आदतें विकसित करने और मानसिक रूप से मजबूत बनने के लिए प्रेरित करने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि बच्चों की प्रतिभाओं को प्रोत्साहित करने और उनमें अच्छे संस्कार विकसित करने से वे समाज के विकास में सक्रिय भूमिका निभा सकेंगे।

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