11 साल के बच्चे का जबड़ा हो गया था जाम, मुंह तक नहीं खुल रहा था; शिमला में डॉक्टरों ने सर्जरी से बदली पूरी स्थिति – भारत केसरी टीवी

11 साल के बच्चे का जबड़ा हो गया था जाम, मुंह तक नहीं खुल रहा था; शिमला में डॉक्टरों ने सर्जरी से बदली पूरी स्थिति

[MADAN SHARMA]

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डॉक्टरों ने 11 वर्षीय बच्चे की बेहद जटिल जबड़े की सर्जरी कर उसे बड़ी राहत दी है। बच्चे के जबड़े की हड्डियां आपस में जुड़ गई थीं, जिसके कारण उसका मुंह लगभग बंद हो गया था। हालत यह थी कि उसे खाना-पीना तक मुश्किल हो रहा था और सोते समय सांस लेने में भी परेशानी होती थी।

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दंत महाविद्यालय एवं अस्पताल शिमला के मुख एवं जबड़ा शल्य चिकित्सा विभाग के विशेषज्ञ डॉ. रंगीला राम और उनकी टीम ने बच्चे का उपचार किया। बच्चे के जबड़े का विकास कम होने के कारण उसकी सांस की नली भी काफी संकरी हो गई थी, जिससे सर्जरी के दौरान डॉक्टरों के सामने कई चुनौतियां थीं।

डॉक्टरों ने विशेष अस्थि-विचलन तकनीक के जरिए बच्चे के निचले जबड़े को धीरे-धीरे आगे बढ़ाया। करीब एक महीने तक रोजाना दो बार 0.5 मिलीमीटर की दर से जबड़े को आगे बढ़ाया गया। इस प्रक्रिया में निचले जबड़े को कुल 20 मिलीमीटर आगे लाया गया।

जबड़ा आगे बढ़ने के साथ सांस की नली के रास्ते में भी विस्तार हुआ। इसके बाद बच्चे के लिए सांस लेना पहले की तुलना में आसान हो गया।

सर्जरी के दौरान सांस की व्यवस्था बनी बड़ी चुनौती

डॉक्टरों के अनुसार बच्चे का मुंह लगभग बिल्कुल नहीं खुल रहा था और सांस लेने का रास्ता भी काफी संकरा था। ऐसे में ऑपरेशन के दौरान बच्चे को सुरक्षित तरीके से सांस दिलाना सबसे बड़ी चुनौती थी।

इसके लिए बच्चे की श्वासनली में छेद कर विशेष व्यवस्था करनी पड़ी। उपचार में आईजीएमसी शिमला के निश्चेतना विभाग और कान-नाक-गला विभाग की टीम ने भी सहयोग किया। पूरी प्रक्रिया के दौरान बच्चे की स्थिति पर लगातार निगरानी रखी गई।

परिवार की आर्थिक स्थिति कमजोर, विभाग ने उठाया पूरा खर्च

बच्चे का परिवार आर्थिक रूप से कमजोर था। इतनी जटिल सर्जरी और महंगे उपकरण का खर्च उठाना परिवार के लिए मुश्किल था। इसे देखते हुए मुख एवं जबड़ा शल्य चिकित्सा विभाग ने बच्चे के उपचार का पूरा खर्च स्वयं वहन किया।

बच्चे के जबड़े को आगे बढ़ाने के लिए इस्तेमाल किए गए विशेष उपकरण की कीमत करीब 5.5 से 6 लाख रुपये बताई गई है। इसका खर्च भी विभाग ने उठाया। अस्पताल में भर्ती रहने के दौरान बच्चे के खान-पान की व्यवस्था भी विभाग की ओर से की गई।

सर्जरी के बाद एक्स-रे जांच में जबड़े में हुए बदलाव स्पष्ट दिखाई दिए। उपचार के बाद बच्चा अब पहले की तुलना में सामान्य रूप से सांस ले पा रहा है और उसकी परेशानियां भी कम हुई हैं।

यह मामला जटिल जबड़े और सांस से जुड़ी समस्याओं के उपचार में मुख एवं जबड़ा शल्य चिकित्सा, निश्चेतना और ईएनटी विशेषज्ञों के बीच समन्वय की अहम भूमिका को भी सामने लाता है।

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