हमीरपुर कोर्ट का आदेश – स्मार्ट मीटर लगवाना अनिवार्य नहीं। बिना मर्जी बिजली काटी तो 10 दिन में जोड़नी होगी। HPSEBL को झटका – भारत केसरी टीवी

हमीरपुर कोर्ट का आदेश – स्मार्ट मीटर लगवाना अनिवार्य नहीं। बिना मर्जी बिजली काटी तो 10 दिन में जोड़नी होगी। HPSEBL को झटका

[मदन शर्मा]

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स्मार्ट मीटर लगवाने के लिए बिजली काटना गलत, जबरन नहीं लगा सकते – कोर्ट

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हमीरपुर (मदन शर्मा) : हिमाचल प्रदेश में स्मार्ट मीटर को लेकर एक बड़ा फैसला सामने आया है। हमीरपुर की सिविल जज टीना मल्होत्रा की कोर्ट ने साफ कर दिया है कि HPSEBL किसी भी उपभोक्ता की दुकान/घर में उसकी मर्जी के बिना स्मार्ट मीटर नहीं लगा सकता और न ही बिजली काट सकता है।

 

क्या है पूरा मामला?

यह मामला CMA रजिस्ट्रेशन नंबर 497-2026, जयमल सिंह बनाम SDO HPSEBL लंबलू का है।

याचिकाकर्ता जयमल सिंह का कहना था कि वह मोहल लंबलू, मौजा उगलता, तहसील व जिला हमीरपुर में दुकान के मालिक हैं। HPSEBL ने 17.04.2026 को नोटिस देकर कहा कि अगर स्मार्ट मीटर नहीं लगवाया तो बिजली काट दी जाएगी।

 

जयमल सिंह ने कोर्ट में अर्जी देकर कहा कि स्मार्ट मीटर लगवाना स्वैच्छिक है, जबरन नहीं। इसलिए HPSEBL को बिजली काटने और स्मार्ट मीटर लगाने से रोका जाए।

 

HPSEBL का पक्ष

HPSEBL ने कहा कि हिमाचल सरकार की नीति है कि सभी व्यावसायिक परिसरों में स्मार्ट मीटर लगेंगे। बिजली अधिनियम 2003 की धारा 55(1) के तहत सही मीटर के बिना बिजली नहीं दी जा सकती। इसलिए नोटिस दिया गया था।

 

कोर्ट ने क्या कहा?

04.06.2026 को सुनवाई के बाद कोर्ट ने महत्वपूर्ण टिप्पणियां कीं:

 

1. स्मार्ट मीटर स्वैच्छिक है, अनिवार्य नहीं : कोर्ट ने कहा कि सरकार की योजना के तहत स्मार्ट मीटर लगाना प्रमोट किया जा रहा है। पहले भी स्पष्ट किया जा चुका है कि यह स्वैच्छिक है, अनिवार्य नहीं। बिजली अधिनियम 2003 की धारा 55 और धारा 47(5) से भी यही साबित होता है।

2. धमकी देकर नहीं लगा सकते: कोर्ट ने कहा कि HPSEBL बिजली अधिनियम का हवाला देकर उपभोक्ता को डरा-धमका कर स्मार्ट मीटर नहीं लगवा सकता और बिजली नहीं काट सकता। सरकार की नीति को कानून के खिलाफ बताकर “सही मीटर” कहना कानून की गलत व्याख्या है।

3. बिजली बहाल करने के आदेश: कोर्ट ने HPSEBL को आदेश दिया कि वह याचिकाकर्ता की दुकान की बिजली, पुराने मीटर के साथ, आदेश की तारीख से 10 दिन के अंदर बहाल करे। यह आदेश मुकद्दमे के अंतिम निपटारे तक लागू रहेगा।

 

कोर्ट ने यह भी कहा कि यह आदेश केवल इस अर्जी के निपटारे के लिए है। मामले के गुण-दोष पर अंतिम फैसला बाद में होगा।

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