दो साल बाद भी खंडहर में तबदील हो रहा पटटा महलोग बस स्टैंड का शौचालय, ₹2.62 लाख का भुगतान न होने से जनता उपयोग से महरुम – भारत केसरी टीवी

दो साल बाद भी खंडहर में तबदील हो रहा पटटा महलोग बस स्टैंड का शौचालय, ₹2.62 लाख का भुगतान न होने से जनता उपयोग से महरुम

[MADAN SHARMA]

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पटटा महलोग बस स्टैंड पर जनता की सुविधा के लिए लगभग दो वर्ष पूर्व निर्मित शौचालय आज देख-रेख और प्रशासनिक लापरवाही के कारण खंडहर का रूप लेता जा रहा है। लाखों रुपये की लागत से बने इस शौचालय का लाभ स्थानीय निवासियों और यात्रियों को अब तक नहीं मिल पा रहा है।

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प्राप्त जानकारी के अनुसार, इस शौचालय निर्माण पर कुल ₹6,62,000 (छह लाख बासठ हजार रुपये) का खर्च आया है। इसमें से ₹3 लाख सरकार द्वारा और ₹1 लाख जिला परिषद चेयरमैन की निधि से स्वीकृत किए गए थे।

मजबूत ढांचा, फिर भी ताला

पूर्व उप-प्रधान नेक राम जी ने बताया कि इस प्रोजेक्ट के तहत 12×12 फीट का आर.सी.सी. (RCC) गड्ढा तैयार किया गया है और 14×12 फीट का मजबूत स्ट्रक्चर बनाया गया है। इसमें दो लेंटर डाले गए हैं तथा ऊपर टीन की चादर की छत लगाई गई है। छह यूनिट वाले इस शौचालय में पानी की टंकी, नलके, वॉशबेसिन और बाहर सड़क तक पक्का पत्थर का मार्ग (पाथ) भी निर्मित किया जा चुका है।

बकाया भुगतान बना रोड़ा

पूर्व उप-प्रधान नेक राम जी का कहना है कि शौचालय निर्माण की ₹56,000 की पेमेंट और इसके ऊपर बने कमरे की ₹2,06,000 की पेमेंट अभी तक अटकी हुई है। कुल मिलाकर ₹2,62,000 की राशि प्रशासन की तरफ से बकाया है। उनका कहना है कि जब तक निर्माण कार्य का पूरा भुगतान नहीं हो जाता, तब तक इसे आधिकारिक रूप से जनता को समर्पित करना संभव नहीं हो पा रहा है।

प्रशासनिक व्यवस्था पर सवाल

स्थानीय लोगों में इस बात को लेकर गहरा रोष है कि जब पंचायत के प्रतिनिधि (पूर्व उप-प्रधान) को अपने द्वारा करवाए गए जनहित के कार्यों का भुगतान कराने के लिए दो साल तक इंतजार करना पड़ रहा है, तो आम नागरिक के बकाये का क्या हाल होता होगा?

उचित रखरखाव न होने के कारण शौचालय के अंदर गंदगी का ढेर लगने लगा है, शौचालय दुर्गंध और असुविधा का सामना करना पड़ रहा है।

साफ-सफाई बनाए रखने की अपील

सार्वजनिक संपत्तियों की सुरक्षा और स्वच्छता को लेकर क्षेत्रवासियों से विशेष अपील की गई है कि यह शौचालय और अन्य सार्वजनिक स्थल जनता की सुविधा के लिए ही निर्मित किए जाते हैं। इन्हें केवल सरकारी ढांचा न मानकर अपनी निजी संपत्ति समझें। चाहे बस स्टैंड हो, शौचालय हो, सरकारी कार्यालय हो या खेल का मैदान—सभी जगह स्वच्छता बनाए रखना हम सभी का नैतिक दायित्व है।

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