धर्मशाला: सुखविंदर सिंह सुक्खू सरकार की योजनाओं से श्रमिकों के बच्चों के सपनों को मिली उड़ान, 1927 को मिली उच्च शिक्षा के लिए मदद – भारत केसरी टीवी

धर्मशाला: सुखविंदर सिंह सुक्खू सरकार की योजनाओं से श्रमिकों के बच्चों के सपनों को मिली उड़ान, 1927 को मिली उच्च शिक्षा के लिए मदद

[मदन शर्मा]

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सुख सरकार की योजनाओं से कामगारों के बच्चों की संवर रही तकदीर
अब नहीं रूकेगी पढ़ाई, कामगार कल्याण बोर्ड से मिल रही लाखों की मदद
जिला में श्रमिकों के 1927 बच्चों का उच्च शिक्षा पाने का सपना हुआ साकार
पहली कक्षा से लेकर पीएचडी तक किया है वितीय सहायता का प्रावधान

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धर्मशाला, 10 अप्रैल। सुख की सरकार ने कामगारों के नौनिहालों की निश्चल, अल्हड़ और उन्मुक्त हंसी खुशी में उज्जवल भविष्य के रंग भर दिए हैं। कभी अपने परिजनों के साथ मेहनत मजदूरी में हाथ बंटाते इन नौनिहालों को उच्च शिक्षा हासिल करना महज एक सपना प्रतीत होता था लेकिन मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविंदर सिंह सुक्खु के कुशल नेतृत्व में सरकार ने वंचित वर्गों तक शिक्षा की लौ जलाकर उन्हें मुख्यधारा में लाने के दृष्टिगत अनेकों कल्याणकारी योजनाएं संचालित कर रही है। इन कल्याणकारी योजनाओं ने कामगारों के बच्चों का जीवन बदलकर उनके भविष्य को सुरक्षित सुरक्षित कर रही है इन बच्चों को शिक्षा के लिए वित्तीय सहायता उपलब्ध करवाकर उनके सपने को न सिर्फ हकीकत में बदला, बल्कि उनके नौनिहालों को आत्मनिर्भर बनने की राह पर भी आगे बढ़ाया है।

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पहली कक्षा से लेकर पीएचडी तक के लिए वितीय सहायता का प्रावधान:
हिमाचल प्रदेश भवन एवं अन्य सन्निर्माण कामगार कल्याण बोर्ड बाल श्रमिक विद्या योजना और हिमाचल प्रदेश की शिक्षा हेतु वित्तीय सहायता योजना जैसी पहलों के माध्यम से, पहली कक्षा से लेकर पीएचडी तक के लिए 8400 से एक लाख 20 हजार तक की सहायता दी जा रही है। इन योजनाओं ने शिक्षा के प्रति कामगारों की पहुंच को आसान बनाया है। इसी कड़ी में कांगड़ा जिला में गत तीन वर्षों में 1927 कामगारों के नौनिहालों को शिक्षा हासिल करने के लिए कामगार कल्याण बोर्ड की ओर से तीन करोड़ 49 लाख की वितीय सहायता मुहैया करवाई गई है।

सरकार की आर्थिक मदद नहीं मिलती तो बच्चे पढ़ नहीं पाते: लाभार्थी
कांगड़ा विकास खंड के मटौर की कामगार मीनाक्षी देवी, नगरोटा के रिन्न की रजनी देवी, थुरल की अनूप रानी जैसी कई कामगारों ने कामगार कल्याण बोर्ड से वितीय मदद मिलने के बाद बच्चों के उज्जवल भविष्य को संवरते देखा है। कामगार अनूप रानी को अपने दो बेटों की पढ़ाई के लिए 84 हजार की वितीय मदद मिली है जिसमें एक बेटा आयुष राणा बी फार्मेसी तथा दूसरा बेटा पियूष राणा डी फार्मेसी कर रह है। इसी तरह से मीनाक्षी देवी को अपनी दो बेटियों की पढ़ाई के लिए 72 हजार की वितीय मदद मिली है और दोनों की बेटियां खुश्वु, मुस्कान स्नातक की पढ़ाई कर रही हैं। नगरोटा की रजनी देवी के बेटा तथा बेटी को 72 हजार की वितीय मदद दी गई है उनका बेटा सक्षम चैधरी बीएससी कंप्यूटर साइंस तथा बेटी सुहानी स्नातक की पढ़ाई कर रहे हैं।

इस योजना के लिए सरकार का धन्यवाद करते हुए कामगार मीनाक्षी, रजनी तथा अनूपी रानी कहना है अगर सरकार की आर्थिक मदद नहीं मिलती तो बच्चे पढ़ नहीं पाते। आज उन्हें आगे बढ़ते देख कर लगता है कि मेहनत रंग लाई है। उनका कहना है कि यह कहानी न केवल एक परिवार की सफलता का प्रतीक है, बल्कि यह भी दर्शाती है कि सरकारी योजनाएं जब जरूरतमंदों तक पहुंचती हैं, तो वे जीवन को संवार सकती हैं। उनका कहना है कि वर्तमान सरकार ने उनके बच्चों के लिए शिक्षा के वितीय मदद देकर उनके नौनिहालों का भविष्य उज्ज्वल बनाया है।


श्रमिकों के बच्चों को शिक्षा के क्षेत्र में आगे बढ़ाने के लिए प्रयासरत सरकार
लेबर कल्याण अधिकारी लोकेश ने बताया कि ऐसे व्यक्ति जो किसी भवन या निर्माण कार्य में कुशल, अर्द्धकुशल के रूप में या मैनुअल, लिपिकीय कार्य, सुपरवाईजर या तकनीकी, वेतन या पारिश्रमिक के लिए कार्य करते है। जैसा कि मिस्त्री, पेंटर, प्लम्बर, वेल्डर, इलेक्ट्रीशियन, कारपेंटर, मजदूर व हेल्पर आदि कामगार की श्रेणी में आते हैं और हिमाचल प्रदेश भवन एवं अन्य सन्निर्माण कामगार कल्याण बोर्ड द्वारा उन्हें पहली से पीएचडी तक पढ़ाई के लिए 8400 से लेकर एक लाख 20 हजार की आर्थिक सहायता प्रदान की जाती है।  कामगार कल्याण बोर्ड के अध्यक्ष नरदेव कंवर ने कहा कि मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू के संवेदनशील नेतृत्व में प्रदेश सरकार का यह संकल्प है कि कोई भी होनहार बच्चा केवल संसाधनों की कमी के कारण अपने सपनों से वंचित न रहे। कामगार कल्याण बोर्ड जैसे प्रयास इसी दिशा में एक मजबूत कड़ी हैं, जो राज्य के निर्माण में लगे मजदूरों को सिर्फ सुरक्षा ही नहीं, सम्मान और संभावनाओं से भरा भविष्य भी देते हैं। राज्य सरकार ऐसे श्रमिकों के बच्चों को शिक्षा के क्षेत्र में आगे बढ़ाने के लिए निरंतर प्रयासरत है। बोर्ड के माध्यम से जरूरतमंद परिवारों को समय-समय पर आर्थिक मदद प्रदान की जा रही है, ताकि वे आत्मनिर्भर बन सकें।

 

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