जलवायु परिवर्तन से बढ़ रहे आपदा जोखिम, सरकार तैयारियों को कर रही मजबूत: नेगी – भारत केसरी टीवी

जलवायु परिवर्तन से बढ़ रहे आपदा जोखिम, सरकार तैयारियों को कर रही मजबूत: नेगी

[MADAN SHARMA]

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आपदा तैयारियों को मजबूत करने के लिए सरकार लगातार प्रयासरत: राजस्व मंत्री

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जलवायु परिवर्तन और आपदा जोखिम सहनशीलता: हिमालयी भविष्य—सबक, चुनौतियां और नीतिगत मार्ग” विषय पर दो दिवसीय राज्य स्तरीय कार्यशाला का समापन आज डॉ. मनमोहन सिंह हिमाचल प्रदेश लोक प्रशासन संस्थान (MSHIPA), शिमला में हुआ। इस कार्यशाला के मुख्य अतिथि राजस्व, बागवानी एवं जनजातीय विकास मंत्री जगत सिंह नेगी थे। कार्यशाला का आयोजन हिमाचल प्रदेश राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (HPSDMA) के सहयोग से किया गया।

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अपने संबोधन में मंत्री ने कहा कि जलवायु परिवर्तन का हिमालयी राज्यों पर प्रभाव लगातार बढ़ रहा है, जिससे विशेष रूप से कृषि, बागवानी, बुनियादी ढांचे और आजीविका प्रभावित हो रहे हैं। उन्होंने बताया कि राज्य सरकार आपदा तैयारियों को मजबूत करने, अर्ली वार्निंग सिस्टम को बेहतर बनाने और मजबूत बुनियादी ढांचा विकसित करने के लिए लगातार प्रयास कर रही है, ताकि प्राकृतिक आपदाओं और जलवायु जोखिमों से प्रभावी ढंग से निपटा जा सके।

विशेष सचिव (राजस्व) डी.सी. राणा ने कहा कि आपदा जोखिम को कम करने के लिए संस्थागत तैयारी, विभागों के बीच बेहतर समन्वय और वैज्ञानिक दृष्टिकोण बेहद जरूरी है।

कार्यशाला में जलवायु परिवर्तन अनुकूलन, आपदा जोखिम आकलन, अर्ली वार्निंग सिस्टम और हिमालयी क्षेत्रों में लचीले बुनियादी ढांचे जैसे विषयों पर सत्र आयोजित किए गए। इसमें नेशनल डिजास्टर मैनेजमेंट अथॉरिटी (NDMA), नेशनल हाईवे अथॉरिटी ऑफ इंडिया (NHAI), भारतीय मौसम विभाग (IMD), जियोलॉजिकल सर्वे ऑफ इंडिया (GSI), नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ हाइड्रोलॉजी (NIH) रुड़की और काउंसिल ऑन एनर्जी, एनवायरनमेंट एंड वाटर (CEEW) के विशेषज्ञों ने अपने विचार रखे।

चर्चा के दौरान हिमाचल प्रदेश में 2023 और 2025 में आई आपदाओं से मिले अनुभवों पर भी विशेष रूप से विचार किया गया। विशेषज्ञों ने एकीकृत जोखिम आकलन, आपदा के बाद पुनर्निर्माण और बेहतर तैयारी की आवश्यकता पर जोर दिया।

कार्यशाला का समापन अतिरिक्त मुख्य सचिव (राजस्व) के.के. पंत के समापन संबोधन के साथ हुआ। उन्होंने कहा कि हिमालयी राज्यों में वैज्ञानिक योजना, संस्थागत समन्वय और सामुदायिक भागीदारी से ही जलवायु और आपदा से जुड़ी चुनौतियों का प्रभावी समाधान संभव है।

इस कार्यक्रम में MSHIPA की निदेशक रूपाली ठाकुर, नीति-निर्माता, विशेषज्ञ, शोधकर्ता तथा हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय और पंजाब विश्वविद्यालय के छात्र भी उपस्थित रहे।

 

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