नशा मुक्त हिमाचल के लिए ‘एलिवेट’ अभियान शुरू, राज्यपाल ने नशे के खिलाफ मिशन मोड में जनआंदोलन का किया आह्वान – भारत केसरी टीवी

नशा मुक्त हिमाचल के लिए ‘एलिवेट’ अभियान शुरू, राज्यपाल ने नशे के खिलाफ मिशन मोड में जनआंदोलन का किया आह्वान

[ मदन शर्मा]

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नशा मुक्त हिमाचल के लिए ‘एलिवेट’ अभियान का शुभारंभ

राज्यपाल कविंदर गुप्ता ने कहा कि बच्चों को प्रारंभिक अवस्था से ही नशे के दुष्प्रभावों के बारे में जागरूक किया जाना चाहिए। उन्होंने समाज के सभी वर्गों से युवा पीढ़ी के भविष्य की रक्षा के लिए नशे के विरुद्ध मिशन मोड में सामूहिक अभियान चलाने का आह्वान किया।

राज्यपाल आज लोक भवन में अनुव्रत विश्व भारती सोसायटी द्वारा आयोजित “एलिवेट– एक्सपीरियंस द रियल हाई, ए स्टेप टुवर्ड्स ड्रग-फ्री हिमाचल” कार्यक्रम के उद्घाटन सत्र को संबोधित कर रहे थे। इस अवसर पर सोसायटी के राज्यव्यापी नशा जागरूकता अभियान का शुभारंभ किया गया, जिसे आगामी समय में हिमाचल प्रदेश के विभिन्न जिलों तक पहुंचाया जाएगा।

कार्यक्रम में महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश, गुजरात, जम्मू-कश्मीर, पंजाब, हरियाणा, चंडीगढ़, दिल्ली, राजस्थान सहित देश के विभिन्न राज्यों से आए प्रतिनिधियों, शिक्षाविदों, समाजसेवियों और युवाओं ने भाग लिया।

राज्यपाल ने इस पहल को नशा मुक्त भारत के संकल्प को साकार करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम बताया। उन्होंने कहा कि यह अभियान ऐसे भारत के निर्माण का राष्ट्रीय संकल्प है, जहां युवा अपनी प्रतिभा, दृढ़ निश्चय और मेहनत के बल पर सफलता प्राप्त करें, न कि नशे की गिरफ्त में आकर अपना भविष्य बर्बाद करें।

उन्होंने कहा कि ‘एलिवेट’ का अर्थ ऊंचाइयों तक पहुंचना है, लेकिन वास्तविक ऊंचाई स्वस्थ, उद्देश्यपूर्ण और सेवा भाव से परिपूर्ण जीवन जीने में है। उन्होंने प्रसन्नता व्यक्त की कि यह पहल अब राष्ट्रव्यापी जनआंदोलन का रूप ले रही है, जो युवाओं को अनुशासित और सार्थक जीवन अपनाने के लिए प्रेरित करेगी।

राज्यपाल ने कहा कि यदि इस अभियान के विचारों और उद्देश्यों को जमीनी स्तर पर प्रभावी ढंग से लागू किया जाए तो हिमाचल प्रदेश नशा मुक्त राज्य बनने की दिशा में उल्लेखनीय प्रगति कर सकता है। उन्होंने कहा कि युवा देश की सबसे बड़ी शक्ति हैं और उन्हें नशे की बुराई से बचाना समाज के प्रत्येक वर्ग की साझा जिम्मेदारी है।

उन्होंने कहा कि विद्यार्थियों के व्यक्तित्व निर्माण में शिक्षकों की महत्वपूर्ण भूमिका होती है। यदि शिक्षक नियमित रूप से विद्यार्थियों का मार्गदर्शन और परामर्श करें तो उन्हें नशे की ओर भटकने से रोका जा सकता है।

राज्यपाल ने कहा कि भारत वर्ष 2047 तक विकसित राष्ट्र बनने की दिशा में आगे बढ़ रहा है। ऐसे में देश के युवाओं को नशे से बचाना इस लक्ष्य की प्राप्ति के लिए अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने प्रत्येक नागरिक से नशे के विरुद्ध इस लड़ाई में कंधे से कंधा मिलाकर योगदान देने का आह्वान किया।

उन्होंने बदलते सामाजिक परिवेश पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि एकल परिवारों की बढ़ती प्रवृत्ति के कारण युवाओं को पहले की तरह बड़ों का मार्गदर्शन नहीं मिल पा रहा है। इससे अकेलापन, तनाव, अवसाद और नशे की प्रवृत्ति बढ़ रही है। इन चुनौतियों से निपटने के लिए मजबूत पारिवारिक संबंध, खुला संवाद और भावनात्मक सहयोग आवश्यक है।

राज्यपाल ने कहा कि देवभूमि हिमाचल प्रदेश भी नशे की बढ़ती समस्या से अछूता नहीं है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि यदि प्रदेश के युवा नशे से दूर रहेंगे तो वे हिमाचल को अधिक सशक्त, स्वस्थ और समृद्ध बनाने में महत्वपूर्ण योगदान देंगे।

इस अवसर पर राज्यपाल ने नशा जागरूकता के क्षेत्र में उत्कृष्ट योगदान देने वाले व्यक्तियों को सम्मानित किया तथा नशा जागरूकता पर आधारित एक पुस्तिका का भी विमोचन किया।

मुख्य वक्ता के रूप में एनआईटी जालंधर के निदेशक एवं एनआईटी श्रीनगर के अतिरिक्त निदेशक प्रो. विनोद कुमार कनौजिया ने कहा कि हिमाचल प्रदेश भारत की आध्यात्मिक चेतना, प्राकृतिक सौंदर्य और सादगी का प्रतीक है। उन्होंने कहा कि प्रदेश के ऊंचे पर्वत लोगों को ऊंची सोच और उत्कृष्टता के लिए प्रेरित करते हैं। साथ ही उन्होंने युवाओं को मोबाइल फोन के अत्यधिक उपयोग से होने वाले दुष्प्रभावों के प्रति जागरूक करने की आवश्यकता पर भी बल दिया।

कार्यक्रम के प्रारंभ में एलिवेट के राष्ट्रीय आउटरीच प्रमुख संयोग दत्त शर्मा ने राज्यपाल का स्वागत किया। विद्या भारती हिमाचल प्रदेश के संगठन मंत्री ज्ञान कुमार ने नशे के दुष्प्रभावों पर प्रकाश डाला, जबकि प्रख्यात समाजसेवी गोपाल किशन ने नशा मुक्त भारत के लिए जनजागरूकता अभियान को और सशक्त बनाने की आवश्यकता बताई। अनुव्रत विश्व भारती सोसायटी के सदस्य मनीष शर्मा ने धन्यवाद प्रस्ताव प्रस्तुत किया।

इस अवसर पर राज्यपाल के सचिव संदीप भारद्वाज, विभिन्न विद्यालयों के छात्र-छात्राएं, शिक्षण संस्थानों के प्रतिनिधि, सामाजिक संगठनों के सदस्य तथा अन्य गणमान्य व्यक्ति भी उपस्थित रहे

 

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