केंद्रीय ट्रेड यूनियनों व संयुक्त किसान मोर्चा के आह्वान पर सोलन में मजदूर-किसान प्रदर्शन – भारत केसरी टीवी

केंद्रीय ट्रेड यूनियनों व संयुक्त किसान मोर्चा के आह्वान पर सोलन में मजदूर-किसान प्रदर्शन

[ MADAN SHARMA]

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श्रम संहिताएं रद्द करने, MSP की कानूनी गारंटी, ₹42,000 न्यूनतम मजदूरी और मुक्त व्यापार समझौतों को रद्द करने की मांग

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सोलन, 10 अगस्त 2026।

भारत छोड़ो आंदोलन की 84वीं वर्षगांठ पर केंद्रीय ट्रेड यूनियनों और संयुक्त किसान मोर्चा के राष्ट्रव्यापी आह्वान पर आज सोलन में मजदूरों, किसानों, कर्मचारियों, योजना श्रमिकों और दिहाड़ी मजदूरों का जोरदार प्रदर्शन हुआ। CITU, AITUC और हिमाचल किसान सभा की सोलन इकाइयों के संयुक्त नेतृत्व में PWD रेस्ट हाउस से ओल्ड DC ऑफिस तक विशाल जुलूस निकाला गया, जो बाद में जनसभा में तब्दील हो गया।

 

प्रदर्शनकारियों ने केंद्र व राज्य सरकार की मजदूर, किसान और जनविरोधी नीतियों के खिलाफ जोरदार नारेबाजी करते हुए विभिन्न मांगें उठाईं।

 

जनसभा को संबोधित करते हुए वक्ताओं ने कहा कि चारों श्रम संहिताओं को तत्काल रद्द किया जाए, 8 घंटे का कार्यदिवस, ट्रेड यूनियन बनाने व पंजीकरण, सामूहिक सौदेबाजी और हड़ताल का अधिकार सुनिश्चित किया जाए तथा फिक्स्ड टर्म रोजगार समाप्त कर स्थायी प्रकृति के कार्यों में स्थायी रोजगार दिया जाए। सभी श्रमिकों, जिसमें योजना श्रमिक और दिहाड़ी मजदूर भी शामिल हैं, के लिए ₹42,000 मासिक न्यूनतम मजदूरी तथा सार्वभौमिक सामाजिक सुरक्षा सुनिश्चित करने की मांग की गई।

 

किसानों के मुद्दों पर सभी फसलों के लिए C2+50% के आधार पर MSP की कानूनी गारंटी और सरकारी खरीद, किसानों व गरीबों की व्यापक कर्जमाफी तथा कृषि को सहकारी क्षेत्र के माध्यम से मजबूत करने की मांग उठाई गई। मनरेगा में 200 दिन का रोजगार और ₹700 दैनिक मजदूरी सुनिश्चित करने की भी मांग की गई।

 

वक्ताओं ने अमेरिका और यूरोपीय संघ के देशों के साथ हाल में हुए मुक्त व्यापार समझौतों को रद्द करने की मांग को प्रमुखता से उठाते हुए कहा कि ऐसे समझौतों से किसानों, मजदूरों, छोटे उत्पादकों और घरेलू उद्योगों के हित प्रभावित हो सकते हैं। देश की आर्थिक संप्रभुता और घरेलू उत्पादन की रक्षा को प्राथमिकता देने की मांग की गई।

 

प्रदर्शनकारियों ने सार्वजनिक उपक्रमों और सार्वजनिक सेवाओं के निजीकरण, विनिवेश और बिक्री पर रोक, NMP 2.0, प्राकृतिक संसाधनों की कॉरपोरेट लूट, आउटसोर्सिंग और ठेकेदारी पर रोक तथा विद्युत संशोधन विधेयक 2025 को वापस लेने की मांग की।

 

इसके अलावा पुरानी पेंशन योजना (OPS) बहाल करने, EPS-95 में वृद्धि, सभी स्वीकृत पदों पर नियमित भर्ती और नए रोजगार सृजित करने की मांग की गई। संविदा, दैनिक वेतन, घरेलू, ठेका, गिग एवं प्लेटफॉर्म श्रमिकों सहित सभी श्रमिकों को सामाजिक सुरक्षा के दायरे में लाने की मांग भी उठाई गई।

 

जनसभा में महंगाई पर रोक, सार्वभौमिक PDS, शिक्षा और स्वास्थ्य के बजट में वृद्धि, स्वास्थ्य को अधिकार बनाने, सरकारी अस्पतालों और ESIC का विस्तार, स्वच्छ पेयजल, स्वच्छता और आवास की गारंटी की मांग की गई। साथ ही संपत्तिकर लगाने और अति-धनाढ्य वर्ग पर आयकर बढ़ाने तथा लोकतांत्रिक आंदोलनों के दमन के लिए इस्तेमाल किए जा रहे कठोर कानूनी प्रावधानों को वापस लेने की मांग भी की गई।

 

वक्ताओं ने कहा कि किसान आंदोलन, मजदूर आंदोलन और छात्र आंदोलनों ने साबित किया है कि एकजुट जनसंघर्ष के सामने सरकारों को जनता की आवाज सुननी पड़ती है। उन्होंने मजदूर-किसान एकता को मजबूत करते हुए संघर्ष को और व्यापक बनाने का संकल्प लिया तथा चेतावनी दी कि मांगों पर सकारात्मक कार्रवाई नहीं हुई तो आने वाले समय में महापड़ाव, रास्ता रोको, रेल रोको और अन्य व्यापक लोकतांत्रिक आंदोलन किए जाएंगे।

 

जनसभा को AITUC राज्य सचिव अतुल भारद्वाज, CITU जिला सोलन अध्यक्ष राकेश कुमार, AITUC राज्य कोषाध्यक्ष अनूप पराशर, हिमाचल किसान सभा से राज्य अध्यक्ष कुलदीप सिंह तंवर, जिलाध्यक्ष प्यारे लाल वर्मा और जिला उपाध्यक्ष नीतीश ठाकुर सहित विभिन्न मजदूर व किसान नेताओं ने संबोधित किया।

 

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