प्रधानमंत्री पद की गरिमा का ख्याल रखें रजनी पाटिल, अमर्यादित ‘भैंस का अवतार ” वाली टिपप्णी अस्वीकारीय – राकेश जम्वाल – भारत केसरी टीवी

प्रधानमंत्री पद की गरिमा का ख्याल रखें रजनी पाटिल, अमर्यादित ‘भैंस का अवतार ” वाली टिपप्णी अस्वीकारीय – राकेश जम्वाल

[MADAN SHARMA]

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*आलोचना करनी है तो तथ्यों के आधार पर करें, अमर्यादित भाषा से प्रधानमंत्री पद की गरिमा को ठेस न पहुंचाएं – जम्वाल*

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*मोदी पर टिप्पणी से पहले कांग्रेस अपनी गारंटियों का हिसाब दे – जम्वाल*

 

शिमला। भाजपा के मुख्य प्रवक्ता एवं सुंदरनगर विधायक राकेश जम्वाल ने सोलन में कांग्रेस की प्रदेश प्रभारी रजनी पाटिल द्वारा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ की गई आपत्तिजनक टिप्पणी पर तीखा पलटवार किया है। उन्होंने कहा कि रजनी पाटिल द्वारा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को ‘भैंस का दूसरा अवतार’ कहना कांग्रेस की राजनीतिक हताशा और वैचारिक दिवालियेपन का प्रमाण है। उन्होंने पाटिल को राजनीतिक मर्यादा में रहकर बयानबाजी करने की सलाह भी दी और कहा कि जब कांग्रेस के पास मोदी सरकार की उपलब्धियों का जवाब देने के लिए तथ्य नहीं बचे तो उसके नेता भाषा की मर्यादा की धज्जियां उड़ानें लगे हैं।

राकेश जम्वाल ने कहा कि कांग्रेस की प्रदेश प्रभारी को यह याद रखना चाहिए कि नरेंद्र मोदी केवल भाजपा के नेता नहीं, बल्कि देश के प्रधानमंत्री हैं। प्रधानमंत्री के खिलाफ ऐसी अमर्यादित टिप्पणी करोड़ों देशवासियों के जनादेश का अपमान है। उन्होंने कहा कि राजनीतिक विरोध लोकतंत्र का हिस्सा है, लेकिन प्रधानमंत्री पद की गरिमा को ठेस पहुंचाने वाली भाषा को राजनीतिक बहस का स्तर नहीं बनाया जा सकता। उन्होंने कांग्रेस नेताओं पर कटाक्ष करते हुए कहा कि उन्हें मोदी जी के खिलाफ ‘भैंसका अवतार ‘ जैसे शब्द खोजने से पहले यह देखना चाहिए कि जनता ने कांग्रेस की राजनीति को किन कारणों से लगातार नकारा है। उन्होंने कहा कि जिस पार्टी के पास अपने शासन और वादों का हिसाब देने के लिए ठोस जवाब नहीं है, उसके नेता दूसरों पर कीचड़ उछालकर शायद अपनी राजनीतिक असफलताओं को ढकना चाहते हैं।

 

राकेश जम्वाल ने कहा कि कांग्रेस के नेताओं को प्रधानमंत्री मोदी की आलोचना करनी है तो तथ्यों पर करे। लेकिन अफसोस की बात है कि कांग्रेस नेताओं के पास आलोचना के लिये कोई मुद्दा नहीं हैं और सुर्खियों में बने रहने के लिए ओछी हरकतें कर खुद ही हंसी के पात्र बन रहे हैं। उन्होंने कहा कि कांग्रेस नेताओं को “नल से जल, गरीबों के पक्के घर, आयुष्मान भारत, उज्ज्वला योजना, जनधन खाते, स्वच्छ भारत मिशन, किसान सम्मान निधि और अन्य जनकल्याणकारी योजनाओं” पर तथ्यात्मक बहस करनी चाहिए। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी ने अंत्योदय की भावना के साथ योजनाओं का लाभ समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाने का प्रयास किया है। कांग्रेस यदि इन कार्यों से असहमत है तो तथ्यों के साथ जनता के सामने आए, लेकिन व्यक्तिगत टिप्पणी करके उपलब्धियों का हिसाब नहीं मिटाया जा सकता।

 

कांग्रेस के झांसे में आने वाली नहीं जनता

 

जम्वाल ने कहा कि विधानसभा चुनाव से पहले कांग्रेस ने गारंटियों का ऐसा मायाजाल बुना था कि हर वर्ग को लगा था कि सत्ता में आते ही उसके अच्छे दिन आ जाएंगे। महिलाओं को 1500 रुपये देने की गारंटी भी इसी राजनीतिक वादे का हिस्सा थी। लेकिन आज कांग्रेस नेता इन गारंटियों पर मुंह छिपाते फिरते हैं। जनता जब इस बारे में सवाल करती है तो कांग्रेस नेताओं के पास कोई जवाब नहीं होता और फिर केंद्र के खिलाफ अनाप-शनाप टिप्पणी कर जनता को गुमराह करने का प्रयास किया जाता है। उन्होंने कहा कि प्रदेश की जनता अब कांग्रेस नेताओं की बातों में आने वाली नहीं हैं और समय पर इसका करारा जवाब कांग्रेस को मिलेगा।

राकेश जम्वाल ने कहा कि कांग्रेस की प्रदेश प्रभारी को सोलन में राजनीतिक नौटंकी करने से पहले अपनी ही सरकार से पूछना चाहिए कि रोजगार की गारंटी का क्या हुआ। महिलाओं की 1500 रुपये की गारंटी का क्या हुआ। युवाओं से किए वादों का क्या हुआ और प्रदेश की आर्थिक स्थिति को लेकर सरकार जनता को कब स्पष्ट जवाब देगी।

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