प्रधानमंत्री आवास के बाहर कांग्रेस का प्रदर्शन लोकतांत्रिक मर्यादाओं, संवैधानिक व्यवस्था और राष्ट्रीय सुरक्षा पर हमला : बलबीर वर्मा – भारत केसरी टीवी

प्रधानमंत्री आवास के बाहर कांग्रेस का प्रदर्शन लोकतांत्रिक मर्यादाओं, संवैधानिक व्यवस्था और राष्ट्रीय सुरक्षा पर हमला : बलबीर वर्मा

शिमला ब्यूरो सुभाष शर्मा।   22/07/2026

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प्रधानमंत्री आवास के बाहर कांग्रेस का प्रदर्शन लोकतांत्रिक मर्यादाओं, संवैधानिक व्यवस्था और राष्ट्रीय सुरक्षा पर हमला : बलबीर वर्म

 

दिल्ली हिंसा में 118 से अधिक पुलिसकर्मी घायल, सरकारी संपत्ति को नुकसान; हिंसा के लिए जिम्मेदार लोगों पर हो देशद्रोह सहित कड़ी कानूनी कार्रवाई : भाजपा

 

शिमला। भारतीय जनता पार्टी, हिमाचल प्रदेश द्वारा आज उपायुक्त कार्यालय, सीटीओ चौक, शिमला के बाहर विशाल धरना-प्रदर्शन आयोजित किया गया। यह प्रदर्शन दिल्ली में प्रधानमंत्री आवास के निकट कांग्रेस नेता राहुल गांधी, प्रियंका गांधी तथा अन्य विपक्षी नेताओं द्वारा किए गए विरोध प्रदर्शन के विरोध में आयोजित किया गया।

 

धरने में भाजपा प्रदेश उपाध्यक्ष बलबीर वर्मा, पूर्व मंत्री सुरेश भारद्वाज, राजीव सहजल, प्रदेश महामंत्री संजीव कटवाल, प्रदेश उपाध्यक विनोद कुमार, रश्मिधर सूद, सचिव संजय ठाकुर, कुसुम सदरेट, प्रमोद ठाकुर, प्रेम ठाकुर, प्रदेश मीडिया संयोजक कर्ण नंदा, प्रत्याशी संजय सूद, रवि मेहता, के एल ठाकुर, परमजीत पम्मी, चेतन बरागटा, पुरुषोत्तम गुलेरिया, रमा ठाकुर, सुदीप महाजन, प्यार सिंह कंवर, जिला अध्यक्ष अरुण फलटा, रतन पाल, जिला पदाधिकारी, सभी मंडल अध्यक्ष तथा बड़ी संख्या में भाजपा कार्यकर्ता उपस्थित रहे।

 

धरने को संबोधित करते हुए भाजपा प्रदेश उपाध्यक्ष बलबीर वर्मा ने कहा कि देश में लोकतंत्र प्रत्येक नागरिक को अपनी बात रखने का अधिकार देता है, लेकिन लोकतंत्र की आड़ में देश की सर्वोच्च संवैधानिक संस्थाओं, प्रधानमंत्री की सुरक्षा व्यवस्था और कानून-व्यवस्था को चुनौती देना किसी भी दृष्टि से स्वीकार्य नहीं हो सकता। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री का आधिकारिक आवास देश के सबसे संवेदनशील सुरक्षा क्षेत्रों में शामिल है, जहां बिना अनुमति इस प्रकार का प्रदर्शन करना गंभीर सुरक्षा चिंता का विषय है। दिल्ली पुलिस द्वारा कांग्रेस नेताओं को हिरासत में लिया जाना इसी बात का प्रमाण है कि कानून सबके लिए समान है।

 

बलबीर वर्मा ने कहा कि कांग्रेस पार्टी लगातार स्वयं को संविधान और लोकतंत्र का सबसे बड़ा रक्षक बताने का प्रयास करती है, लेकिन जब कानून और सुरक्षा प्रोटोकॉल का पालन करने की बात आती है तो वही कांग्रेस सबसे पहले नियमों को तोड़ने का कार्य करती है। उन्होंने कहा कि यदि कोई सामान्य नागरिक या अन्य संगठन प्रधानमंत्री आवास के बाहर इसी प्रकार का प्रदर्शन करता तो कांग्रेस सबसे पहले कानून का हवाला देती, किंतु अपने नेताओं के मामले में उसका दोहरा चरित्र उजागर हो गया है।

 

उन्होंने कहा कि दिल्ली में जिस आंदोलन को कांग्रेस ने खुला समर्थन दिया, वह बाद में हिंसक घटनाओं में बदल गया। दिल्ली पुलिस के आधिकारिक बयान के अनुसार 118 से अधिक पुलिसकर्मी घायल हुए, लगभग 70 प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिया गया तथा 15 से 20 सरकारी वाहन एवं अन्य सरकारी संपत्ति को नुकसान पहुंचाया गया। यह किसी लोकतांत्रिक आंदोलन का नहीं बल्कि अराजकता का उदाहरण है।

 

बलबीर वर्मा ने कहा कि घायल पुलिसकर्मियों में कई वरिष्ठ अधिकारी भी शामिल हैं, जिन्होंने अपनी ड्यूटी निभाते हुए गंभीर चोटें झेलीं। पुलिस पर पथराव करना, सरकारी संपत्ति को नुकसान पहुंचाना और हिंसा फैलाना किसी भी लोकतांत्रिक विरोध का हिस्सा नहीं हो सकता। उन्होंने कहा कि जो लोग लोकतंत्र की दुहाई देते हैं, उन्हें सबसे पहले लोकतांत्रिक मर्यादाओं का पालन करना चाहिए।

 

उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस पार्टी ने इस पूरे घटनाक्रम में प्रत्यक्ष अथवा अप्रत्यक्ष रूप से उन तत्वों का समर्थन किया जिन्होंने राजधानी दिल्ली का माहौल बिगाड़ा। उन्होंने कहा कि जिस तथाकथित “कॉकरोच आंदोलन” को छात्रों और युवाओं के नाम पर चलाया गया, उसे वामपंथी विचारधारा से जुड़े समूहों और राजनीतिक दलों ने अपने हितों के लिए प्रयोग करने का प्रयास किया। भाजपा का मानना है कि छात्रों की वास्तविक समस्याओं का समाधान संवाद से होना चाहिए, न कि हिंसा, अराजकता और सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाकर।

 

बलबीर वर्मा ने कहा कि पिछले कुछ वर्षों में कांग्रेस नेतृत्व पर विदेशी संस्थाओं और बाहरी प्रभावों के साथ संबंधों को लेकर समय-समय पर सार्वजनिक और राजनीतिक स्तर पर गंभीर प्रश्न उठते रहे हैं। यदि दिल्ली में हुए आंदोलन के संदर्भ में विदेशी वित्तपोषण अथवा किसी बाहरी राष्ट्रविरोधी नेटवर्क की भूमिका के संबंध में कोई ठोस प्रमाण सामने आते हैं, तो उनकी निष्पक्ष जांच कर दोषियों के विरुद्ध कठोर कानूनी कार्रवाई की जानी चाहिए। उन्होंने कहा कि राष्ट्र की सुरक्षा से जुड़ा कोई भी मामला राजनीति से ऊपर है। (विदेशी फंडिंग के संबंध में अभी तक कोई आधिकारिक रूप से पुष्ट सार्वजनिक प्रमाण उपलब्ध नहीं हैं।)

 

उन्होंने कहा कि कांग्रेस नेतृत्व ने अपने समर्थकों को उग्र बनाने का कार्य किया, जिसके परिणामस्वरूप दिल्ली में कानून-व्यवस्था प्रभावित हुई। उन्होंने कहा कि जो लोग पुलिस पर हमला करते हैं, सरकारी संपत्ति को नुकसान पहुंचाते हैं और संवैधानिक संस्थाओं को चुनौती देते हैं, उनके विरुद्ध कठोरतम कानूनी कार्रवाई होनी चाहिए, ताकि भविष्य में कोई भी संगठन इस प्रकार की अराजकता फैलाने का साहस न कर सके।

 

बलबीर वर्मा ने कहा कि भारतीय जनता पार्टी हमेशा शांतिपूर्ण लोकतांत्रिक विरोध की पक्षधर रही है, लेकिन हिंसा, अराजकता और राष्ट्रीय सुरक्षा से खिलवाड़ को किसी भी परिस्थिति में स्वीकार नहीं करेगी। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री केवल एक राजनीतिक दल के नेता नहीं, बल्कि देश के प्रधानमंत्री हैं और उनकी सुरक्षा से समझौता पूरे राष्ट्र की सुरक्षा से समझौता है।

 

उन्होंने कहा कि कांग्रेस पार्टी को देश की जनता से माफी मांगनी चाहिए कि उसके नेताओं ने राजधानी दिल्ली में ऐसा वातावरण बनाया, जिससे पुलिसकर्मी घायल हुए, सरकारी संपत्ति को नुकसान पहुंचा और कानून-व्यवस्था प्रभावित हुई। भाजपा ने मांग की कि हिंसा में शामिल सभी व्यक्तियों की निष्पक्ष जांच कर दोषियों के विरुद्ध कठोर कानूनी कार्रवाई की जाए तथा भविष्य में इस प्रकार की घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए प्रभावी कदम उठाए जाएं।

 

 

 

 

मुख्यमंत्री को ऐसी क्या नौबत आ गई कि रात आठ बजे राजभवन के बाहर धरना देना पड़ा? : बलबीर वर्मा

 

सुक्खू सरकार हिमाचल की नहीं, गांधी परिवार की सेवा में लगी; प्रदेश के मुद्दे छोड़ कांग्रेस हाईकमान को खुश करने में व्यस्त : बलबीर वर्मा

 

शिमला। भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश उपाध्यक्ष बलबीर वर्मा ने मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू द्वारा राजभवन के बाहर देर रात धरना देने पर तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा कि हिमाचल प्रदेश के इतिहास में यह पहली बार है कि प्रदेश का मुख्यमंत्री स्वयं अपनी ही संवैधानिक व्यवस्था पर प्रश्नचिह्न लगाते हुए रात आठ बजे राजभवन के बाहर धरना देने बैठ गया। यह प्रदेश की गरिमा, मुख्यमंत्री पद की मर्यादा और लोकतांत्रिक परंपराओं के विपरीत है।

 

बलबीर वर्मा ने कहा कि मुख्यमंत्री को प्रदेश की जनता ने धरना देने के लिए नहीं, बल्कि शासन चलाने के लिए चुना है। यदि प्रदेश का मुख्यमंत्री स्वयं धरने पर बैठ जाए तो यह उसकी प्रशासनिक विफलता का सबसे बड़ा प्रमाण है। पिछले ढाई वर्षों में कांग्रेस सरकार प्रदेश के आर्थिक संकट, बेरोजगारी, कानून-व्यवस्था, कर्मचारियों के लंबित देयकों, किसानों-बागवानों की समस्याओं और विकास कार्यों को लेकर पूरी तरह विफल रही है। अब जनता का ध्यान इन असफलताओं से हटाने के लिए भावनात्मक और राजनीतिक ड्रामा किया जा रहा है।

 

उन्होंने कहा कि सबसे बड़ा प्रश्न यह है कि मुख्यमंत्री को आखिर ऐसी क्या मजबूरी आ गई कि उन्हें रात के समय राजभवन के बाहर धरना देना पड़ा। क्या प्रदेश में इतने गंभीर जनहित के मुद्दे समाप्त हो गए हैं कि मुख्यमंत्री अब केवल कांग्रेस नेतृत्व के राजनीतिक एजेंडे को आगे बढ़ाने में लगे हैं? मुख्यमंत्री और उनका पूरा मंत्रिमंडल आज हिमाचल प्रदेश की जनता की चिंता छोड़कर केवल एक परिवार—गांधी परिवार—को खुश करने की राजनीति कर रहा है। राहुल गांधी और प्रियंका गांधी के समर्थन में उतरकर मुख्यमंत्री ने स्पष्ट कर दिया है कि उनकी पहली प्राथमिकता हिमाचल नहीं बल्कि कांग्रेस हाईकमान है।

 

बलबीर वर्मा ने कहा कि प्रदेश की जनता पूछ रही है कि जिन महिलाओं से ₹1,500 प्रतिमाह देने का वादा किया गया, उनका क्या हुआ? 5 लाख रोजगार का वादा कहां गया? 300 यूनिट मुफ्त बिजली का वादा क्यों पूरा नहीं हुआ? कर्मचारियों, पेंशनरों, किसानों और बागवानों के लंबित मुद्दों का समाधान क्यों नहीं हुआ? इन प्रश्नों का उत्तर देने के बजाय मुख्यमंत्री राजनीतिक नौटंकी कर रहे हैं।

 

उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस नेतृत्व देशभर में ऐसे आंदोलनों का समर्थन कर रहा है जिनसे कानून-व्यवस्था प्रभावित हो रही है। मुख्यमंत्री भी उसी राजनीति का हिस्सा बनकर राहुल गांधी और प्रियंका गांधी के समर्थन में उतर गए हैं। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री को यह समझना चाहिए कि उनका दायित्व किसी एक राजनीतिक परिवार के प्रति नहीं बल्कि हिमाचल प्रदेश की लगभग 75 लाख जनता के प्रति है।

 

बलबीर वर्मा ने कहा कि कांग्रेस पार्टी लगातार ऐसे राजनीतिक वातावरण का निर्माण कर रही है जिससे समाज में टकराव और भ्रम की स्थिति उत्पन्न हो। मुख्यमंत्री का राजभवन के बाहर धरना इसी राजनीति का हिस्सा है। राज्य का संवैधानिक प्रमुख राजभवन है और मुख्यमंत्री का दायित्व संवैधानिक संस्थाओं का सम्मान करना है, न कि राजनीतिक दबाव बनाने के लिए उन्हें विवाद का केंद्र बनाना।

 

उन्होंने कहा कि कांग्रेस सरकार पूरी तरह दिशाहीन हो चुकी है। प्रदेश के विकास, निवेश, रोजगार, सड़क, स्वास्थ्य और शिक्षा जैसे विषय पीछे छूट चुके हैं, जबकि सरकार का पूरा ध्यान केवल गांधी परिवार की राजनीतिक लड़ाई लड़ने में लगा हुआ है। मुख्यमंत्री और उनके मंत्री दिल्ली की राजनीति में अधिक रुचि दिखा रहे हैं, जबकि हिमाचल प्रदेश की जनता बुनियादी सुविधाओं के लिए संघर्ष कर रही है।

 

बलबीर वर्मा ने कहा कि भारतीय जनता पार्टी स्पष्ट करना चाहती है कि वह लोकतांत्रिक मूल्यों, संवैधानिक संस्थाओं और राष्ट्रहित के साथ सदैव खड़ी रही है। मुख्यमंत्री को राजनीतिक नाटक करने के बजाय प्रदेश के शासन पर ध्यान देना चाहिए। हिमाचल की जनता कांग्रेस सरकार की विफलताओं को भली-भांति समझ चुकी है और आने वाले समय में इसका लोकतांत्रिक उत्तर अवश्य देगी।

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