वानिकी शिक्षा एवं अनुसंधान में सहयोग की दिशा में आगे बढ़े नौणी विवि और एफआरआई – भारत केसरी टीवी

वानिकी शिक्षा एवं अनुसंधान में सहयोग की दिशा में आगे बढ़े नौणी विवि और एफआरआई

[मदन शर्मा]

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वानिकी शिक्षा एवं अनुसंधान में सहयोग की दिशा में आगे बढ़े नौणी विवि और एफआरआई

नौणी/देहरादून: भारत में वानिकी शिक्षा एवं अनुसंधान को सुदृढ़ बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए डॉ. यशवंत सिंह परमार औद्यानिकी एवं वानिकी विश्वविद्यालय (यूएचएफ), नौणी के कुलपति प्रो. एच.एस. बवेजा के नेतृत्व में एक उच्चस्तरीय प्रतिनिधिमंडल ने वन अनुसंधान संस्थान (एफआरआई), देहरादून का दौरा किया। इस दौरान शिक्षण, अनुसंधान, प्रसार शिक्षा तथा उद्योग सहभागिता के क्षेत्रों में दीर्घकालिक सहयोग और व्यापक समझौता ज्ञापन (एमओयू) की संभावनाओं पर विचार-विमर्श किया गया।

प्रतिनिधिमंडल ने एफआरआई के विभिन्न विभागों के वैज्ञानिकों एवं विशेषज्ञों के साथ विस्तृत चर्चा की। वार्ता का मुख्य उद्देश्य ऐसे संयुक्त कार्यक्रमों की संभावनाओं का पता लगाना था, जो देशभर में वानिकी शिक्षा, अनुसंधान तथा विस्तार गतिविधियों को नई दिशा प्रदान कर सकें। नौणी के प्रतिनिधिमंडल में अनुसंधान निदेशक डॉ. देविना वैद्य, वानिकी महाविद्यालय के अधिष्ठाता डॉ. सी.एल. ठाकुर, पादप रोग विज्ञान विभागाध्यक्ष डॉ. अनिल हांडा, पुष्प विज्ञान विभागाध्यक्ष डॉ. बी.एस. दिल्टा, संयुक्त निदेशक अनुसंधान डॉ. विशाल राणा तथा सिल्वीकल्चर एवं वानिकी विभागाध्यक्ष डॉ. रोहित वशिष्ठ शामिल थे। एफआरआई की ओर से डॉ. दिनेश कुमार, डीन (अकादमिक), डी.पी. खली, समूह समन्वयक (अनुसंधान), डॉ. अजय ठाकुर, वैज्ञानिक-जी, एफआरआई तथा विभिन्न प्रभागों के अध्यक्षों ने बैठक में भाग लिया।

दोनों संस्थानों के बीच हुई चर्चा का केंद्र संयुक्त शैक्षणिक एवं अनुसंधान कार्यक्रमों का विकास रहा। सहयोग के प्रमुख क्षेत्रों में पाठ्यक्रम विकास, संकाय आदान-प्रदान, छात्र गतिशीलता कार्यक्रम तथा जैव विविधता संरक्षण, जलवायु-अनुकूल सिल्वीकल्चर, कार्बन संचयन, कृषि वानिकी प्रणालियाँ, आक्रामक प्रजातियों का प्रबंधन, गैर-काष्ठ वन उत्पाद और वन आनुवंशिक संसाधनों जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर संयुक्त अनुसंधान परियोजनाएँ शामिल हैं।

दोनों संस्थानों ने प्रसार शिक्षा एवं सामुदायिक पहुंच कार्यक्रमों को मजबूत बनाने में भी रुचि व्यक्त की, ताकि वैज्ञानिक उपलब्धियों का लाभ जमीनी स्तर तक पहुँच सके। वन आधारित उद्योगों, स्टार्ट-अप्स तथा नीति निर्माण से जुड़े संस्थानों के साथ सहयोग को भी भविष्य की महत्वपूर्ण प्राथमिकता के रूप में चिन्हित किया गया।

इस अवसर पर कुलपति डॉ. एच.एस. बवेजा ने कहा कि दोनों संस्थानों के लिए एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर है। उन्होंने कहा कि शिक्षा, अनुसंधान और प्रसार के क्षेत्रों में हमारी संयुक्त विशेषज्ञता वन विज्ञान में नवाचार के नए अवसर उत्पन्न करेगी तथा सतत वन प्रबंधन और जलवायु अनुकूलन के लक्ष्यों को प्राप्त करने में महत्वपूर्ण योगदान देगी।

डॉ. देविना वैद्य ने भी इस साझेदारी के संभावित लाभों पर प्रकाश डालते हुए कहा कि यह सहयोग अनुसंधान क्षमता को सुदृढ़ करेगा, ज्ञान के आदान-प्रदान को बढ़ावा देगा, उच्च प्रभाव वाली परियोजनाओं को आकर्षित करेगा तथा वानिकी क्षेत्र और ग्रामीण समुदायों के लिए व्यावहारिक समाधान विकसित करने में सहायक सिद्ध होगा।

बैठक सकारात्मक सुझावों के साथ सम्पन्न हुई और दोनों संस्थानों ने निकट भविष्य में प्रस्तावित एमओयू को औपचारिक रूप देने की प्रतिबद्धता व्यक्त की। यह साझेदारी वानिकी एवं संबद्ध विज्ञानों में संयुक्त अनुसंधान, शैक्षणिक उत्कृष्टता, क्षमता निर्माण तथा प्रौद्योगिकी हस्तांतरण के लिए एक सशक्त ढांचा प्रदान करेगी।

दशकों के अनुभव और सतत विकास की साझा दृष्टि के साथ यूएचएफ नौणी और एफआरआई देहरादून वन विज्ञान को नई ऊंचाइयों तक ले जाने, भावी वानिकी पेशेवरों को तैयार करने तथा पर्यावरण संरक्षण, जलवायु अनुकूलन और हरित विकास के राष्ट्रीय लक्ष्यों में योगदान देने के लिए प्रतिबद्ध हैं। यह प्रस्तावित सहयोग न केवल दोनों संस्थानों बल्कि समग्र वानिकी क्षेत्र को लाभान्वित करेगा तथा राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय वानिकी अनुसंधान नेटवर्क में भारत की स्थिति को और मजबूत बनाएगा।

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