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हिमाचल में तेजी से बढ़ रहे किडनी के मरीज, हर साल 25–30% इजाफा

[MADAN SHARMA]

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हिमाचल में हर साल 25 से 30 फीसदी बढ़ रहे किडनी के मरीज, जानें क्या है वजह

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राजधानी शिमला के आईजीएमसी के मेडिसन विभाग और चमियाना सुपर स्पेशलिटी अस्पताल के नेफ्रोलॉजी विभाग की ओपीडी में उपचार करवाने आने वाले मरीजों का आंकड़ा हाल के वर्षों में काफी बढ़ा है।

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हिमाचल में लोगों की बदली जीवनशैली, खान-पान के तौर तरीकों के बीच किडनी के मरीजों की संख्या में हर साल 25 से 30 फीसदी की बढ़ोतरी हो रही है। इसमें करीब 13 फीसदी लोगों को समय पर किडनी रोगों का पता ही नहीं चल पाता। राजधानी शिमला के आईजीएमसी के मेडिसन विभाग और चमियाना सुपर स्पेशलिटी अस्पताल के नेफ्रोलॉजी विभाग की ओपीडी में उपचार करवाने आने वाले मरीजों का आंकड़ा हाल के वर्षों में काफी बढ़ा है। 2023 में यह आंकड़ा 3694 तक था, जो 2024 में 4100 तक पहुंचा और 2025 में 4200 पार कर गया।

3500 तक मरीज डायलिसिस पर
इनमें पुराने मरीज भी शामिल हैं। प्रदेश में 2000 से 3500 तक मरीज किडनी की बीमारी के कारण डायलिसिस पर हैं। हर साल एक हजार से 1500 मरीज किडनी की बीमारी के ठीक न हो पाने के कारण डायलिसिस पर जा रहे हैं। प्रदेश में आईजीएमसी, टांडा मेडिकल कॉलेज और एम्स बिलासपुर में अलग से किडनी रोगियों के लिए नेफ्रोलॉजी विभाग में उपचार की सुविधा उपलब्ध है। प्रदेश में प्रधानमंत्री नेशनल डायलिसिस प्रोग्राम के तहत के 24 सरकारी अस्पतालों में डायलिसिस की सुविधा उपलब्ध है, वहीं पीपीपी मोड के आधार पर 44 जगह डायलिसिस किया जाता है।

क्या है किडनी का महत्व व कार्य
किडनी (गुर्दा) के मुख्य कार्य में खून से अपशिष्ट और टॉक्सिन निकालना, पानी और मिनरल का संतुलन बनाए रखना, पेशाब बनाना, हार्मोन (जैसे एरिथ्रोपोइटिन) बनाना यह, लाल रक्त कोशिकाओं के निर्माण में मदद करना, ब्लड प्रेशर को नियंत्रित करना, हड्डियों के लिए विटामिन डी को सक्रिय करने के साथ शरीर के एसिड-बेस (अम्ल-क्षार) संतुलन को बनाए रखना है।

किडनी रोग के मुख्य कारण
सुपर स्पेशलिटी चमियाना के नेफ्रोलॉजी विभागाध्यक्ष डॉ. निशांत नड्डा ने बताया कि हिमाचल में हर साल 20 से 25 फीसदी किडनी रोगी बढ़ रहे हैं। किडनी रोग किसी भी आयु वर्ग के लोगों को हो सकता है। हाइपरटेंशन, उच्च रक्तचाप के तीस फीसदी मरीजों, 50 फीसदी शुगर मरीजों के अलावा दस फीसदी तक यह उन लोगों को हो सकता है, जो बिना चिकित्सक को दिखाए, अपनी मर्जी से दर्द या अन्य दवाओं को नियमित सेवन करते हैं। किडनी के रोग की अन्य वजह में बदला लाइफ स्टाइल और खान-पान भी मुख्य वजह है। किडनी के केस के बढ़ने की एक वजह लोगों की बढ़ी जागरूकता भी है, चूंकि लोग अब इसका उपचार करवाने को आने लगे हैं। प्रारंभिक स्टेज में रोग का पता लग जाने पर किडनी को खराब होने से बचाया जा सकता है, डायलिसिस की जरूरत नहीं पड़ेगी। किडनी रोग के प्रारंभिक लक्षण में पांव और आंखों में सूजन, पेशाब में झाग आना मुख्य है।

 

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