शिक्षा के डिजिटल परिवर्तन में नया अध्याय: मुख्यमंत्री ने समग्र शिक्षा निदेशालय में अत्याधुनिक शैक्षणिक ढांचे का लोकार्पण किया – भारत केसरी टीवी

शिक्षा के डिजिटल परिवर्तन में नया अध्याय: मुख्यमंत्री ने समग्र शिक्षा निदेशालय में अत्याधुनिक शैक्षणिक ढांचे का लोकार्पण किया

[MADAN SHARMA]

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मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविंदर सिंह सुक्खू ने आज समग्र शिक्षा निदेशालय में नव-स्थापित अत्याधुनिक सुविधाओं का लोकार्पण किया। इनमें विद्या समीक्षा केंद्र (VSK), शिक्षा दीर्घा, कार्यक्रम प्रबंधन स्टूडियो सम्मेलन क्षेत्र, नया सम्मेलन कक्ष तथा आधुनिक केंद्रीय ताप व्यवस्था शामिल हैं।

 

इस अवसर पर उपस्थित जनसमूह को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि ये उन्नत सुविधाएं न केवल प्रशासनिक और शैक्षणिक दक्षता को बढ़ाएंगी, बल्कि हिमाचल प्रदेश में डिजिटल शिक्षा शासन के एक नए युग की शुरुआत करेंगी। उन्होंने कहा कि यह पहल वर्तमान राज्य सरकार की दूरदर्शी सोच को दर्शाती है, जिसमें शिक्षा को समग्र विकास के केंद्र में रखा गया है।

 

मुख्यमंत्री ने कहा कि बीते तीन वर्षों में राज्य सरकार ने शिक्षा क्षेत्र को सर्वोच्च प्राथमिकता दी है और कई निर्णायक सुधार लागू किए हैं, जिनके सकारात्मक परिणाम अब स्पष्ट रूप से दिखाई दे रहे हैं। उन्होंने बताया कि शिक्षा गुणवत्ता मूल्यांकन में हिमाचल प्रदेश ने राष्ट्रीय स्तर पर 21वें स्थान से 5वें स्थान तक की उल्लेखनीय छलांग लगाई है। यह उपलब्धि शिक्षकों, विद्यार्थियों और अभिभावकों के सामूहिक प्रयासों तथा सरकार की मजबूत प्रतिबद्धता का परिणाम है।

 

उन्होंने कहा कि विद्या समीक्षा केंद्र इस परिवर्तनकारी यात्रा का एक महत्वपूर्ण पड़ाव है। हिमाचल प्रदेश एकीकृत डिजिटल प्लेटफॉर्म अपनाने वाले अग्रणी राज्यों में शामिल हो गया है, जो शिक्षण, सीखने के परिणाम, छात्र मूल्यांकन, उपस्थिति, संसाधन प्रबंधन और विद्यालय प्रशासन से जुड़ा रियल-टाइम डेटा उपलब्ध कराता है। ‘अभ्यास हिमाचल’, जियो-स्पेशियल तकनीक आधारित स्मार्ट उपस्थिति प्रणाली और ‘निपुण प्रगति’ जैसी नवाचार पहलें बच्चों के सीखने के स्तर का वैज्ञानिक विश्लेषण सुनिश्चित कर रही हैं। अब सीखने की कमियों की पहचान अनुमान के बजाय डेटा आधारित विश्लेषण से की जा रही है, जिससे शिक्षा प्रणाली अधिक पारदर्शी, जवाबदेह और परिणामोन्मुख बन रही है।

 

मुख्यमंत्री ने आगे कहा कि ‘शिक्षक सहायक’ डिजिटल टूल शिक्षकों के लिए एक सशक्त सहायक मंच बनकर उभरा है, जिससे वे शिक्षण सामग्री, दिशा-निर्देश और शैक्षणिक संसाधनों तक शीघ्र पहुंच बना पा रहे हैं। इससे शिक्षण गुणवत्ता में सुधार हुआ है और शिक्षकों पर प्रशासनिक बोझ भी कम हुआ है।

 

उन्होंने कहा कि सरकार केवल नए संस्थान स्थापित करने पर ही नहीं, बल्कि मौजूदा शिक्षण संस्थानों को सशक्त और आधुनिक बनाने पर भी विशेष ध्यान दे रही है, ताकि दूरदराज और ग्रामीण क्षेत्रों तक समान रूप से गुणवत्तापूर्ण शिक्षा पहुंच सके। राज्य सरकार विद्यार्थियों को 21वीं सदी के कौशल से लैस करने के लिए निरंतर प्रयासरत है।

 

मुख्यमंत्री ने यह भी घोषणा की कि आगामी शैक्षणिक सत्र से प्री-नर्सरी से कक्षा 12वीं तक के छात्रों के लिए स्कूल परिसर में मोबाइल फोन लाने पर पूर्ण प्रतिबंध रहेगा। हालांकि, शिक्षकों को स्टाफ रूम या अपने बैग में मोबाइल रखने की अनुमति होगी। उन्होंने कहा कि स्कूल पाठ्यक्रम को संगीत, संस्कृति और भविष्य उन्मुख विषयों से समृद्ध किया जाएगा।

 

उन्होंने बताया कि शिक्षा विभाग में बड़े पैमाने पर भर्तियां की जाएंगी, जिनमें अस्थायी और नियमित दोनों प्रकार की नियुक्तियां शामिल होंगी। अस्थायी नियुक्तियां पांच वर्ष की अवधि के लिए होंगी, जबकि नियमित भर्तियां बैचवाइज प्रतिस्पर्धात्मक प्रक्रिया के माध्यम से की जाएंगी। मल्टी-यूटिलिटी वर्कर्स की भर्ती भी की जाएगी। अगले शैक्षणिक सत्र से प्राथमिक स्तर पर खेल प्रतियोगिताओं का आयोजन किया जाएगा। मुख्यमंत्री ने विश्वास व्यक्त किया कि वर्ष 2032 तक राज्य की प्रत्येक विधानसभा क्षेत्र में देश के श्रेष्ठ विद्यालयों में से कुछ विद्यालय होंगे और हिमाचल प्रदेश शिक्षा के क्षेत्र में देश का नंबर वन राज्य बनेगा। उन्होंने शिक्षा विभाग में नई स्थानांतरण नीति लागू करने और राजीव गांधी डे बोर्डिंग स्कूलों व सीबीएसई पाठ्यक्रम वाले विद्यालयों के लिए विशेष कैडर सृजित करने पर भी विचार किए जाने की बात कही।

 

इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने ‘संकल्प वर्कबुक’ का भी विमोचन किया।

 

शिक्षा मंत्री रोहित ठाकुर ने कहा कि राज्य ने शिक्षा के क्षेत्र में अभूतपूर्व प्रगति की है और साक्षरता दर 99.30 प्रतिशत तक पहुंच गई है। उन्होंने बताया कि क्लस्टर स्कूल प्रणाली के माध्यम से संसाधनों का बेहतर उपयोग सुनिश्चित किया जा रहा है, जिससे पुस्तकालय, प्रयोगशालाएं, खेल सुविधाएं और शिक्षकों की विशेषज्ञता साझा की जा रही है। इससे गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और सीखने के अनुभव में सुधार हुआ है।

 

उन्होंने कहा कि राज्य ने परफॉर्मेंस ग्रेडिंग इंडेक्स (PGI) में भी उल्लेखनीय सुधार किया है। मेधावी विद्यार्थियों के लिए जेईई और नीट की निःशुल्क कोचिंग सरकार की एक ऐतिहासिक पहल है, जिससे आर्थिक बाधाएं बच्चों के भविष्य में आड़े नहीं आ रहीं।

 

समग्र शिक्षा के परियोजना निदेशक राजेश शर्मा ने विभाग की उपलब्धियों पर प्रकाश डालते हुए कहा कि राज्य ने विभिन्न राष्ट्रीय सर्वेक्षणों में उत्कृष्ट प्रदर्शन किया है। शिक्षकों को आईआईटी और आईआईएम में प्रशिक्षण दिया जा रहा है तथा आधुनिक तकनीकों के उपयोग से शिक्षण दक्षताओं को और सुदृढ़ किया जा रहा है।

 

भविष्य उन्मुख शिक्षा प्रणाली के निर्माण के लिए राज्य सरकार ने हिमाचल प्रदेश फ्यूचर्स प्रोग्राम के तहत यूनेस्को के साथ एक महत्वपूर्ण समझौता ज्ञापन (MoU) भी किया है, जिसका उद्देश्य शिक्षा में नवाचार, सतत विकास लक्ष्यों को आगे बढ़ाना और वैश्विक सहयोग को मजबूत करना है।

 

इस अवसर पर विधायक सुरेश कुमार और सुदर्शन बाबलू, शिक्षा निदेशक आशीष कोहली, उच्च शिक्षा निदेशक डॉ. अमरजीत सिंह तथा अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।#DigitalEducation #SamagraShiksha #VidyaSamikshaKendra #CM_Sukhu #HimachalEducation #EducationReforms #21stCenturySkills #TransparentGovernance #FutureReadySchools

 

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