पंजाब के प्रभुत्व पर फिर उठे सवाल, खैबर पख्तूनख्वा और सिंध में भूख का संकट – भारत केसरी टीवी

पंजाब के प्रभुत्व पर फिर उठे सवाल, खैबर पख्तूनख्वा और सिंध में भूख का संकट

[MADAN SHARMA]

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इस्लामाबाद, भारत केसरी टीवी
पाकिस्तान में सेना और राजनीति तक में लंबे समय से जारी पंजाब सूबे के प्रभुत्व को लेकर विवाद अब सीधे “रोटी” के मुद्दे तक जा पहुंचा है। खैबर पख्तूनख्वा (KP) और सिंध प्रांत इस समय गंभीर आटे के संकट से जूझ रहे हैं, और दोनों ही प्रदेशों ने इसके लिए खुले तौर पर पंजाब को जिम्मेदार ठहराया है।

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आरोप है कि पंजाब सरकार ने गेहूं का बड़ा हिस्सा अपने पास रोक लिया है, जिससे अन्य प्रांतों में सप्लाई चेन ठप हो गई है। परिणामस्वरूप, आटे की कीमतें तेजी से बढ़ रही हैं और गरीब वर्ग के लोगों के सामने दो वक्त की रोटी का संकट गहराता जा रहा है।

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गुरुवार को खैबर पख्तूनख्वा सरकार ने इस मामले पर कड़ी आपत्ति जताते हुए कहा कि पंजाब की रोक के कारण प्रदेश में खाद्य सुरक्षा खतरे में पड़ गई है। सरकार ने एक औपचारिक पत्र भेजकर पंजाब से गेहूं की अंतर-राज्यीय आवाजाही पर लगे प्रतिबंध को तुरंत हटाने की मांग की है।

पत्र में लिखा गया है — “हमारे राज्य को रोजाना करीब 14,500 टन गेहूं की जरूरत होती है, जबकि पंजाब की ओर से सिर्फ 2,000 टन की आपूर्ति की जा रही है, जो जरूरत से सात गुना कम है। यह पाकिस्तान के संविधान की उस भावना के खिलाफ है जो राज्यों के बीच वस्तुओं की मुक्त आवाजाही की गारंटी देता है।”

केपी सरकार ने चेतावनी दी है कि यदि आपूर्ति में सुधार नहीं हुआ तो राज्य में खाद्य संकट गहराने और बाजार में अराजकता फैलने की पूरी संभावना है।

वहीं सिंध प्रांत की पीपीपी सरकार ने भी पंजाब प्रशासन पर निशाना साधते हुए कहा कि उसने गेहूं के बीज की आपूर्ति रोक दी है। इससे आने वाले फसल चक्र में सिंध में उत्पादन पर गंभीर असर पड़ सकता है।

विशेषज्ञों का मानना है कि जब पाकिस्तान पहले से ही क्षेत्रीय असंतोष और राजनीतिक अस्थिरता से जूझ रहा है, ऐसे में यह “गेहूं विवाद” प्रांतों के बीच विश्वास को और कमजोर कर सकता है। पहले से ही बलूचिस्तान में पंजाबी वर्चस्व के खिलाफ विद्रोह और टारगेट किलिंग जैसी घटनाएं सामने आती रही हैं — और अब “रोटी का संघर्ष” इस विभाजन को और गहरा कर सकता है।

 

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