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हिमाचल में पेट्रोल-डीजल पर सेस लगाने की तैयारी, सरकार जल्द लेगी फैसला

[ मदन शर्मा]

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प्रदेश में पेट्रोल और डीजल पर सेस लगाने की तैयारी, राशि तय करने में जुटा विभाग

सरकार की ओर से विधानसभा की बजट सत्र में संशोधित विधेयक पास कर अनाथ और विधवाओं के कल्याण के लिए अधिकतम 5 रुपये सेस लगाने का फैसला लिया गया था।

हिमाचल प्रदेश में पेट्रोल और डीजल पर सेस लगाने की तैयारी शुरू हो गई है। सरकार की ओर से विधानसभा की बजट सत्र में संशोधित विधेयक पास कर अनाथ और विधवाओं के कल्याण के लिए अधिकतम 5 रुपये सेस लगाने का फैसला लिया गया था। गुरुवार को राज्य आबकारी एवं कर विभाग की ओर से अधिसूचना जारी कर लोक भवन से इस संशोधन विधेयक को मिली मंजूरी से विभाग के जिला अधिकारियों को अवगत कराया गया है। हालांकि, अभी यह तय नहीं हुआ है कि पेट्रोल और डीजल पर सेस कितना लगेगा। सेस कब से लगेगा, इसका फैसला भी नहीं हुआ है। आबकारी आयुक्त यूनुस ने बताया कि सरकार के निर्देशों के अनुसार ही इस बाबत आगामी फैसला लिया जाएगा।

 

सरकार तय करेगी कि कितना सेस लगाना है

विधानसभा के बजट सत्र के दौरान यह बिल पास हुआ था। विपक्ष के विरोध के बाद मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने स्पष्ट किया था कि केवल सेस लगाने के अधिकार के लिए बिल लाए हैं। सरकार तय करेगी कि कितना सेस लगाना है। उन्होंने कहा था कि सेस न लगाने का फैसला भी ले सकते हैं। लोक भवन से मंजूरी के बाद इसके बारे में विचार होगा। विधेयक को राज्यपाल की मंजूरी मिलने के बाद अब आने वाले समय में तय हो जाएगा कि पेट्रोल और डीजल पर कितना सेस लगता है।

 

मार्च में मूल्य परिवर्धित कर संशोधन अधिनियम-2026 को पारित किया गया था

मार्च में विधानसभा के बजट सत्र के दौरान हिमाचल प्रदेश मूल्य परिवर्धित कर संशोधन अधिनियम-2026 को पारित किया गया था। इसमें जरूरतमंद वर्गों, विशेषकर विधवाओं एवं अनाथ बच्चों के कल्याण के लिए विशेष प्रावधान किए गए हैं। एक्ट की धारा 6 क में संशोधन किया गया है कि राज्य में प्रथम विक्रय के बिंदु पर पेट्रोल और हाई स्पीड डीजल पर प्रत्येक व्यापारी से अनाथ और विधवा उपकर अधिकतम पांच रुपये तक प्रति लीटर लिया जाएगा। सरकार की ओर से अधिसूचना के माध्यम से निर्धारित की गई जाने वाली दरों पर सेस संग्रहित किया जाएगा। इसके माध्यम से जुटाए जाने वाली धनराशि अनाथ और विधवा कल्याण निधि में जमा की जाएगी। विधेयक के उद्देश्यों और कारणों में बताया गया कि राज्य सरकार ये सुनिश्चित करेगी कि इस फैसले से उपभोक्ताओं पर कोई अनावश्यक बोझ न पड़े।

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