मुख्यमंत्री ने मजबूती से उठाया चंडीगढ़ पर हिमाचल के 7.19% हक का मुद्दा – भारत केसरी टीवी

मुख्यमंत्री ने मजबूती से उठाया चंडीगढ़ पर हिमाचल के 7.19% हक का मुद्दा

शिमला,मदन शर्मा 17 नवंबर

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हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविंदर सिंह सुक्खू ने उत्तरी क्षेत्रीय परिषद (NZCC) की 32वीं बैठक में राज्य के हितों से जुड़े कई बड़े मुद्दों को जोरदार तरीके से उठाया। यह बैठक हरियाणा के फरीदाबाद में केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह की अध्यक्षता में आयोजित हुई।

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चंडीगढ़ पर हिमाचल का 7.19% हिस्सा — सुक्खू का जोर

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मुख्यमंत्री ने पंजाब पुनर्गठन अधिनियम, 1966 के तहत चंडीगढ़ की भूमि व संपत्तियों में हिमाचल प्रदेश के 7.19 प्रतिशत वैधानिक हिस्से को तुरंत जारी करने की मांग की। उन्होंने 2011 के सुप्रीम कोर्ट के निर्णय का भी हवाला दिया, जिसमें हिमाचल को संयुक्त पंजाब की संपत्तियों में 7.19 प्रतिशत हिस्सेदारी का हकदार बताया गया है।
उन्होंने कहा कि यही आधार बीबीएमबी द्वारा उत्पन्न बिजली में हिस्सेदारी तय करने के लिए भी मान्य है।

BBMB में लंबित बकाया और स्थायी सदस्य की मांग

मुख्यमंत्री ने भाखड़ा ब्यास प्रबंधन बोर्ड (BBMB) से सुप्रीम कोर्ट के निर्णय अनुसार लंबित बकाया जारी करने और हिमाचल से एक स्थायी सदस्य नियुक्त करने की मांग रखी।
उन्होंने केंद्र से सेंट्रली ऑपरेटेड परियोजनाओं में हिमाचल को 12% मुफ्त बिजली रॉयल्टी लागू करने तथा जिन परियोजनाओं की लागत वसूल हो चुकी है उनमें यह रॉयल्टी 50% करने का आग्रह किया।

पुरानी हाइड्रो परियोजनाएं राज्य को सौंपने की मांग

उन्होंने कहा कि हिमाचल में स्थित वे सभी हाइड्रो प्रोजेक्ट जिनकी अवधि 40 वर्ष पूरी कर चुकी है, उन्हें राज्य सरकार को सौंपा जाना चाहिए।

किशाऊ और रेणुका बांध परियोजनाओं के लिए पूर्ण केंद्रीय फंडिंग

किशाऊ व रेणुका बांध की निर्माणाधीन परियोजनाओं के पावर कम्पोनेंट के लिए सौ प्रतिशत केंद्रीय फंडिंग और पूरा होने पर हिमाचल व उत्तराखंड के बीच 50-50 प्रतिशत बिजली साझेदारी की मांग रखी।
आपदा राहत नियमों की समीक्षा और हिमालयी राज्यों के लिए संयुक्त विकास योजना की आवश्यकता

सुक्खू ने कहा कि जलवायु परिवर्तन के कारण पहाड़ी राज्यों में लगातार प्राकृतिक आपदाएँ बढ़ रही हैं। ऐसे में आपदा राहत नियमों की व्यापक समीक्षा, प्री व पोस्ट-डिजास्टर मानकों में संशोधन और उत्तरी क्षेत्र के लिए एकीकृत व स्थायी विकास ढांचा बेहद आवश्यक है।
हवाई संपर्क बढ़ाने का आग्रह

मुख्यमंत्री ने हिमाचल की रणनीतिक स्थिति और पर्यटन संभावनाओं को रेखांकित करते हुए कहा कि:

कांगड़ा एयरपोर्ट को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर विस्तार देने के लिए
केंद्र भूमि अधिग्रहण लागत वहन करे

राज्य में छोटे हवाई अड्डों व हेलीपोर्ट का अलग मास्टर प्लान बनाया जाए।

ऊँचाई वाले क्षेत्रों में पर्यटन और अनुसंधान को बढ़ावा

उन्होंने उच्च हिमालयी क्षेत्रों में

हाई-एल्टीट्यूड रिसर्च सेंटर

आइस हॉकी स्टेडियम

एडवेंचर स्पोर्ट्स सेंटर
स्थापित करने का प्रस्ताव रखा।

साथ ही स्पीति में नेशनल बौद्ध संस्थान की स्थापना और शिपकी-ला से कैलाश मानसरोवर यात्रा शुरू करने की मांग दोहराई।

नशा विरोधी अभियान पर सख्त रुख

सुक्खू ने बताया कि हिमाचल में नशा तस्करी के खिलाफ बहुआयामी अभियान चल रहा है।
राज्य सरकार ने चिट्टा जैसे खतरनाक पदार्थों के उन्मूलन के लिए तीन महीने का व्यापक जागरूकता अभियान शुरू किया है।
उन्होंने POCSO एक्ट के सख्त पालन और बच्चों के खिलाफ अपराधों पर जीरो टॉलरेंस नीति दोहराई।
लद्दाख सीमा विवाद और पर्यावरण संबंधी मुद्दे

मुख्यमंत्री ने सारचू और शिंकुला क्षेत्रों में हिमाचल-लद्दाख सीमा विवाद के शीघ्र समाधान की मांग उठाई।
साथ ही पर्यावरण मंत्रालय के शिमला उप-कार्यालय को इंटीग्रेटेड रीजनल ऑफिस में अपग्रेड करने तथा वन मामलों की स्वीकृति समय पर जारी करने का अनुरोध किया।

उन्होंने आपदा प्रभावित परिवारों को एक बीघा तक वन भूमि पर घर बनाने की अनुमति देने की भी मांग की।

आपदा राहत राशि व राजस्व घाटे की भरपाई

सुक्खू ने बताया कि राज्य अब भी

PDNA की ₹10,000 करोड़

और प्रधानमंत्री द्वारा घोषित ₹1,500 करोड़ राहत राशि
की प्रतीक्षा कर रहा है।
उन्होंने इनकी जल्द रिहाई की अपील की।

राज्य के ₹9,478 करोड़ के राजस्व घाटे की भरपाई के लिए विशेष टास्क फोर्स गठित करने की मांग भी की।

पर्यावरण संरक्षण में हिमाचल की महत्त्वपूर्ण भूमिका

मुख्यमंत्री ने कहा कि हिमाचल और हिमालय उत्तरी भारत के पर्यावरण संरक्षण तथा स्वच्छ जल उपलब्धता के लिए अत्यंत आवश्यक हैं। राज्य सरकार हिमाचल को ‘ग्रीन स्टेट’ बनाने की दिशा में कार्य कर रही है।

बैठक में विभिन्न राज्यों के मुख्यमंत्री, उपराज्यपाल और वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।

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