टूरिज्म, फूड प्रोसेसिंग और आईटी सेक्टर में निवेश का आह्वान, उद्योगपतियों को हरसंभव सहयोग का भरोसा: सीएम सुक्खू – भारत केसरी टीवी

टूरिज्म, फूड प्रोसेसिंग और आईटी सेक्टर में निवेश का आह्वान, उद्योगपतियों को हरसंभव सहयोग का भरोसा: सीएम सुक्खू

[MADAN SHARMA]

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सीएम ने पर्यटन, फूड प्रोसेसिंग और आईटी सेक्टर में निवेश का दिया न्योता, उद्योगपतियों को हरसंभव सहयोग का आश्वासन

शिमला में गुरुवार देर शाम आयोजित सीआईआई हिमाचल प्रदेश की वार्षिक सम्मेलन की अध्यक्षता करते हुए मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविंदर सिंह सुक्खू ने उद्योग जगत के नेताओं को पर्यटन, फूड प्रोसेसिंग और सूचना प्रौद्योगिकी (आईटी) क्षेत्रों में निवेश के लिए आमंत्रित किया। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार प्रदेश की भौगोलिक और पर्यावरणीय परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए हरित उद्योगों को बढ़ावा दे रही है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार उद्योगों को हरसंभव सहयोग और आवश्यक सुविधाएं प्रदान करेगी तथा पर्यटन और आतिथ्य क्षेत्र में निवेश को विशेष रूप से प्रोत्साहित किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि आने वाले समय में पर्यटन क्षेत्र में 3,000 करोड़ रुपये निवेश करने की योजना है।

उन्होंने कहा कि जिला मुख्यालयों और प्रमुख पर्यटन स्थलों पर हेलीपोर्ट बनाए जा रहे हैं और हेली-टैक्सी सेवाएं शुरू हो चुकी हैं, जिन्हें आगे और विस्तार दिया जाएगा। इसके अलावा कांगड़ा हवाई अड्डे के विस्तार का कार्य भी प्रगति पर है।

मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि उद्योगपतियों के साथ किसी भी प्रकार का उत्पीड़न बर्दाश्त नहीं किया जाएगा और वे अपनी समस्याएं सीधे उनके संज्ञान में ला सकते हैं। उन्होंने बताया कि ऊना जिले के हरोली में बल्क ड्रग पार्क विकसित किया जा रहा है, जहां निवेशकों को प्रोत्साहन दिए जा रहे हैं।

उन्होंने कहा कि सिंगल विंडो सिस्टम को और प्रभावी बनाया जा रहा है ताकि उद्योगों को सभी स्वीकृतियां एक ही स्थान पर मिल सकें। साथ ही उद्योग विभाग को निवेशकों की सुविधा के लिए सक्रिय भूमिका निभाने के निर्देश दिए गए हैं।

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश के अधिकांश उद्योग पड़ोसी राज्यों की सीमाओं के पास स्थित हैं, इसलिए इन क्षेत्रों में बेहतर आधारभूत ढांचे के विकास पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। बद्दी में शिमला की तर्ज पर अंडरग्राउंड यूटिलिटी डक्ट विकसित किए जाएंगे और औद्योगिक क्षेत्रों में बिजली लोड की समस्याओं को दूर करने के प्रयास किए जा रहे हैं।

उन्होंने बताया कि बद्दी तक रेलवे कनेक्टिविटी बढ़ाने के लिए राज्य सरकार भूमि अधिग्रहण सहित 50 प्रतिशत खर्च वहन कर रही है, जिससे उद्योगों को लाभ मिलेगा।

मुख्यमंत्री ने कहा कि हिमाचल प्रदेश को “उत्तर भारत के फेफड़े” और “जल भंडार” के रूप में जाना जाता है, लेकिन राज्य को उसका उचित हिस्सा नहीं मिला है। उन्होंने कहा कि पहले अनुच्छेद 275(1) के तहत मिलने वाली राजस्व घाटा अनुदान (आरडीजी) बंद कर दी गई है, जिसे बहाल करने के लिए सरकार प्रयासरत है।

उद्योग मंत्री हर्षवर्धन चौहान ने कहा कि मुख्यमंत्री संसाधन जुटाने पर विशेष जोर देने वाले प्रदेश के पहले मुख्यमंत्री हैं। उन्होंने बताया कि प्रदेश ने प्राकृतिक आपदाओं और 2024 के राजनीतिक संकट का मजबूती से सामना किया है और प्रभावित लोगों को राज्य सरकार ने अपने संसाधनों से राहत प्रदान की है।

उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री की घोषणा के बावजूद हिमाचल प्रदेश को आपदा प्रभावित परिवारों के लिए 1,500 करोड़ रुपये की वित्तीय सहायता का अभी भी इंतजार है।

उन्होंने कहा कि हिमाचल प्रदेश उद्योगों के लिए अनुकूल वातावरण प्रदान करता है, जहां बिजली की कमी नहीं है और कानून व्यवस्था मजबूत है। उन्होंने “वोकल फॉर लोकल” पर जोर देते हुए कहा कि स्थानीय उत्पादों को अपनाने से अर्थव्यवस्था मजबूत होगी, रोजगार बढ़ेगा और आत्मनिर्भर हिमाचल का निर्माण होगा।

इस अवसर पर उद्योग निदेशक डॉ. यूनुस, सीआईआई उत्तरी क्षेत्र की अध्यक्ष अंजली सिंह, दीपान गर्ग, पुनीत कौरा, संजय सूरी सहित अन्य गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहे।

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