टांडा मेडिकल कालेज की लाचार व्यवस्थाओं पर सुक्खू सरकार कटघरे में : राकेश शर्मा  – भारत केसरी टीवी

टांडा मेडिकल कालेज की लाचार व्यवस्थाओं पर सुक्खू सरकार कटघरे में : राकेश शर्मा 

[MADAN SHARMA]

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*एमआरआई, सीटी स्केन, एक्सरे व अल्ट्रासाउंड बाहर निजी संस्थानों क्यों हो रहे ?*

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*धर्मशाला, 21 सितंबर 2026:* हिमाचल प्रदेश के डॉ. राजेंद्र प्रसाद राजकीय मेडिकल कॉलेज टांडा में स्वास्थ्य सेवाओं के चरमराने और विभिन्न व्यवस्थापकीय कमियों को लेकर प्रदेश भाजपा प्रवक्ता राकेश शर्मा ने प्रदेश की सुक्खू सरकार पर तीखा हमला बोला है। सोमवार को धर्मशाला से जारी एक प्रेस विज्ञप्ति में उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस सरकार की नालायकियों के कारण टांडा मेडिकल कालेज आत्महत्या करने का अडडा बन चुका है। आखिर मरीज क्यों टांडा मेडिकल कालेज की उपरी मंजिलों से कूद कर आत्महत्या कर रहे हैं, इस पर प्रश्नचिंह खड़ा हो गया है तथा कांग्रेस सरकार व कालेज प्रशासन की कारगुजारी कटघरे में खड़ी हो गई है। राकेश शर्मा ने कहा कि सितंबर 2026 में टांडा मेडिकल कॉलेज की चैथी मंजिल की खिड़की से कूदकर एक 28 वर्षीय महिला मरीज की मौत हो गई, जिससे अस्पताल की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।

मरीजों को ऑपरेशन और एक्स-रे जैसी जरूरी जांच के लिए महीनों से लेकर एक साल तक चक्कर काटने पड़ रहे हैं। इसके अलावा पैथोलॉजी विभाग में टेस्ट आज होने पर रिपोर्ट महीनों बाद मिलने की शिकायतें भी सामने आई हैं। जुलाई 2026 में ओपीडी पर्ची काउंटर पर भीड़ और लंबी लाइनों के बीच एक महिला और कर्मचारी के बीच तीखी बहस और हाथापाई का वीडियो सोशल मीडिया पर काफी वायरल हुआ था। जून 2026 में एक निरीक्षण के दौरान अस्पताल के कार्डियोलॉजी विभाग से अनधिकृत स्थानों पर रखे गए लगभग 1 करोड़ रुपये के स्टेंट और बैलून कैथेटर जब्त किए गए, जिसकी जांच पर भी बवाल उठ रहे हैं। भाजप प्रवक्ता राकेश शर्मा ने कहा कि पहले जो मेडिकल कॉलेज उत्तरी भारत में नंबर एक पर था, वहां अब यहां बदहाली देखी जा रही है। उन्होंने कहा टांडा मेडिकल कॉलेज में लगभग 14 हजार रुपये का स्टेंट मरीजों को 40 हजार रुपये में बेचा गया। बताया जा रहा टेंडर में अयोग्य घोषित की गईं फर्मों को सप्लाई के ठेके पर दी गई। इस पर भी सरकार सच को छूपा रही है।1 कालेज अस्पताल के हालात तो यह है कि सुई, सिरिंज, ग्लव्स सहित अन्य आवश्यक सामग्री की आपूर्ति प्रभावित होने और मरीजों को दवाइयां बाहर से खरीदने को मजबूर होना पड़ रहा है। डाक्टरों द्वारा मरीजों को एमआरआई, सीटी स्केन, एक्सरे व अल्ट्रासाउंड बाहर निजी संस्थानों में करवाने के कहा जा रहा है।

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