किसान सभा, सोलन द्वारा डीसी कार्यालय के बाहर प्रदर्शन; मुख्यमंत्री एवं प्रधानमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपा – भारत केसरी टीवी

किसान सभा, सोलन द्वारा डीसी कार्यालय के बाहर प्रदर्शन; मुख्यमंत्री एवं प्रधानमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपा

[MADAN SHARMA]

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दिनांक: 18 सितंबर 2026

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स्थान: सोलन, हिमाचल प्रदेश

आज, शुक्रवार 18 सितंबर 2026 को हिमाचल किसान सभा, सोलन की ओर से जिला उपायुक्त कार्यालय, सोलन के बाहर टमाटर उत्पादक किसानों सहित प्रदेश के किसानों की न्यायपूर्ण मांगों को लेकर एक शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन किया गया। प्रदर्शन के उपरांत हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री तथा भारत के प्रधानमंत्री के नाम एक विस्तृत ज्ञापन जिला उपायुक्त, सोलन को सौंपा गया।

कार्यक्रम का विवरण

कार्यक्रम दोपहर 11 बजे आरंभ हुआ, जिसमें किसान सभा के स्थानीय नेताओं तथा टमाटर एवं अन्य फसल उत्पादक किसानों ने भाग लिया। प्रदर्शन के दौरान किसानों ने अपनी मांगों के समर्थन में नारेबाजी की और सरकार से त्वरित हस्तक्षेप की अपील की।

ज्ञापन में प्रमुख मांगें

किसान सभा द्वारा सौंपे गए ज्ञापन में सोलन जिला के टमाटर उत्पादक किसानों तथा प्रदेश के फल, सब्जी, अनाज एवं अन्य कृषि उत्पादक किसानों की गंभीर समस्याओं और न्यायोचित मांगें शामिल हैं:

टमाटर उत्पादक किसानों की विशिष्ट मांगें

लाभकारी न्यूनतम मूल्य: टमाटर का न्यूनतम खरीद मूल्य वास्तविक लागत मूल्य से कम-से-कम 50 प्रतिशत अधिक निर्धारित किया जाए, जिसमें बीज, खाद, दवाइयां, सिंचाई, मजदूरी, पैकिंग, परिवहन तथा अन्य सभी व्यावहारिक खर्च सम्मिलित हों।

सरकारी खरीद व्यवस्था: जब बाजार में टमाटर का भाव लागत मूल्य से नीचे चला जाए, तब राज्य सरकार अथवा अधिकृत सरकारी एजेंसियों द्वारा किसानों से घोषित न्यूनतम मूल्य पर खरीद की जाए।

टमाटर प्रसंस्करण संयंत्र: सोलन जिले में आधुनिक Tomato Processing Plant स्थापित किया जाए, जहां टमाटर प्यूरी, सॉस, पेस्ट, जूस, डिहाइड्रेटेड टमाटर तथा अन्य मूल्यवर्धित उत्पादों का निर्माण हो सके।

कोल्ड चेन एवं भंडारण: टमाटर तथा अन्य शीघ्र खराब होने वाली सब्जियों एवं फलों के लिए उत्पादन क्षेत्रों के निकट प्री-कूलिंग सेंटर, कोल्ड स्टोरेज, कोल्ड चेन, ग्रेडिंग, पैकिंग और वैज्ञानिक परिवहन व्यवस्था उपलब्ध कराई जाए।

कृषि विपणन एवं व्यापार नीति संबंधी मांगें

पारदर्शी मंडी प्रणाली: मंडियों में सही तौल, पारदर्शी नीलामी, समयबद्ध भुगतान, किसानों को भाव की वास्तविक जानकारी, उचित ग्रेडिंग तथा अनावश्यक कटौतियों पर रोक सुनिश्चित की जाए।

प्रतिकूल मुक्त व्यापार समझौतों पर रोक: केंद्र सरकार द्वारा ऐसे Free Trade Agreements अथवा आयात नीतियां लागू न की जाएं जिनके कारण विदेशों से सस्ते टमाटर, फल, सब्जियां अथवा अन्य कृषि उत्पाद भारत के बाजार में आकर स्थानीय किसानों के मूल्य को प्रभावित करें।

आयात नियंत्रण नीति: जब घरेलू उत्पादन का मौसम चल रहा हो और किसानों की उपज मंडियों में आ रही हो, तब समान कृषि उत्पादों के अनियंत्रित आयात पर नियंत्रण लगाया जाए। आवश्यकता होने पर उचित आयात शुल्क, मात्रा नियंत्रण अथवा मौसमी आयात प्रतिबंध जैसी नीतियां अपनाई जाएं।

हिमाचल प्रदेश टेनेंसी एवं लैंड रिफॉर्म्स एक्ट, 1972 की धारा 118 का संरक्षण

धारा 118 को पूर्णतः सुरक्षित रखा जाए: हिमाचल प्रदेश टेनेंसी एवं लैंड रिफॉर्म्स एक्ट, 1972 की धारा 118 को उसके मूल किसान-हितैषी स्वरूप में बरकरार रखा जाए। गैर-कृषकों के पक्ष में कृषि भूमि के हस्तांतरण पर लागू सुरक्षा प्रावधानों को कमजोर करने वाला कोई संशोधन, छूट, नियम अथवा नीति लागू न की जाए।

भूमि सट्टेबाजी से सुरक्षा: हिमाचल की सीमित कृषि भूमि को बाहरी पूंजी, रियल एस्टेट सट्टेबाजी तथा गैर-कृषि उद्देश्यों के अनियंत्रित विस्तार से बचाया जाए।

धारा 118 उल्लंघन की जांच: प्रदेश में धारा 118 के कथित उल्लंघनों, बेनामी खरीद, फर्जी दस्तावेजों, अवैध कब्जों तथा नियमों के दुरुपयोग की निष्पक्ष एवं समयबद्ध जांच कराई जाए।

अन्य प्रमुख मांगें

स्थानीय कृषकों को प्राथमिकता: सरकारी कृषि परियोजनाओं, खाद्य प्रसंस्करण इकाइयों, भंडारण केंद्रों, मंडियों तथा विपणन योजनाओं में स्थानीय कृषकों, किसान उत्पादक संगठनों और कृषि सहकारी समितियों को प्राथमिकता दी जाए।

सिंचाई एवं जल-संरक्षण: लघु सिंचाई योजनाएं, वर्षाजल संचयन, ड्रिप और स्प्रिंकलर सिंचाई, सामुदायिक जल स्रोत तथा खेतों तक पानी पहुंचाने की योजनाएं प्रभावी ढंग से लागू की जाएं।

फसल बीमा एवं आपदा राहत: ओलावृष्टि, अतिवृष्टि, सूखा, रोग, कीट प्रकोप, भूस्खलन तथा अन्य प्राकृतिक आपदाओं से फसल को होने वाले नुकसान का शीघ्र सर्वेक्षण कर पर्याप्त मुआवजा दिया जाए।

कृषि लागत में कमी: बीज, खाद, कीटनाशक, कृषि उपकरण, पॉलीहाउस, पैकिंग सामग्री, परिवहन तथा बिजली-पानी की बढ़ती लागत को नियंत्रित करने हेतु किसानों को अनुदान और विशेष सहायता प्रदान की जाए।

किसान संगठनों के साथ संवाद: हिमाचल किसान सभा, सोलन तथा अन्य किसान संगठनों के प्रतिनिधियों के साथ राज्य और जिला स्तर पर बैठक आयोजित कर इन मांगों पर ठोस निर्णय लिया जाए।

नेताओं के संबोधन

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए किसान सभा के ब्लॉक सचिव नीतीश ठाकुर ने कहा कि सोलन जिला टमाटर उत्पादन का प्रमुख क्षेत्र है और हजारों किसान परिवार अपनी आय के लिए टमाटर एवं अन्य नकदी फसलों पर निर्भर हैं। बढ़ती लागतों और उचित बाजार मूल्य न मिलने के कारण किसान लगातार आर्थिक संकट में धकेल रहे हैं।

किसान सभा, सोलन के अध्यक्ष मनोहर मेहता ने अपने संबोधन में जोर देकर कहा कि हिमाचल जैसे पर्वतीय राज्य में सीमित कृषि भूमि, छोटी जोतें, कठिन भौगोलिक परिस्थितियां और कृषि पर निर्भर ग्रामीण आबादी को देखते हुए किसान हितों की रक्षा अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने स्पष्ट किया कि धारा 118 को कमजोर करना छोटे एवं सीमांत किसानों की भूमि पर दबाव बढ़ा सकता है।

उपस्थित किसान नेता

इस अवसर पर किसान सभा के प्रमुख नेताओं सहित स्थानीय किसान नेता उपस्थित रहे, जिनमें शामिल हैं:

केसव

प्यारे लाल वर्मा

विकास ठाकुर

मोहित वर्मा

नवल किशोर

सुमन

चंद्र दत्त शर्मा

अमन ठाकुर

संजीव

अन्य कई स्थानीय किसान एवं समर्थक भी उपस्थित रहे

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