नौणी विश्वविद्यालय के कुलपति ने शोध सहयोग की संभावनाएं तलाशने के लिए किया लवली प्रोफेशनल यूनिवर्सिटी का दौरा – भारत केसरी टीवी

नौणी विश्वविद्यालय के कुलपति ने शोध सहयोग की संभावनाएं तलाशने के लिए किया लवली प्रोफेशनल यूनिवर्सिटी का दौरा

मदन शर्मा

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नौणी/फगवाड़ा: डॉ. यशवंत सिंह सिंह परमार औद्यानिकी एवं वानिकी विश्वविद्यालय, नौणी के कुलपति प्रो. हरमिंदर सिंह बावेजा ने दोनों संस्थानों के बीच शैक्षणिक एवं अनुसंधान सहयोग की संभावनाएं तलाशने के उद्देश्य से लवली प्रोफेशनल यूनिवर्सिटी (एलपीयू), फगवाड़ा का दौरा किया। इस दौरान उनके साथ डॉ. परमिंदर कौर बावेजा, प्रधान वैज्ञानिक एवं विभागाध्यक्ष, कृषि मौसम विज्ञान एवं पर्यावरण विज्ञान विभाग भी मौजूद रहीं।

 

 

 

एलपीयू के अनुसंधान एवं विकास प्रकोष्ठ के डीन डॉ. अतुल ठाकुर और उनकी टीम ने विश्वविद्यालय के टीम का स्वागत किया। दौरे के दौरान प्रतिनिधिमंडल ने विश्वविद्यालय की अत्याधुनिक अनुसंधान प्रयोगशालाओं और केंद्रीय उपकरण सुविधा (सीआईएफ) का अवलोकन किया। उन्होंने वहां के शिक्षकों एवं शोधकर्ताओं के साथ भी संवाद किया और चल रही अनुसंधान गतिविधियों, उपलब्ध बुनियादी सुविधाओं तथा वैज्ञानिक सहयोग की संभावनाओं के बारे में जानकारी प्राप्त की।

 

इस अवसर पर संबोधित करते हुए प्रो. बावेजा ने उच्च शिक्षा में अनुसंधान, नवाचार, बहुविषयक सहयोग और सतत विकास के महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने एलपीयू के सुदृढ़ अनुसंधान तंत्र और आधुनिक सुविधाओं की सराहना करते हुए युवा शोधकर्ताओं से ऐसे प्रभावशाली एवं समाज के लिए उपयोगी अनुसंधान कार्य करने का आह्वान किया, जो वास्तविक चुनौतियों का समाधान करने के साथ-साथ सतत विकास में भी योगदान दें।

 

 

 

इस दौरान स्कूल ऑफ एग्रीकल्चर के शिक्षकों के साथ एक विशेष संवाद सत्र भी आयोजित किया गया। इसमें कृषि अनुसंधान के उभरते रुझानों, नवीन तकनीकों, शैक्षणिक साझेदारी और संयुक्त अनुसंधान की संभावनाओं पर चर्चा की गई। इस संवाद ने दोनों संस्थानों की विशेषज्ञता को साझा कर कृषक समुदाय और समाज के हित में उपयोग करने के नए अवसर तलाशने का मंच प्रदान किया।

 

 

 

यह दौरा एलपीयू और नौणी विश्वविद्यालय के बीच संस्थागत संबंधों को मजबूत करने तथा भविष्य में सहयोग के नए अवसर तलाशने की दिशा में महत्वपूर्ण रहा। दोनों संस्थानों के बीच संयुक्त अनुसंधान परियोजनाओं, संकाय आदान-प्रदान, ज्ञान एवं विशेषज्ञता साझा करने और नवाचार आधारित शैक्षणिक गतिविधियों की संभावनाओं पर विचार किया गया। इससे कृषि, औद्यानिकी, वानिकी और संबद्ध क्षेत्रों में अनुसंधान एवं उच्च शिक्षा को नई दिशा मिलने की उम्मीद है।

 

 

 

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