नौणी विश्वविद्यालय में विश्व खाद्य दिवस मनाया, सतत खाद्य प्रणालियों के लिए नवाचार पर दिया जोर – भारत केसरी टीवी

नौणी विश्वविद्यालय में विश्व खाद्य दिवस मनाया, सतत खाद्य प्रणालियों के लिए नवाचार पर दिया जोर

मदन शर्मा

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नौणी: डॉ. यशवंत सिंह परमार औद्यानिकी एवं वानिकी विश्वविद्यालय, नौणी के खाद्य विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग तथा फूड टेक क्लब द्वारा शुक्रवार को विश्वविद्यालय परिसर में विश्व खाद्य दिवस-2026 मनाया गया। इस वर्ष की थीम ‘आज नवाचार करें, कल का पोषण करें’ पर आधारित इस कार्यक्रम में स्वस्थ आहार, सतत खाद्य प्रणालियों, खाद्य सुरक्षा और उद्यमिता को बढ़ावा देने में नवाचार की भूमिका पर प्रकाश डाला गया।

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विश्व खाद्य दिवस प्रतिवर्ष 16 अक्टूबर को वर्ष 1945 में संयुक्त राष्ट्र के खाद्य एवं कृषि संगठन (FAO) की स्थापना के उपलक्ष्य में मनाया जाता है। इस दिवस का उद्देश्य विश्वभर में भुखमरी की चुनौती के प्रति जागरूकता बढ़ाना तथा सभी लोगों को सुरक्षित, पौष्टिक और पर्याप्त भोजन उपलब्ध करवाने के लिए सामूहिक प्रयासों को प्रोत्साहित करना है। इस वर्ष की थीम अधिक टिकाऊ, समावेशी और चुनौतियों का सामना करने में सक्षम कृषि-खाद्य प्रणालियों के विकास में नवाचार के महत्व को रेखांकित करती है।

 

कार्यक्रम में विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. एच.एस. बवेजा ने मुख्य अतिथि के रूप में शिरकत की, जबकि खाद्य उद्योग के वैज्ञानिक सलाहकार एवं परामर्शदाता अजय शर्मा ने मुख्य व्याख्यान दिया। इस अवसर पर अपने संबोधन में प्रो. बवेजा ने अच्छे स्वास्थ्य को बनाए रखने तथा जीवनशैली से जुड़ी बीमारियों की रोकथाम के लिए स्वस्थ खानपान और संतुलित पोषण के महत्व पर जोर दिया। उन्होंने विद्यार्थियों और युवा पेशेवरों को खाद्य क्षेत्र में उद्यमिता अपनाने के लिए प्रोत्साहित करते हुए कहा कि खाद्य प्रसंस्करण और इससे जुड़े उद्योगों में नवाचार आधारित व्यवसाय स्थापित करने तथा रोजगार सृजन की अपार संभावनाएं हैं। उन्होंने कहा कि यह क्षेत्र युवाओं के लिए नए उद्यमों के विकास और आजीविका के अवसर सृजित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।

 

उन्होंने उपभोक्ताओं के लिए सुरक्षित, पर्यावरण के अनुकूल और खाद्य उत्पादों के पोषण संबंधी गुणों को संरक्षित रखने में सक्षम नवीन पैकेजिंग समाधान विकसित करने की आवश्यकता पर भी बल दिया। उन्होंने युवा नवाचारियों से वैज्ञानिक ज्ञान, आधुनिक तकनीक और उद्यमशीलता कौशल का समन्वय कर ऐसे समाधान विकसित करने का आह्वान किया, जो उपभोक्ताओं और पर्यावरण दोनों के लिए लाभकारी हों।

 

मुख्य व्याख्यान में अजय शर्मा ने खाद्य उद्योग में उभरते अवसरों और चुनौतियों पर प्रकाश डालते हुए नवाचार, उत्पाद विकास और टिकाऊ खाद्य प्रसंस्करण पद्धतियों को मजबूत करने की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने विद्यार्थियों को उद्योग की आवश्यकताओं को समझने तथा मूल्य संवर्धित खाद्य उत्पादों के विकास और खाद्य आपूर्ति श्रृंखला को अधिक प्रभावी बनाने के लिए नए विचारों पर काम करने के लिए प्रेरित किया।

 

विभागाध्यक्ष डॉ. राकेश शर्मा ने कृषि उत्पादों के मूल्य संवर्धन, कटाई के बाद प्रबंधन तथा अपशिष्ट के प्रभावी उपयोग के महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि इन उपायों से खाद्य पदार्थों की बर्बादी और कटाई के बाद होने वाले नुकसान को कम करने के साथ-साथ कृषि उत्पादों का आर्थिक मूल्य भी बढ़ाया जा सकता है। उन्होंने कहा कि नवीन खाद्य प्रसंस्करण तकनीकों और टिकाऊ पद्धतियों को अपनाकर खाद्य अपशिष्ट को कम करने, किसानों की आय बढ़ाने तथा रोजगार एवं उद्यमिता के नए अवसर सृजित करने में मदद मिल सकती है।

 

विश्व खाद्य दिवस के उपलक्ष्य में विद्यार्थियों की सहभागिता बढ़ाने तथा स्वस्थ आहार, खाद्य नवाचार और सतत विकास के प्रति जागरूकता पैदा करने के लिए विभिन्न गतिविधियों का आयोजन किया गया। इस अवसर पर प्रो. बवेजा ने बेकरी ब्लॉक से प्रशासनिक ब्लॉक तक जागरूकता रैली को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। रैली के माध्यम से स्वस्थ खानपान की आदतें अपनाने और सक्रिय जीवनशैली बनाए रखने का संदेश दिया गया, ताकि जीवनशैली से जुड़ी बीमारियों की रोकथाम के साथ समग्र स्वास्थ्य को बढ़ावा दिया जा सके।

 

कार्यक्रम के अंतर्गत पोस्टर एवं नारा लेखन प्रतियोगिताओं का भी आयोजन किया गया, जिनमें खाद्य सुरक्षा, पोषण, सतत विकास और नवाचार से जुड़े विभिन्न विषयों पर 28 पोस्टर और 16 नारे प्रस्तुत किए गए। इसके अतिरिक्त, 14 खाद्य स्टॉल लगाए गए, जिनमें विभिन्न खाद्य उत्पादों और व्यंजनों का प्रदर्शन किया गया।

 

कार्यक्रम का एक प्रमुख आकर्षण विभाग के सहयोग से कार्य कर रहे महिला स्वयं सहायता समूहों द्वारा तैयार खाद्य उत्पादों की प्रदर्शनी रही। इस प्रदर्शनी के माध्यम से महिलाओं द्वारा तैयार उत्पादों को प्रदर्शित करने के साथ-साथ मूल्य संवर्धन और खाद्य प्रसंस्करण के जरिए महिला उद्यमिता तथा आजीविका के अवसरों को बढ़ावा देने की संभावनाओं को भी रेखांकित किया गया। कार्यक्रम में विश्वविद्यालय के संवैधानिक अधिकारियों, विभिन्न विभागाध्यक्षों, शिक्षकों, कर्मचारियों और विद्यार्थियों ने भाग लिया।

 

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