कांग्रेस सरकार के संरक्षण में अराजकता और गुंडागर्दी का आरोप; निर्वाचन विभाग की संपत्ति को नुकसान पहुंचाने वालों पर निष्पक्ष जांच के बाद हो कार्रवाई : डॉ. राजीव बिंदल – भारत केसरी टीवी

कांग्रेस सरकार के संरक्षण में अराजकता और गुंडागर्दी का आरोप; निर्वाचन विभाग की संपत्ति को नुकसान पहुंचाने वालों पर निष्पक्ष जांच के बाद हो कार्रवाई : डॉ. राजीव बिंदल

[MADAN SHARMA]

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चार साल बाद अपनी नाकामियों का ठीकरा भाजपा और चुनाव आयोग पर न फोड़े कांग्रेस; सिरमौर के विकास, स्वास्थ्य, पानी और सड़कों का हिसाब दे सरकार : डॉ. बिंदल

 

नाहन, 26 सितंबर। भाजपा प्रदेश अध्यक्ष डॉ. राजीव बिंदल ने प्रदेश की कांग्रेस सरकार पर तीखा हमला बोलते हुए आरोप लगाया कि मुख्यमंत्री, मंत्री और सत्ताधारी दल के नेता प्रदेश में अराजकता, राजनीतिक दबाव और गुंडागर्दी की संस्कृति को संरक्षण दे रहे हैं। उन्होंने कहा कि शिमला में निर्वाचन विभाग कार्यालय के बाहर कांग्रेस के प्रदर्शन के दौरान जो दृश्य सामने आए, उन्होंने कानून-व्यवस्था और सरकारी संपत्ति के प्रति सत्ताधारी दल के रवैये पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं।

 

डॉ. बिंदल ने कहा कि यह तथ्य सार्वजनिक रिपोर्टों में दर्ज है कि कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने निर्वाचन विभाग कार्यालय की दीवारों और साइन बोर्ड पर “वोट चोर” लिखा तथा मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ प्रदर्शन और पुतला दहन किया। प्रदर्शन का नेतृत्व प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष विनय कुमार ने किया और इसमें कांग्रेस प्रभारी रजनी पाटिल, उपमुख्यमंत्री मुकेश अग्निहोत्री, शिक्षा मंत्री रोहित ठाकुर सहित वरिष्ठ कांग्रेस नेता उपस्थित थे।

 

उन्होंने कहा, “हमारा आरोप है कि मंत्रियों और वरिष्ठ कांग्रेस नेताओं की मौजूदगी में सरकारी संपत्ति को नुकसान पहुंचाया गया। पुलिस को धमकाने, पुलिस वाहन पर चढ़कर उसे नुकसान पहुंचाने तथा सरकारी कार्यालय को आग लगाने की धमकी देने के जो आरोप सामने आए हैं, उनकी CCTV फुटेज, वीडियो और पुलिस रिकॉर्ड के आधार पर तत्काल निष्पक्ष जांच होनी चाहिए। आरोप सही पाए जाते हैं तो कानून के अनुसार कार्रवाई होनी चाहिए।”

 

डॉ. बिंदल ने कहा कि सरकारी कार्यालय की दीवारों और साइन बोर्ड पर नारे लिखे जाने की तस्वीरें और रिपोर्ट सामने हैं। मीडिया रिपोर्टों में निर्वाचन विभाग का साइन बोर्ड हटाने और परिसर में नारे लिखे जाने का भी उल्लेख है। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में विरोध का अधिकार सभी को है, लेकिन सरकारी संपत्ति को नुकसान पहुंचाने का अधिकार किसी राजनीतिक दल को नहीं है।

 

उन्होंने कहा, “कहावत है—‘सैंया भये कोतवाल तो डर काहे का।’ जब सत्ता का संरक्षण होने का विश्वास पैदा हो जाए तो कानून का भय समाप्त होने लगता है। यदि भाजपा का कार्यकर्ता पुतला फूंके तो एफआईआर, भाजपा कार्यकर्ता नारे लगाए तो पुलिस केस, लेकिन यदि सत्ताधारी दल के कार्यकर्ताओं पर तोड़फोड़ या सरकारी संपत्ति को नुकसान पहुंचाने के आरोप लगें तो प्रशासन चुप क्यों रहे? कानून की कसौटी सत्ता और विपक्ष के लिए अलग-अलग नहीं हो सकती।”

 

डॉ. बिंदल ने कहा कि भाजपा मांग करती है कि पूरे घटनाक्रम की वीडियो रिकॉर्डिंग और CCTV फुटेज सुरक्षित की जाए, सरकारी संपत्ति को हुए नुकसान का आकलन किया जाए और जिन व्यक्तियों की भूमिका प्रमाणित हो, उनके खिलाफ राजनीतिक पहचान से ऊपर उठकर कानूनी कार्रवाई की जाए।

 

“सोलन में भैंस के आगे बीन बजाना कांग्रेस के भीतर की नाराजगी का प्रतीक”

 

डॉ. बिंदल ने सोलन में कांग्रेस के एक कार्यक्रम का उल्लेख करते हुए तंज कसा कि कांग्रेस नेताओं द्वारा “भैंस के आगे बीन बजाने” का प्रदर्शन स्वयं उनकी सरकार के प्रति असंतोष को दर्शाता है। उन्होंने दावा किया, “यदि सोलन के कांग्रेस नेताओं की शिकायत यह है कि मुख्यमंत्री उनकी बात नहीं सुनते और जिले की उपेक्षा हो रही है, तो उन्हें यह बात मुख्यमंत्री के सामने रखनी चाहिए। अपने ही घर का राजनीतिक झगड़ा सड़क पर लाकर नौटंकी करने से सोलन की समस्याएं हल नहीं होंगी।”

 

“जीत पर चुनाव आयोग ठीक और हार पर गलत—कांग्रेस तथ्यों से जवाब दे”

 

चुनाव आयोग के खिलाफ कांग्रेस के प्रदर्शन पर डॉ. बिंदल ने कहा कि कांग्रेस को किसी भी निर्वाचन प्रक्रिया पर आपत्ति दर्ज कराने का पूरा लोकतांत्रिक अधिकार है, लेकिन उसे अपने आरोपों के समर्थन में ठोस और सत्यापन योग्य तथ्य भी प्रस्तुत करने चाहिए। कांग्रेस ने 25 सितंबर को शिमला में SIR और चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली को लेकर प्रदर्शन किया तथा मुख्य चुनाव आयुक्त को हटाने की मांग की।

 

उन्होंने कहा, “हिमाचल प्रदेश में कांग्रेस चुनाव जीतती है तो चुनाव आयोग सही है, लेकिन जिन राज्यों में उसे हार मिलती है वहां वही संस्था गलत हो जाती है—इस राजनीतिक तर्क का जवाब कांग्रेस को देना चाहिए। चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर प्रश्न उठाना अधिकार है, लेकिन संवैधानिक संस्थाओं के खिलाफ आरोप प्रमाण और निर्धारित कानूनी प्रक्रिया के आधार पर होने चाहिए।”

 

डॉ. बिंदल ने कहा कि चुनाव में जीत-हार का निर्णय मतदाता करते हैं और भविष्य के चुनाव परिणामों का फैसला भी प्रदेश की जनता ही करेगी। उन्होंने कहा कि कांग्रेस को भविष्य के परिणामों के लिए अभी से किसी संस्था को जिम्मेदार ठहराने के बजाय अपने शासन के रिकॉर्ड पर जनता के सवालों का जवाब देना चाहिए।

 

“चार साल हो गए, अब जवाबदेही कांग्रेस सरकार की है”

 

मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू द्वारा भाजपा सरकार के पूर्व कार्यकाल पर लगाए गए आरोपों पर पलटवार करते हुए डॉ. बिंदल ने कहा कि वर्तमान सरकार को सत्ता में आए लगभग चार वर्ष होने जा रहे हैं और अब हर समस्या के लिए पूर्ववर्ती सरकार को जिम्मेदार बताकर अपनी जवाबदेही से बचा नहीं जा सकता।

 

उन्होंने कहा, “चार साल में सिरमौर में स्वास्थ्य, शिक्षा, सड़क, पेयजल और बुनियादी सुविधाओं की क्या स्थिति हुई, मुख्यमंत्री इसका हिसाब दें। कितने विकास कार्य स्वीकृत हुए, कितना पैसा खर्च हुआ और कितनी योजनाएं धरातल पर पूरी हुईं—सरकार यह आंकड़ा जनता के सामने रखे।”

 

डॉ. बिंदल ने आरोप लगाया कि सिरमौर में लोगों को पेयजल की समस्या, खराब सड़कों तथा शिक्षण और स्वास्थ्य संस्थानों में रिक्त पदों जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है। उन्होंने नाहन मेडिकल कॉलेज की स्थिति पर भी सरकार से समयबद्ध जवाब मांगा और कहा कि केवल घोषणाओं के बजाय सरकार बताए कि मेडिकल कॉलेज का पूरा आधारभूत ढांचा कब तैयार होगा।

 

किशाऊ पर सिरमौर के किसानों के अधिकार स्पष्ट करे सरकार

 

किशाऊ बहुउद्देशीय परियोजना को लेकर डॉ. बिंदल ने कहा कि सरकार को प्रदेश और विशेषकर सिरमौर के हितों से जुड़े सभी वित्तीय और जल अधिकारों की जानकारी सार्वजनिक करनी चाहिए। उन्होंने कहा कि छह राज्यों से संबंधित किशाऊ परियोजना पर 15 सितंबर को अंतरराज्यीय समझौता हुआ है और अब प्रदेश सरकार की जिम्मेदारी है कि वह हिमाचल के हिस्से, वित्तीय दायित्व, बिजली से संभावित आय तथा सिंचाई लाभ की स्पष्ट तस्वीर जनता के सामने रखे।

 

उन्होंने कहा, “सरकार बताए कि सिरमौर के किसान को सिंचाई के लिए वास्तव में कितना पानी मिलेगा, हिमाचल के जल अधिकार क्या रहेंगे, प्रदेश को बिजली में कितना हिस्सा मिलेगा और अनुमानित आय का आधार क्या है। यह सिरमौर की आने वाली पीढ़ियों से जुड़ा प्रश्न है।”

 

डॉ. बिंदल ने कहा कि गिरी-बाटा परियोजना से निकली सिंचाई व्यवस्था ने दशकों से पांवटा दून के कृषि क्षेत्र को लाभ पहुंचाया है और किशाऊ के संदर्भ में भी किसानों के दीर्घकालिक सिंचाई हितों को स्पष्ट रूप से संरक्षित किया जाना चाहिए।

 

मुख्यमंत्री के प्रस्तावित सिरमौर प्रवास के रद्द होने का मुद्दा उठाते हुए उन्होंने कहा कि प्रशासनिक तैयारियों पर यदि सार्वजनिक धन खर्च हुआ है तो सरकार को उसकी जानकारी सार्वजनिक करनी चाहिए। उन्होंने कहा, “मुख्यमंत्री के दौरे से जनता को उम्मीदें होती हैं। कार्यक्रम रद्द होने के बाद सरकार बताए कि तैयारियों पर कितना सरकारी खर्च हुआ और जिले के लिए जिन घोषणाओं या निर्णयों की अपेक्षा थी, उनका अब क्या होगा।”

 

अंत में डॉ. बिंदल ने कहा, “प्रदेश की जनता आरोप-प्रत्यारोप से आगे बढ़कर काम का हिसाब चाहती है। कांग्रेस सरकार को अब भाजपा को कोसने के बजाय अपने लगभग चार वर्षों के शासन का रिपोर्ट कार्ड देना चाहिए। कानून-व्यवस्था हो या सिरमौर का विकास—सरकार को हर मोर्चे पर जवाब देना होगा।”

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