किसानों की आय बढ़ाने को प्रतिबद्ध प्रदेश सरकार, हमीरपुर में बनेगी 8.64 करोड़ की अवशेष परीक्षण प्रयोगशाला – भारत केसरी टीवी

किसानों की आय बढ़ाने को प्रतिबद्ध प्रदेश सरकार, हमीरपुर में बनेगी 8.64 करोड़ की अवशेष परीक्षण प्रयोगशाला

[मदन शर्मा]

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किसानों की अर्थव्यवस्था मजबूत करने के लिए प्रतिबद्ध प्रदेश सरकार

• प्राकृतिक उत्पादों की गुणवत्ता प्रमाणित करने के लिए हमीरपुर में बनेगी राज्य अवशेष परीक्षण प्रयोगशाला

हिमाचल प्रदेश की अर्थव्यवस्था में कृषि एवं इससे जुड़े क्षेत्र महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविंद्र सिंह सुक्खू के दूरदर्शी नेतृत्व में राज्य सरकार किसान-केंद्रित नीतियों के माध्यम से कृषि क्षेत्र में बदलाव ला रही है और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सशक्त बना रही है। प्रगतिशील नीतियों और लक्षित योजनाओं के बल पर प्राकृतिक खेती एक टिकाऊ कृषि मॉडल के रूप में उभर रही है, जिससे किसानों की आय बढ़ रही है, भूमि की उर्वरता संरक्षित हो रही है तथा नए बाजारों के अवसर सृजित हो रहे हैं।

करीब तीन वर्ष पहले हिमाचल प्रदेश प्राकृतिक रूप से उगाई गई फसलों पर न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) देने वाला देश का पहला राज्य बना था। इसके बाद राज्य सरकार हर वर्ष प्राकृतिक खेती करने वाले किसानों को प्रोत्साहित करने के लिए एमएसपी में बढ़ोतरी करती रही है।

वर्तमान में सरकार प्राकृतिक खेती से उत्पादित गेहूं पर 80 रुपये प्रति किलोग्राम, मक्की पर 50 रुपये प्रति किलोग्राम, कच्ची हल्दी पर 150 रुपये प्रति किलोग्राम तथा अदरक पर 30 रुपये प्रति किलोग्राम की दर से एमएसपी दे रही है। इसके अलावा चंबा जिले की पांगी घाटी को प्रदेश का पहला प्राकृतिक खेती उपमंडल घोषित किया गया है, जहां प्राकृतिक रूप से उगाई गई जौ पर 80 रुपये प्रति किलोग्राम एमएसपी दिया जा रहा है। इन प्रोत्साहनों से किसानों का प्राकृतिक खेती के प्रति विश्वास और रुचि बढ़ी है।

प्राकृतिक खेती की बढ़ती स्वीकार्यता का प्रमाण सरकारी खरीद केंद्रों पर भी देखने को मिला है। वर्ष 2024-25 में 838 किसानों ने 2,123.58 क्विंटल प्राकृतिक गेहूं बेचा था, जबकि चालू रबी सीजन में 1,891 किसानों से 2,679.89 क्विंटल प्राकृतिक गेहूं की खरीद की गई। किसानों को सुविधा देने के लिए सरकार ने सभी जिलों में खरीद एवं विपणन केंद्र स्थापित किए हैं, ताकि उन्हें अपनी उपज का उचित मूल्य मिल सके।

राज्य सरकार हिमाचल के विशिष्ट कृषि उत्पादों, विशेषकर जनजातीय क्षेत्रों की पारंपरिक फसलों को भी बढ़ावा दे रही है। पांगी को प्राकृतिक खेती उपमंडल घोषित करने से पारंपरिक खेती को नई पहचान मिली है और खाद्य सुरक्षा को भी मजबूती मिली है। पिछले खरीफ सीजन में चंबा जिले की हुडान, सुराल, किलाड़, साच और सेंचू पंचायतों के किसानों ने प्राकृतिक रूप से उगाई गई जौ को अच्छे दामों पर बेचा।

सरकार की प्रतिबद्धता दूरदराज के क्षेत्रों तक भी पहुंच रही है। मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने अपने हालिया बड़ा भंगाल दौरे के दौरान अधिकारियों को क्षेत्र में प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने और इसे प्राकृतिक खेती पंचायत के रूप में विकसित करने के निर्देश दिए। उन्होंने यहां की प्रसिद्ध राजमा को भौगोलिक संकेतक (जीआई) टैग दिलाने के प्रयास करने को भी कहा, जिससे इस उत्पाद को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय बाजार में नई पहचान और बेहतर मूल्य मिल सके।

वर्तमान में प्रदेश के 2,56,870 किसान 44,784.73 हेक्टेयर भूमि पर प्राकृतिक खेती कर रहे हैं। किसानों की बढ़ती भागीदारी को देखते हुए कृषि विभाग प्राकृतिक खेती से जुड़े उत्पादों की ब्रांडिंग, विपणन और बाजार उपलब्धता को मजबूत करने के लिए एक समर्पित मार्केटिंग विंग स्थापित करने की दिशा में कार्य कर रहा है।

राज्य सरकार कृषि एवं संबद्ध क्षेत्रों के सतत विकास के लिए आधुनिक तकनीकों को भी बढ़ावा दे रही है। सरकार यह सुनिश्चित कर रही है कि प्रयोगशालाओं में विकसित नई तकनीकों का लाभ सीधे किसानों तक पहुंचे।

प्राकृतिक उत्पादों की गुणवत्ता सुनिश्चित करने और उपभोक्ताओं का विश्वास बढ़ाने के उद्देश्य से हमीरपुर में 8.64 करोड़ रुपये की लागत से अत्याधुनिक राज्य अवशेष परीक्षण प्रयोगशाला स्थापित की जा रही है। आधुनिक विश्लेषण उपकरणों से सुसज्जित यह प्रयोगशाला प्राकृतिक खेती से उत्पादित कृषि उपज की वैज्ञानिक जांच करेगी। इसके माध्यम से प्राकृतिक उत्पादों की गुणवत्ता, शुद्धता और प्रमाणिकता सुनिश्चित की जाएगी तथा किसानों को बीज परीक्षण की सुविधा भी उपलब्ध होगी।

शून्य बजट प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देकर राज्य सरकार ऐसी कृषि व्यवस्था को प्रोत्साहित कर रही है, जो मानव स्वास्थ्य और मिट्टी की उर्वरता दोनों की रक्षा करती है। नीति समर्थन, सुनिश्चित बाजार और वैज्ञानिक अधोसंरचना के माध्यम से हिमाचल प्रदेश सतत कृषि के क्षेत्र में अग्रणी राज्य के रूप में उभर रहा है। मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविंद्र सिंह सुक्खू के नेतृत्व में प्रदेश का प्राकृतिक खेती मॉडल राष्ट्रीय प्राकृतिक खेती मिशन के लिए नए मानक स्थापित कर रहा है और यह साबित कर रहा है कि पर्यावरण अनुकूल खेती ग्रामीण आजीविका और आर्थिक सशक्तिकरण दोनों को मजबूत बना सकती है।

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