पीएमकेएसवाई की समीक्षा बैठक में हिमाचल ने उठाए अहम मुद्दे, लागत बढ़ाने और समय सीमा बढ़ाने की मांग – भारत केसरी टीवी

पीएमकेएसवाई की समीक्षा बैठक में हिमाचल ने उठाए अहम मुद्दे, लागत बढ़ाने और समय सीमा बढ़ाने की मांग

[मदन शर्मा]

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केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी योजना प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना (PMKSY) की प्रगति की समीक्षा के लिए एक उच्च स्तरीय बैठक का आयोजन किया गया, जिसकी अध्यक्षता केंद्रीय जल शक्ति मंत्री C. R. Patil ने की।

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बैठक में जल शक्ति विभाग के सचिव Dr. Abhishek Jain ने भाग लेते हुए राज्य की प्रगति, चुनौतियों और भविष्य की आवश्यकताओं को विस्तार से प्रस्तुत किया।

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डॉ. अभिषेक जैन ने बताया कि सरफेस माइनर इरिगेशन (SMI) कार्यक्रम के तहत 169 में से 149 योजनाएं पूरी हो चुकी हैं, जबकि 20 योजनाएं वर्तमान में निर्माणाधीन हैं। उन्होंने कहा कि विभाग शेष कार्यों को समयबद्ध तरीके से पूरा करने के लिए प्रतिबद्ध है, बशर्ते समय पर धनराशि उपलब्ध हो।

उन्होंने कहा कि हिमाचल प्रदेश में पहाड़ी भौगोलिक परिस्थितियों के कारण ‘हर खेत को पानी’ घटक के तहत PMKSY की योजनाएं बेहद महत्वपूर्ण हैं। ये योजनाएं दूरदराज और वर्षा आधारित क्षेत्रों में सिंचाई क्षमता बढ़ाने में अहम भूमिका निभा रही हैं।

राज्य की विशेष चुनौतियों का जिक्र करते हुए उन्होंने बताया कि लगभग 66 प्रतिशत क्षेत्र वन भूमि के अंतर्गत आता है, जिसके कारण FRA और FCA के तहत स्वीकृतियों में देरी होती है। साथ ही 2023 और 2025 में हुई अत्यधिक वर्षा से कई सिंचाई परियोजनाओं को नुकसान पहुंचा, जिससे पुनः डिजाइन, ढलान स्थिरीकरण और भूमि अधिग्रहण की आवश्यकता पड़ी।

उन्होंने कहा कि इन परिस्थितियों से स्पष्ट है कि हिमाचल जैसे पहाड़ी राज्यों में जलवायु अनुकूल और आपदा-रोधी सिंचाई ढांचे की आवश्यकता है।

डॉ. जैन ने बताया कि 6 पूर्ण और 6 निर्माणाधीन SMI योजनाएं भी क्षतिग्रस्त हुई हैं, जिससे परियोजनाओं की समयसीमा प्रभावित हुई है।

भौगोलिक कठिनाइयों और बढ़ती लागत को देखते हुए उन्होंने प्रति हेक्टेयर लागत को 4 लाख रुपये से बढ़ाकर 6 लाख रुपये करने की मांग की। इसके अलावा SMI योजनाओं के लिए 60.41 करोड़ रुपये की केंद्रीय सहायता और MIS के तहत 273.78 करोड़ रुपये के नए प्रस्तावों को मंजूरी देने का आग्रह किया। साथ ही उन्होंने परियोजनाओं की समय सीमा बढ़ाने की भी मांग की।

केंद्रीय मंत्री ने सिंचाई योजनाओं की सराहना करते हुए कहा कि ये ग्रामीण आजीविका को मजबूत करने, नकदी फसलों को बढ़ावा देने और ग्रामीण क्षेत्रों से पलायन रोकने में मददगार हैं। उन्होंने आश्वासन दिया कि हिमाचल प्रदेश द्वारा उठाए गए मुद्दों पर सहानुभूतिपूर्वक विचार किया जाएगा।

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