हरौली उत्सव पर सियासी संग्राम: Rakesh Jamwal ने बताया ‘व्यवस्था पतन’ का उदाहरण – भारत केसरी टीवी

हरौली उत्सव पर सियासी संग्राम: Rakesh Jamwal ने बताया ‘व्यवस्था पतन’ का उदाहरण

[मदन शर्मा ]

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“राज्य स्तरीय हरौली उत्सव बना कांग्रेस का राजनीतिक मंच—‘व्यवस्था परिवर्तन’ नहीं, ‘व्यवस्था पतन’ का उदाहरण”: राकेश जमवाल

“SDM चेयरमैन, DC की देखरेख में सरकारी कार्यक्रम—फिर भी कांग्रेस प्रभारी से समापन, खुला सत्ता दुरुपयोग”

शिमला:
भाजपा के मुख्य प्रवक्ता राकेश जमवाल ने राज्य स्तरीय हरौली उत्सव के आयोजन को लेकर कांग्रेस सरकार पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि यह कार्यक्रम पूरी तरह से सरकारी होते हुए भी इसे कांग्रेस के राजनीतिक मंच में बदल दिया गया है।
उन्होंने कहा कि यह उत्सव प्रशासनिक स्तर पर आयोजित कार्यक्रम है, जिसमें SDM इस समिति के चेयरमैन होते हैं और पूरा आयोजन जिला आयुक्त (DC) की देखरेख में संपन्न होता है, ऐसे में इस कार्यक्रम का राजनीतिकरण करना स्पष्ट रूप से सरकारी तंत्र का दुरुपयोग है।
“जब कार्यक्रम पूरी तरह से प्रशासनिक ढांचे के अंतर्गत हो—SDM चेयरमैन हो और DC की निगरानी में हो—तो फिर कांग्रेस प्रभारी को मंच पर लाना सीधे-सीधे सरकारी शक्ति का दुरुपयोग है,” जमवाल ने कहा।

उन्होंने कहा कि इस सरकारी उत्सव के समापन के लिए कांग्रेस प्रभारी रजनी पाटिल को आमंत्रित करना प्रशासनिक निष्पक्षता पर गंभीर प्रश्न खड़े करता है।
“यह सरकारी कार्यक्रम नहीं, बल्कि कांग्रेस का राजनीतिक इवेंट बन चुका है—यही कांग्रेस का तथाकथित ‘व्यवस्था परिवर्तन’ है, जो अब ‘व्यवस्था पतन’ में बदल गया है,” उन्होंने तीखा प्रहार किया।

राकेश जमवाल ने यह भी कहा कि इस कार्यक्रम में महाधिवक्ता अनूप रत्न का नाम शामिल किया जाना भी गंभीर चिंता का विषय है।
“महाधिवक्ता एक संवैधानिक पद है—उन्हें इस प्रकार के राजनीतिक और उत्सवात्मक कार्यक्रमों में शामिल करना संवैधानिक मर्यादाओं का उल्लंघन है,” उन्होंने कहा।
उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस सरकार प्रशासनिक मशीनरी का इस्तेमाल अपने राजनीतिक लाभ के लिए कर रही है।

“जहां प्रशासन को निष्पक्ष होना चाहिए, वहां कांग्रेस अपने राजनीतिक एजेंडे को लागू कर रही है—यह लोकतंत्र के लिए खतरनाक संकेत है,” उन्होंने कहा।
जमवाल ने कहा कि इस प्रकार के आयोजन यह दर्शाते हैं कि प्रदेश में
सरकार और संगठन के बीच की सीमाएं पूरी तरह खत्म हो चुकी हैं।
“यह सीधा-सीधा सरकारी पावर का दुरुपयोग है—जनता के पैसे से कांग्रेस का राजनीतिक कार्यक्रम चलाया जा रहा है,” उन्होंने आरोप लगाया।
अंत में उन्होंने कहा कि भाजपा इस मुद्दे को मजबूती से उठाएगी और कांग्रेस सरकार की
“संवैधानिक पदों के दुरुपयोग, प्रशासनिक गिरावट और राजनीतिकरण” को जनता के सामने लाएगी।
“हिमाचल की जनता समझ चुकी है—यह व्यवस्था परिवर्तन नहीं, बल्कि व्यवस्था का पतन है,” उन्होंने निष्कर्ष में कहा।

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