महिलाओं को स्वरोजगार के लिए मिलेगा 3 लाख तक का ऋण, सरकार देगी ब्याज में राहत – भारत केसरी टीवी

महिलाओं को स्वरोजगार के लिए मिलेगा 3 लाख तक का ऋण, सरकार देगी ब्याज में राहत

[मदन शर्मा]

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ग्रामीण अर्थव्यवस्था में महिलाओं की भागीदारी मजबूत करने के लिए प्रतिबद्ध है कांग्रेस सरकार

· सशक्त महिलाएं मजबूत परिवार और समाज का निर्माण करती हैं : मुख्यमंत्री

ग्रामीण अर्थव्यवस्था में महिलाओं की मजबूत भागीदारी सुनिश्चित करने के लिए वर्तमान राज्य सरकार बजट घोषणा के अनुरूप ‘मुख्यमंत्री महिला सशक्तिकरण योजना’ शुरू करने जा रही है। इस योजना के तहत महिलाओं को कृषि, बागवानी, संबद्ध गतिविधियों तथा अन्य स्वरोजगार आधारित व्यवसाय शुरू करने के लिए ऋण सुविधा उपलब्ध करवाई जाएगी। राज्य सरकार की यह पहल ग्रामीण क्षेत्रों की महिलाओं को स्वरोजगार के अवसर सृजित करने और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को और मजबूत करने के लिए प्रोत्साहित करेगी।

इस योजना के तहत ग्रामीण क्षेत्रों की वे महिलाएं पात्र होंगी जिनकी पारिवारिक वार्षिक आय एक लाख रुपये से अधिक नहीं है। हिमाचल प्रदेश महिला विकास निगम के माध्यम से अनुसूचित बैंक डेयरी, पोल्ट्री, मधुमक्खी पालन, फूड प्रोसेसिंग, सिलाई-कढ़ाई, बुटीक, ब्यूटी पार्लर और अन्य उद्यमों के लिए तीन लाख रुपये तक का ऋण उपलब्ध करवाएंगे। इन ऋणों पर देय ब्याज का चार प्रतिशत राज्य सरकार वहन करेगी।

मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने कहा कि वर्तमान कांग्रेस सरकार महिलाओं के सामाजिक और आर्थिक उत्थान के लिए कई कल्याणकारी योजनाएं लागू कर रही है। उन्होंने कहा कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था में महिलाओं की महत्वपूर्ण भूमिका है और बदलती सामाजिक-आर्थिक जरूरतों तथा चुनौतियों को ध्यान में रखते हुए राज्य सरकार महिलाओं को आत्मनिर्भर और सशक्त बनाने की दिशा में कार्य कर रही है। उन्होंने कहा कि जब महिलाएं सशक्त होती हैं तो पूरा परिवार आर्थिक रूप से मजबूत बनता है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों के लोगों की आय बढ़ाने के उद्देश्य से राज्य सरकार ने प्राकृतिक खेती से उत्पादित गेहूं, मक्की, कच्ची हल्दी, पांगी क्षेत्र की जौ और अदरक के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) तय किया है। इसके अतिरिक्त दूध के खरीद मूल्य में भी उल्लेखनीय वृद्धि की गई है।

ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सुदृढ़ करने के लिए राज्य सरकार ने गाय के दूध का खरीद मूल्य 51 रुपये से बढ़ाकर 61 रुपये प्रति लीटर तथा भैंस के दूध का मूल्य 61 रुपये से बढ़ाकर 71 रुपये प्रति लीटर किया है। दूध प्रोत्साहन योजना के तहत जो किसान स्वयं दूध खरीद केंद्रों तक पहुंचाते हैं, उन्हें प्रति लीटर तीन रुपये का अतिरिक्त प्रोत्साहन दिया जा रहा है। दूध परिवहन पर दी जाने वाली सब्सिडी भी 1.50 रुपये प्रति लीटर बढ़ाई गई है।

बाजार में अस्थिरता से किसानों को बचाने के लिए प्राकृतिक खेती से उगाए गए उत्पादों के एमएसपी में भी उल्लेखनीय वृद्धि की गई है। प्राकृतिक गेहूं का समर्थन मूल्य 60 रुपये से बढ़ाकर 80 रुपये प्रति किलोग्राम, मक्की का 40 रुपये से बढ़ाकर 50 रुपये प्रति किलोग्राम तथा कच्ची हल्दी का 90 रुपये से बढ़ाकर 150 रुपये प्रति किलोग्राम किया गया है। इसके अलावा पहली बार अदरक के लिए 30 रुपये प्रति किलोग्राम का समर्थन मूल्य घोषित किया गया है। किसानों की नीति निर्माण में भागीदारी सुनिश्चित करने के लिए राज्य किसान आयोग के गठन की भी घोषणा की गई है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि हिमाचल प्रदेश को आत्मनिर्भर बनाना राज्य सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है। उन्होंने कहा कि वास्तविक प्रगति तब मानी जाती है जब समाज के अंतिम व्यक्ति तक समृद्धि पहुंचे। इसी सोच के साथ सरकार केवल सब्सिडी तक सीमित नहीं है, बल्कि ऐसा मजबूत तंत्र विकसित कर रही है जिसमें ग्रामीण युवा कृषि और डेयरी को सम्मानजनक, लाभकारी और आर्थिक रूप से व्यवहार्य पेशे के रूप में अपनाएं।

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