हिमाचल हाईकोर्ट की दो टूक, फैसला लागू नहीं हुआ तो अफसरों पर शुरू होगी कार्रवाई – भारत केसरी टीवी

हिमाचल हाईकोर्ट की दो टूक, फैसला लागू नहीं हुआ तो अफसरों पर शुरू होगी कार्रवाई

[मदन शर्मा]

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शिमला। हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने अपने आदेशों के पालन में हो रही देरी को गंभीरता से लेते हुए राज्य सरकार और वन विभाग के अधिकारियों को कड़ी चेतावनी दी है। पुष्प कुमार व अन्य बनाम हिमाचल प्रदेश राज्य मामले की सुनवाई के दौरान न्यायाधीश अजय मोहन गोयल की पीठ ने साफ कहा कि यदि अदालत के पुराने आदेश को पूरी तरह लागू नहीं किया गया, तो संबंधित शीर्ष अधिकारियों के खिलाफ अवमानना की कार्रवाई शुरू की जा सकती है।

अदालत ने राज्य सरकार के अनुरोध पर मामले की अगली सुनवाई 14 सितंबर 2026 तय की है। सरकार को तब तक सभी याचिकाकर्ताओं के मामले में आदेश का पूर्ण रूप से पालन सुनिश्चित करना होगा। ऐसा नहीं होने पर प्रधान सचिव (वन) और प्रधान मुख्य वन संरक्षक (PCCF) को व्यक्तिगत रूप से अदालत में पेश होकर यह बताना होगा कि उनके खिलाफ जानबूझकर आदेश की अवहेलना करने पर कार्रवाई क्यों न की जाए।

वन रक्षकों के नियमितीकरण का मामला

सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ताओं की ओर से अदालत को बताया गया कि पूर्व में दिए गए फैसले का अभी तक सभी लोगों को समान रूप से लाभ नहीं मिला है। कुछ याचिकाकर्ताओं के मामलों में कार्रवाई हुई है, जबकि कई अन्य वन रक्षकों के संबंध में विभाग ने अब तक आदेश लागू नहीं किया है।

राज्य सरकार ने अदालत को बताया कि संबंधित अधिकारियों से बातचीत हो चुकी है और उन्होंने भरोसा दिलाया है कि करीब चार सप्ताह के भीतर सभी पात्र याचिकाकर्ताओं के पक्ष में आदेश को लागू कर दिया जाएगा।

गौरतलब है कि हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को याचिकाकर्ता वन रक्षकों को धर्मशाला सर्कल के समान कर्मचारियों की तर्ज पर 31 दिसंबर 2021 से नियमित करने और वित्तीय लाभ देने के निर्देश दिए थे। इसी आदेश के पूर्ण अनुपालन को लेकर अब अदालत ने सरकार को समयसीमा दी है।

बिना कारण बताए आदेश पर कोर्ट की तल्ख टिप्पणी

एक अन्य मामले में हाईकोर्ट ने हिमाचल प्रदेश राज्य सहकारी दुग्ध उत्पादक महासंघ लिमिटेड (मिल्कफेड) के बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्स के आदेश को रद्द करते हुए कहा कि किसी निर्णय के पीछे कारणों का स्पष्ट होना जरूरी है।

अदालत ने टिप्पणी की कि बिना तर्क के पारित आदेश ऐसे शरीर के समान है, जिसमें आत्मा न हो। कोर्ट के अनुसार आदेश में यह स्पष्ट होना चाहिए कि संबंधित प्राधिकरण किस आधार पर अपने निष्कर्ष तक पहुंचा। इससे न केवल ऊपरी अदालत को मामले को समझने में आसानी होती है, बल्कि प्रभावित पक्ष को भी आदेश को चुनौती देने का उचित आधार मिलता है।

मामले में मिल्कफेड कर्मचारी यशपाल के खिलाफ विभागीय कार्रवाई की गई थी। अनुशासनात्मक प्राधिकरण ने उनकी वार्षिक वेतन वृद्धि रोकने का दंड दिया था। इसके खिलाफ दाखिल अपील को मिल्कफेड अध्यक्ष ने खारिज कर दिया था। हाईकोर्ट ने उस अपीलीय आदेश को रद्द करते हुए बोर्ड को याचिकाकर्ता को व्यक्तिगत सुनवाई का अवसर देकर मामले पर नया, स्पष्ट और कारणयुक्त फैसला लेने के निर्देश दिए हैं।

सड़क किनारे खड़े 307 जब्त वाहनों पर भी चिंता

हाईकोर्ट ने सड़क किनारे लंबे समय से खड़े 307 जब्त वाहनों के मामले में भी सख्त रुख अपनाया है। मुख्य न्यायाधीश गुरमीत सिंह संधावालिया और न्यायाधीश बिपिन चंद्र नेगी की पीठ ने वित्त सचिव, हिमाचल प्रदेश सरकार को मामले में नया पक्षकार बनाते हुए जवाब दाखिल करने को कहा है।

पुलिस की 1 अगस्त 2026 की रिपोर्ट के अनुसार, होटल एशिया द डॉन से जिला न्यायालय चक्कर मार्ग पर 117 जब्त वाहन, जबकि तारादेवी से कांची मोड़ मार्ग पर 190 वाहन सड़क किनारे खड़े हैं। अदालत ने कहा कि इतनी बड़ी संख्या में वाहनों का इस तरह खड़ा रहना यातायात और सुरक्षा के लिहाज से गंभीर समस्या है। साथ ही वाहनों से पुर्जे चोरी होने या अन्य नुकसान की आशंका भी बनी रहती है।

वाहनों को व्यवस्थित तरीके से रखने के लिए धामी के पास घंंडल क्षेत्र में करीब 0.45 हेक्टेयर भूमि को पुलिस पोस्ट, पार्किंग और जब्त वाहनों के लिए जंकयार्ड के तौर पर विकसित करने का प्रस्ताव है। इस परियोजना के लिए बजट की जरूरत है, लेकिन वित्त विभाग की ओर से प्रस्ताव को लेकर आपत्ति जताई गई थी। अब अदालत ने वित्त सचिव से इस संबंध में हलफनामा दाखिल करने को कहा है। मामले की अगली सुनवाई 28 सितंबर 2026 को होगी।

इसके अलावा एयरपोर्ट रोड के क्षतिग्रस्त हिस्सों को मौसम अनुकूल होते ही पैचवर्क, मेटलिंग और टारिंग के जरिए दुरुस्त करने का आश्वासन भी अदालत के समक्ष दिया गया है।

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