हिमाचल: पुराने दानदाता के नाम से भेजी फर्जी ई-मेल, बौद्ध धार्मिक संस्थान से 6.58 लाख रुपये की ठगी, ऐसे खुला पूरा मामला – भारत केसरी टीवी

हिमाचल: पुराने दानदाता के नाम से भेजी फर्जी ई-मेल, बौद्ध धार्मिक संस्थान से 6.58 लाख रुपये की ठगी, ऐसे खुला पूरा मामला

मदन शर्मा

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धर्मशाला। हिमाचल प्रदेश में साइबर ठगी का एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जहां साइबर ठगों ने पुराने दानदाता के नाम से मिलती-जुलती ई-मेल भेजकर धर्मशाला के समीप स्थित एक बौद्ध धार्मिक संस्थान से 6.58 लाख रुपये ठग लिए। शातिरों ने मदद के नाम पर ऐसा जाल बिछाया कि संस्थान के छह कर्मचारियों ने छह से नौ अक्तूबर के बीच नौ बार में अलग-अलग बैंक खातों में रकम ट्रांसफर कर दी। बाद में जब असली दानदाता से संपर्क किया गया, तब इस धोखाधड़ी का खुलासा हुआ।

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दो परिचितों के इलाज के नाम पर मांगी आर्थिक मदद

 

पुलिस को दी गई शिकायत के अनुसार, पांच अक्तूबर को संस्थान को एक ई-मेल प्राप्त हुई। यह ई-मेल संस्थान के पुराने दानदाता के नाम से मिलती-जुलती थी। इसमें दावा किया गया कि दानदाता के दो परिचित इलाज के लिए भारत आ रहे हैं और वह सीधे भारतीय बैंक खाते में पैसे नहीं भेज पा रहे हैं। ठगों ने जल्द रकम लौटाने का भरोसा देकर संस्थान से आर्थिक सहायता मांगी।

 

व्हाट्सएप के जरिए बनाया संपर्क, फिर ट्रांसफर करवाई रकम

 

शिकायत के मुताबिक, जब संस्थान की ओर से कार्यालय के खाते से भुगतान करने में असमर्थता जताई गई, तो कथित ठगों ने संस्थान के निदेशक का मोबाइल नंबर लिया और व्हाट्सएप के माध्यम से संपर्क किया। इसके बाद निदेशक के कहने पर संस्थान के छह कर्मचारियों ने बैंक ऑफ महाराष्ट्र और सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया के दो खातों में कुल 6.58 लाख रुपये नौ बार में ट्रांसफर कर दिए।

 

असली दानदाता से संपर्क करते ही खुली पोल

 

बाद में संस्थान प्रबंधन ने वास्तविक दानदाता से संपर्क किया तो पता चला कि उन्होंने न तो ऐसी कोई ई-मेल भेजी थी और न ही किसी के इलाज के लिए इस तरह की आर्थिक सहायता मांगी थी। इसके बाद संस्थान को ठगी का पता चला और पुलिस में शिकायत दर्ज करवाई गई।

 

पुलिस ने दर्ज की जीरो एफआईआर

 

एएसपी साइबर क्राइम पुलिस थाना धर्मशाला कुलदीप कुमार ने बताया कि मामले में भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 318(4) के तहत जीरो एफआईआर दर्ज की गई है। मामले को आगे की कानूनी कार्रवाई और जांच के लिए स्थानीय थाने में स्थानांतरित कर दिया गया है।

 

यह घटना एक बार फिर दिखाती है कि ई-मेल या व्हाट्सएप पर किसी परिचित अथवा पुराने संपर्क के नाम से आर्थिक मदद मांगे जाने पर सावधानी बरतना जरूरी है। पैसे भेजने से पहले संबंधित व्यक्ति की पहचान और मांग की पुष्टि उसके वास्तविक संपर्क नंबर पर जरूर करनी चाहिए।

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