हिमाचल के हक की कानूनी लड़ाई में सरकार आक्रामक, सीएम सुक्खू बोले- प्रदेश के हितों से नहीं होगा कोई समझौता – भारत केसरी टीवी

हिमाचल के हक की कानूनी लड़ाई में सरकार आक्रामक, सीएम सुक्खू बोले- प्रदेश के हितों से नहीं होगा कोई समझौता

[मदन शर्मा ]

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शिमला: मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने कहा है कि उनकी सरकार हिमाचल प्रदेश के अधिकारों और हितों की रक्षा के लिए हर स्तर पर मजबूती से लड़ रही है। उन्होंने कहा कि प्रदेश के संसाधनों और वित्तीय अधिकारों से जुड़े वर्षों पुराने मामलों में सरकार ने प्रभावी कानूनी पैरवी करते हुए महत्वपूर्ण प्रगति हासिल की है और हिमाचल के हितों से किसी भी कीमत पर समझौता नहीं किया जाएगा।

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मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार भाखड़ा ब्यास प्रबंधन बोर्ड (BBMB) से प्रदेश के लगभग 4,200 करोड़ रुपये के बकाया और 13,066 मिलियन यूनिट बिजली में हिमाचल के वैधानिक हिस्से को लेकर लगातार कानूनी और प्रशासनिक स्तर पर प्रयास कर रही है। उन्होंने कहा कि सर्वोच्च न्यायालय का फैसला प्रदेश के पक्ष में आने के करीब 15 वर्ष बाद भी हिमाचल को उसका पूरा अधिकार नहीं मिल पाया है।

उन्होंने बताया कि सरकार पंजाब पुनर्गठन अधिनियम-1966 के तहत चंडीगढ़ की भूमि और परिसंपत्तियों में हिमाचल की 7.19 प्रतिशत हिस्सेदारी के दावे को भी मजबूती से आगे बढ़ा रही है। इस मामले में भी सर्वोच्च न्यायालय राज्य के दावे की वैधता को स्वीकार कर चुका है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि शानन जलविद्युत परियोजना का मुद्दा भी सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में शामिल है। लीज अवधि समाप्त होने के बावजूद पंजाब सरकार ने परियोजना हिमाचल को नहीं सौंपी है। इस मामले की सुनवाई वर्तमान में सर्वोच्च न्यायालय में जारी है और राज्य सरकार पूरी मजबूती से अपना पक्ष रख रही है।

उन्होंने कहा कि सरकार ने वर्ष 2002 से लंबित वाइल्ड फ्लावर हॉल मामले में ऐतिहासिक कानूनी जीत हासिल की है। सर्वोच्च न्यायालय के फैसले के बाद यह संपत्ति दोबारा राज्य सरकार के नियंत्रण में आ गई। निर्णय के अनुरूप सरकार ने 25 करोड़ रुपये का भुगतान किया और अब यह संपत्ति प्रदेश को हर वर्ष 20 करोड़ रुपये से अधिक का राजस्व दे रही है।

मुख्यमंत्री ने बताया कि 1,045 मेगावाट करछम-वांगतू जलविद्युत परियोजना के रॉयल्टी विवाद में भी राज्य सरकार को बड़ी सफलता मिली है। सर्वोच्च न्यायालय के फैसले के बाद परियोजना से हिमाचल को मिलने वाली मुफ्त बिजली 12 प्रतिशत से बढ़कर 18 प्रतिशत हो गई है, जिससे प्रदेश को प्रतिवर्ष लगभग 150 करोड़ रुपये की अतिरिक्त आय होगी।

उन्होंने कहा कि करीब 15 हजार करोड़ रुपये की लागत वाली किशाऊ बहुउद्देश्यीय परियोजना में भी सरकार ने प्रदेश के हितों की प्रभावी पैरवी की है। पूर्व भाजपा सरकार द्वारा हिमाचल के हिस्से के लिए 800 करोड़ रुपये स्वीकार करने के प्रस्ताव को वर्तमान सरकार ने अस्वीकार कर दिया। इसके बाद केंद्र सरकार ने सिद्धांततः सहमति दी कि हिमाचल के जल घटक की अनुमानित करीब 2,000 करोड़ रुपये की लागत दिल्ली, राजस्थान और हरियाणा जैसे लाभार्थी राज्य वहन करेंगे।

मुख्यमंत्री ने कहा कि 422 मेगावाट क्षमता वाली इस परियोजना के पूरा होने पर हिमाचल प्रदेश को बिजली हिस्से के रूप में लगभग 100 करोड़ यूनिट बिजली मिलेगी, जिसकी अनुमानित वार्षिक कीमत करीब 600 करोड़ रुपये होगी।

उन्होंने कहा कि राज्य सरकार की प्राथमिकता हिमाचल प्रदेश के संसाधनों और वैधानिक अधिकारों की रक्षा करना है। सरकार प्रत्येक कानूनी और प्रशासनिक मोर्चे पर मजबूती से लड़ रही है ताकि प्रदेश को उसका पूरा हक मिल सके।

मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने दोहराया कि हिमाचल प्रदेश और यहां के लोगों के हित उनकी सर्वोच्च प्राथमिकता हैं तथा प्रदेश के अधिकारों से किसी भी स्तर पर समझौता नहीं किया जाएगा।

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