वोकेशनल ट्रेनर के कौशल एवं क्षमता विकास हेतु तीन दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम का समापन – भारत केसरी टीवी

वोकेशनल ट्रेनर के कौशल एवं क्षमता विकास हेतु तीन दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम का समापन

[MADAN SHARMA]

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राष्ट्रीय कौशल योग्यता ढांचा परियोजना (National Skills Qualification Framework) के तहत डॉ. यशवंत सिंह परमार औद्यानिकी एवं वानिकी विश्वविद्यालय, नौणी के विस्तार शिक्षा निदेशालय द्वारा वोकेशनल ट्रेनर्स के लिए तीन दिवसीय प्रशिक्षकों का प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया गया जिसमें हिमाचल प्रदेश के विभिन्न विद्यालयों से 49 वोकेशनल ट्रेनर ने भाग लिया। इस प्रशिक्षण में उन्हें व्यावसायिक शिक्षा से संबंधित आवश्यक ज्ञान, कौशल एवं प्रभावी प्रशिक्षण तकनीकों से अवगत करवाया गया।

 

प्रशिक्षण कार्यक्रम के दौरान प्रतिभागियों को एन.एस.क्यू.एफ. परियोजना के अंतर्गत विभिन्न मदों में उपलब्ध धनराशि के उचित उपयोग, बाग प्रबंधन, फल उत्पादन, कटाई-छंटाई एवं कलम लगाने की तकनीकों, फल एवं सब्जी फसलों में रोग एवं कीट प्रबंधन तथा व्यावसायिक अवसरों से संबंधित जानकारी प्रदान की गई। प्रशिक्षण को व्यावहारिक स्वरूप देने के लिए फल प्रसंस्करण इकाई, पुष्प उत्पादन प्रयोगशाला एवं नवाचार एवं उद्यमिता केंद्र का भ्रमण करवाया गया, जहां प्रतिभागियों को प्रसंस्करण, व्यावसायिक फूलों के प्रबंधन, मशरूम उत्पादन तथा उद्यमिता से जुड़ी गतिविधियों की जानकारी दी गई। इसके साथ ही कार्यस्थल आधारित प्रशिक्षण, करियर मार्गदर्शन, रोजगार मेला एवं कौशल बोध कार्यक्रम के माध्यम से विद्यार्थियों को कौशल विकास, रोजगार, स्वरोजगार एवं उद्यमिता के अवसरों के प्रति जागरूक करने के तरीकों से भी प्रतिभागियों को अवगत करवाया गया। कार्यक्रम का समन्वय डॉ. मीना कुमारी तथा सह-समन्वय डॉ. दिव्या चौधरी द्वारा किया गया।

 

समापन अवसर पर निदेशक विस्तार शिक्षा डॉ. धर्म पाल शर्मा ने कहा कि आज के समय में कौशल विकास युवाओं को आत्मनिर्भर बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। उन्होंने कहा कि इस प्रकार के प्रशिक्षण कार्यक्रमों के माध्यम से वोकेशनल ट्रेनर्स को नवीन तकनीकों एवं व्यावहारिक कौशल की जो जानकारी मिली है उसे वह विद्यार्थियों तक पहुंचाकर उन्हें विभिन्न कौशल एवं रोजगार के अवसरों के प्रति जागरूक कर सकते हैं।

 

डॉ शर्मा ने कहा कि विद्यार्थी केवल रोजगार की तलाश करने के बजाय अपने कौशल को निखारकर स्वरोजगार, उद्यमिता एवं आय सृजन के अवसरों को भी अपना सकते हैं। इससे विद्यालय स्तर पर विद्यार्थियों को अपनी रुचि एवं क्षमता के अनुसार कौशल विकसित करने, स्वरोजगार की संभावनाओं को समझने तथा भविष्य के लिए बेहतर करियर विकल्प चुनने का अवसर मिलेगा। एनएसक्यूएफ परियोजना का यह प्रयास युवाओं को कौशल आधारित एवं आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।

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