सुख आश्रय योजना के लाभार्थियों से सीधे संवाद करें अधिकारी: उपायुक्त अनुपम कश्यप – भारत केसरी टीवी

सुख आश्रय योजना के लाभार्थियों से सीधे संवाद करें अधिकारी: उपायुक्त अनुपम कश्यप

[मदन शर्मा]

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सुख आश्रय योजना के लाभार्थियों के साथ सीधे संवाद करें अधिकारी एवं फील्ड स्टाफ – उपायुक्त

उपायुक्त की अध्यक्षता में जिला स्तरीय निगरानी एवं समीक्षा समिति की बैठक सम्पन्न

महिला एवं बाल विकास विभाग के तहत जिला स्तरीय निगरानी एवं समीक्षा समिति की बैठक उपायुक्त शिमला अनुपम कश्यप की अध्यक्षता में बचत भवन में शुक्रवार को आयोजित की गई। बैठक में केंद्र और प्रदेश सरकार की विभिन्न योजनाओं के तहत होने वाले कार्यों की की समीक्षा की गई।


उपायुक्त ने निर्देश दिए कि मुख्यमंत्री सुख आश्रय योजना के लाभार्थियों के साथ अधिकारी एवं फील्ड स्टाफ सीधे संवाद करें। इसके साथ ही उनके हित की योजनाओं के लाभ उन तक पहुंचाने की दिशा में भी कार्य करें। अधिकारी एवं कर्मचारी 
स्वयं फील्ड निरीक्षण करें। उन्होंने कहा कि जो बच्चे इस योजना का लाभ ले चुके हैं, उनका रिकार्ड तैयार किया जाए ताकि यह पता चल सके कि योजना से लाभान्वित होने के बाद लाभार्थी क्या कर रहे हैं।

उन्होंने कहा कि जिला भर में सभी आंगनबाड़ी केंद्रों में तय मानकों के अनुसार बच्चों को हर सुविधा का लाभ दिया जाए। बच्चों को पोषण युक्त आहार मुहैया करवाए जाए। उन्होंने कहा कि बच्चों को दिए जाने वाले आहार का निरीक्षण नियमित तौर पर होना चाहिए। 
बैठक में बताया गया कि जिला में 374 सक्षम आंगनवाड़ी केंद्र बनेंगे जिनके लिए मंजूरी प्राप्त हो चुकी है। इसके साथ जिला में अभी 40 आंगनबाड़ी कम क्रेच चल रहे है। इसके अलावा 20 नए क्रेच खोलने की मंजूरी मिल चुकी है।

बैठक में बताया गया कि जिला में 2154 आंगनवाड़ी केंद्र हैं जिनमें से 228 आंगनवाड़ी केंद्रों के अपने भवन हैं जबकि 1076 केंद्र किराये के भवन में चल रहे हैं। इसके अलावा 850 केंद्र अन्य विभागों के भवनों में चल रहे हैं। जिला में 60 केंद्रों में शोचालय निर्माण के लिए धन स्वीकृत किया गया है जिनमें से 34 शौचालय बन कर तैयार हो चुके है।
बैठक में बताया गया कि मुख्यमंत्री कन्यादान योजना में बीते वर्ष में 64 लाभार्थी रहे है और इस वर्ष 49 आवेदन प्राप्त हुए है। इसी प्रकार, मुख्यमंत्री शगुन योजना के बीते वर्ष 335 लाभार्थी रहे और इस वर्ष अभी तक 30 आवेदन प्राप्त हुए है। इसके अतिरिक्त, विधवा पुनर्विवाह के तहत 25 लाभार्थियों को कुल 50 लाख रुपए की वित्तीय सहायता दी गई। महिलाओं को स्वरोजगार सहायता के तहत 94 महिलाओं को 4 लाख 70 रुपए जारी किए गए। 
इंदिरा गांधी सुख शिक्षा योजना के तहत 1813 लाभार्थियों के लिए 2 करोड़ 53 लाख 50 हजार 240 रुपए खर्च किए गए। अभी तक 927 लाभार्थी लाभान्वित हुए। इंदिरा गांधी सुख सुरक्षा योजना के तहत बीपीएल परिवार में बेटी पैदा होने पर 25 हजार रुपए की एफडी करवाई जाएगी। इसके साथ ही बेटी के माता पिता को दो-दो लाख रुपए के बीमा की भी सुविधा होगी। यह एफडी 18 वर्ष तक चलेगी। इसके साथ ही कक्षा एक से लेकर स्नातक तक साढ़े 450 से लेकर 5 हजार रुपए तक छात्रवृति मिलेगी।
बैठक में अतिरिक्त उपायुक्त शिमला सचिन शर्मा, मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ यशपाल रांटा सहित अन्य कई अधिकारी भी मौजूद रहे।

सक्षम आंगनवाड़ी केंद्र
जिला कार्यक्रम अधिकारी ममता पाॅल ने बताया कि सक्षम आंगनबाड़ी केंद्र, भारत सरकार के मिशन सक्षम आंगनवाड़ी एवं पोषण 2.0 के तहत विकसित किए गए आधुनिक और उन्नत आंगनवाड़ी केंद्र हैं। इनका उद्देश्य बच्चों, गर्भवती महिलाओं और धात्री माताओं को बेहतर पोषण, स्वास्थ्य सेवाएं तथा गुणवत्तापूर्ण प्रारंभिक शिक्षा उपलब्ध कराना है। इन केंद्रों को पारंपरिक आंगनवाड़ी की तुलना में आधुनिक सुविधाओं और बेहतर अधोसंरचना से सुसज्जित किया जाता है।

सक्षम आंगनवाड़ी केंद्र में उपलब्ध प्रमुख सुविधाएं
पूरक पोषण – 6 वर्ष तक के बच्चों, गर्भवती एवं धात्री महिलाओं को पौष्टिक आहार।
प्री-स्कूल शिक्षा – 3 से 6 वर्ष के बच्चों के लिए खेल आधारित और गतिविधि आधारित प्रारंभिक शिक्षा।
स्मार्ट लर्निंग सुविधाएं – एलईडी स्क्रीन, ऑडियो-वीडियो शिक्षण सामग्री और आयु के अनुरूप शैक्षणिक सामग्री।
इंटरनेट वाई-फाई – जहां संभव हो, वहां भारतनेट के माध्यम से इंटरनेट सुविधा।
सुरक्षित पेयजल – आरओ या वाटर फिल्टर की व्यवस्था।
स्वच्छ शौचालय एवं हाथ धोने की सुविधा।
पोषण वाटिका – ताजी और पौष्टिक सब्जियों व फलों के उत्पादन के लिए।
स्वास्थ्य जांच एवं टीकाकरण – राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन  के सहयोग से नियमित स्वास्थ्य परीक्षण और टीकाकरण।
पोषण एवं स्वास्थ्य परामश – माताओं और परिवारों को पोषण, स्तनपान और स्वच्छता संबंधी जानकारी।
रेफरल सेवाएं – जरूरत पड़ने पर बच्चों और माताओं को स्वास्थ्य संस्थानों में भेजने की व्यवस्था।
स्वच्छ भंडारण व्यवस्था – खाद्यान्न एवं पोषण सामग्री के सुरक्षित रख-रखाव की सुविधा।
वर्षा जल संचयन – स्थानीय आवश्यकता के अनुसार पर्यावरण अनुकूल सुविधाएं।

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