शूलिनी यूनिवर्सिटी की डिज़ाइन एग्ज़ीबिशन में छात्रों ने दिखाया हुनर, रिवर्स इंजीनियरिंग बना आकर्षण – भारत केसरी टीवी

शूलिनी यूनिवर्सिटी की डिज़ाइन एग्ज़ीबिशन में छात्रों ने दिखाया हुनर, रिवर्स इंजीनियरिंग बना आकर्षण

[मदन शर्मा ]

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शूलिनी विश्वविद्यालय में डिज़ाइन प्रदर्शनी में रचनात्मकता और नवाचार का प्रदर्शन
सोलन, 6 मई
शूलिनी विश्वविद्यालय के टैगोर स्कूल ऑफ डिज़ाइन ने पाइन कोर्ट में डिज़ाइन प्रदर्शनी 2026 का आयोजन किया, जिसमें छात्रों द्वारा किए गए विभिन्न प्रोजेक्ट प्रदर्शित किए गए। इन प्रोजेक्ट्स में रचनात्मकता, नवाचार और व्यावहारिक डिज़ाइन शिक्षा को प्रमुखता दी गई।
संस्थापक-कुलपति प्रो. पी. के. खोसला ने रजिस्ट्रार डॉ. सुनील पुरी और इंजीनियरिंग एवं प्रौद्योगिकी संकाय के डीन प्रो. वीरेंद्र रिहानी की उपस्थिति में प्रदर्शनी का उद्घाटन किया। गणमान्य व्यक्तियों ने छात्रों के रचनात्मक दृष्टिकोण की सराहना की और उन्हें व्यावहारिक शिक्षा और प्रयोगों के माध्यम से नए विचारों की खोज जारी रखने के लिए प्रोत्साहित किया।
प्रदर्शनी के मुख्य आकर्षणों में से एक कुलपति प्रो. अतुल खोसला द्वारा उपहार में दी गई ऑडी कार का डिज़ाइन डिसअसेंबली था। रिवर्स इंजीनियरिंग और व्यावहारिक विश्लेषण का उपयोग करते हुए, छात्रों ने वाहन का विस्तार से अध्ययन किया और विभिन्न घटकों का उपयोग करके नवीन अवधारणाएँ तैयार कीं। इस अभ्यास ने उनकी तकनीकी समझ, रचनात्मकता और समस्या-समाधान कौशल को प्रदर्शित किया।
इस प्रदर्शनी में छात्रों की विविध कृतियों का संग्रह प्रदर्शित किया गया, जिनमें दृश्य डिजाइन रचनाएँ, रंग सिद्धांत पर आधारित प्रयोग, कहानी कहने वाले पैनल, लिनो प्रिंट और कलात्मक रेखाचित्र शामिल थे। परियोजनाओं में कलात्मक अभिव्यक्ति, वैचारिक स्पष्टता और विश्लेषणात्मक सोच का सशक्त मिश्रण झलकता था।
एक अन्य प्रमुख आकर्षण छात्रों की संवादात्मक प्रस्तुतियाँ थीं, जहाँ प्रतिभागियों ने संकाय सदस्यों और आगंतुकों को अपनी डिजाइन प्रक्रिया, प्रेरणा और क्रियान्वयन के बारे में समझाया। प्रदर्शित परियोजनाओं में दृश्य पदानुक्रम, कथात्मक डिजाइन, सांस्कृतिक व्याख्या और प्रयोगात्मक तकनीकों जैसे विषयों का अन्वेषण किया गया।
संकाय सदस्यों डॉ. शशांक थापा, अमोघ चौगुले और  प्रभा सुब्रमण्यम ने छात्रों की मौलिकता और नवोन्मेषी दृष्टिकोण की सराहना की। डॉ. शशांक थापा ने कहा कि ऐसी प्रदर्शनियाँ छात्रों को आत्मविश्वास बढ़ाने, संचार कौशल में सुधार करने और अनुभवात्मक शिक्षा के माध्यम से उद्योग का अनुभव प्राप्त करने में मदद करती हैं।

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