अनुसूचित जातियों के कल्याण के लिए संवेदनशीलता के साथ कार्य कर रही है सुक्खू सरकार – भारत केसरी टीवी

अनुसूचित जातियों के कल्याण के लिए संवेदनशीलता के साथ कार्य कर रही है सुक्खू सरकार

[MADAN SHARMA]

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11 साल बाद हुई राज्य स्तरीय सतर्कता एवं निगरानी समिति की बैठक

मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविंदर सिंह सुक्खू की अध्यक्षता में आज नागरिक अधिकार संरक्षण अधिनियम, 1995 तथा अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम, 1985 के तहत गठित राज्य स्तरीय सतर्कता एवं निगरानी समिति की बैठक आयोजित की गई। यह बैठक 11 वर्षों के अंतराल के बाद हुई, जिसमें विभिन्न विषयों पर विस्तार से चर्चा की गई तथा समिति के सदस्यों ने अपने सुझाव प्रस्तुत किए।

मुख्यमंत्री ने कहा कि ये दोनों अधिनियम कांग्रेस पार्टी की सामाजिक न्याय की भावना और संविधान निर्माता बाबा साहेब डॉ. भीमराव आंबेडकर की दूरदर्शिता का परिणाम हैं। राज्य में इन कानूनों को प्रभावी ढंग से लागू किया जा रहा है, जिससे समाज में सकारात्मक बदलाव आए हैं। उन्होंने बताया कि प्रशासनिक व्यवस्था को और सशक्त बनाने के लिए सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव को नोडल अधिकारी नियुक्त किया गया है।

मुख्यमंत्री सुक्खू ने कहा कि राष्ट्रपिता महात्मा गांधी ने समाज में समानता और सद्भाव स्थापित करने के लिए जीवनभर संघर्ष किया। उनकी इसी प्रेरणा से राज्य सरकार अनुसूचित जातियों के कल्याण के लिए संवेदनशीलता और प्रतिबद्धता के साथ कार्य कर रही है।

उन्होंने बताया कि हिमाचल प्रदेश में अब अस्पृश्यता की घटनाओं में काफी कमी आई है और ऐसे मामलों में सरकार सख्त कार्रवाई सुनिश्चित कर रही है। पिछले तीन वर्षों में लगभग 7.35 करोड़ रुपये की पुनर्वास सहायता 1,200 पीड़ितों को प्रदान की गई, वहीं 45,238 पीड़ितों को राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण के माध्यम से निःशुल्क कानूनी सहायता दी गई है।

सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्री डॉ. (कर्नल) धनी राम शांडिल ने कहा कि राज्य की लगभग 25.19 प्रतिशत जनसंख्या अनुसूचित जाति वर्ग से संबंधित है और राज्य सरकार उनके कल्याण के लिए संवेदनशीलता और करुणा के साथ कार्य कर रही है। उन्होंने बताया कि सरकारी नौकरियों में आरक्षण और विभिन्न सामाजिक योजनाओं के माध्यम से भाईचारे और सद्भावना को बढ़ावा दिया जा रहा है।

उन्होंने कहा कि भारतीय संविधान के अनुच्छेद 15, 16 और 17 के अंतर्गत अस्पृश्यता और जातिगत भेदभाव दंडनीय अपराध घोषित किए गए हैं तथा सभी नागरिकों को समान अधिकार प्रदान किए गए हैं। अधिनियम के उल्लंघन की स्थिति में अपराध की गंभीरता के आधार पर कठोर दंड और जुर्माने का प्रावधान किया गया है।

बैठक में युवा सेवाएं एवं खेल मंत्री यादवेंद्र गोमा, सातवें राज्य वित्त आयोग के अध्यक्ष नंद लाल, विधायक हंस राज, विनोद कुमार, सुरेश कुमार और मलेंद्र राजन, मुख्य सचिव संजय गुप्ता, डीजीपी अशोक तिवारी, अतिरिक्त मुख्य सचिव श्याम भगत नेगी, सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता निदेशक सुमित किमटा सहित समिति के सदस्य और वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।

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