ग्रीन एनर्जी में आगे बढ़ रहा हिमाचल: सुक्खू सरकार का 90% नवीकरणीय ऊर्जा का लक्ष्य – भारत केसरी टीवी

ग्रीन एनर्जी में आगे बढ़ रहा हिमाचल: सुक्खू सरकार का 90% नवीकरणीय ऊर्जा का लक्ष्य

[मदन शर्मा]

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हिमाचल ग्रीन एनर्जी में बन रहा अग्रणी राज्य – मुख्यमंत्री सुक्खू

• छोटे जलविद्युत परियोजनाओं के विकास पर फोकस

• सौर ऊर्जा और वैकल्पिक हरित ऊर्जा स्रोतों को बढ़ावा

हिमाचल प्रदेश में जलविद्युत और सौर ऊर्जा के क्षेत्र में अपार संभावनाएं हैं। इनका दोहन कर प्रदेश अपनी ऊर्जा आवश्यकताओं को पूरा करने के साथ-साथ अन्य राज्यों की जरूरतें भी पूरी कर सकता है और आत्मनिर्भरता, सतत विकास और पर्यावरण संरक्षण का उदाहरण बन सकता है।

प्रदेश की वार्षिक बिजली खपत लगभग 13,000 मिलियन यूनिट है। मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविंदर सिंह सुक्खू ने इस मांग का 90 प्रतिशत से अधिक हिस्सा नवीकरणीय ऊर्जा स्रोतों से पूरा करने का लक्ष्य रखा है। इसके लिए राज्य सरकार छोटे जलविद्युत, सौर ऊर्जा और अन्य गैर-पारंपरिक ऊर्जा परियोजनाओं को बढ़ावा दे रही है।

मुख्यमंत्री के निर्देशों पर पिछले वर्षों में पांच मेगावाट तक की क्षमता वाली छोटी जलविद्युत परियोजनाओं के विकास में तेजी लाई गई है। पिछले तीन वर्षों में 17.25 मेगावाट क्षमता की 7 परियोजनाएं शुरू हुईं, 23.80 मेगावाट की 12 परियोजनाएं पूरी हुईं और 47.90 मेगावाट की 18 परियोजनाएं स्वीकृति के लिए भेजी गई हैं।

इसके अलावा, 12.65 मेगावाट की 5 परियोजनाओं को तकनीकी स्वीकृति मिली है और 25.7 मेगावाट की 7 परियोजनाओं के लिए समझौते किए गए हैं। 75 मेगावाट की 76 नई परियोजनाओं के आवेदन भी प्रक्रिया में हैं।

मुख्यमंत्री ने हिमाचल को ग्रीन एनर्जी स्टेट बनाने का विजन रखा है। इसके तहत पिछले तीन वर्षों में कई सौर ऊर्जा परियोजनाएं विकसित की गई हैं। सरकार ने 501 मेगावाट क्षमता के पांच सोलर पार्क और 212 मेगावाट की अन्य सौर परियोजनाएं स्थापित करने का निर्णय लिया है। कांगड़ा के दमटाल में 200 मेगावाट का सोलर प्लांट स्थापित किया जाएगा।

पेखुबेला, भंजाल और अघलोर जैसे सोलर प्रोजेक्ट रिकॉर्ड समय में पूरे किए गए हैं।

हिमाचल प्रदेश पावर कॉर्पोरेशन लिमिटेड को 728.4 मेगावाट सौर परियोजनाएं आवंटित की गई हैं, जिनमें से 150.13 मेगावाट की 120 परियोजनाएं शुरू हो चुकी हैं।

पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए 250 किलोवाट से 5 मेगावाट तक की परियोजनाओं के लिए “पहले आओ, पहले पाओ” नीति अपनाई गई है। अब तक 547 निवेशकों को 595.97 मेगावाट परियोजनाएं आवंटित की गई हैं और 403.09 मेगावाट के लिए बिजली खरीद समझौते किए जा चुके हैं।

राज्य सरकार ने ग्रीन पंचायत कार्यक्रम शुरू किया है, जिसके तहत सभी पंचायतों में 500 किलोवाट के सोलर प्रोजेक्ट लगाए जा रहे हैं। इनसे होने वाली आय का 20 प्रतिशत हिस्सा अनाथों और विधवाओं की सहायता के लिए खर्च किया जाएगा।

जनजातीय क्षेत्रों में निर्बाध बिजली आपूर्ति के लिए चंबा के पांगी क्षेत्र में बैटरी एनर्जी स्टोरेज सिस्टम लगाए जा रहे हैं। लाहौल-स्पीति के दुर्गम गांवों में 148 घरों में सोलर ऑफ-ग्रिड सिस्टम लगाए गए हैं और काजा में 2 मेगावाट का सोलर प्लांट स्थापित किया गया है।

वैकल्पिक ऊर्जा को बढ़ावा देने के लिए ग्रीन हाइड्रोजन, कंप्रेस्ड बायोगैस और जियोथर्मल ऊर्जा परियोजनाओं पर भी काम किया जा रहा है। चंबा में पहला ग्रीन हाइड्रोजन मोबिलिटी स्टेशन और सोलन के नालागढ़ में 1 मेगावाट का ग्रीन हाइड्रोजन प्लांट स्थापित किया जा रहा है।

इसके अलावा, हमीरपुर के नेरी में देश का पहला राज्य समर्थित बायोचार प्लांट स्थापित करने की पहल की गई है।

 

 

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