धर्मशाला से ‘न्याय प्रबोध–अवेकनिंग टू जस्टिस’ अभियान का शुभारंभ, न्याय को आमजन तक पहुंचाने पर जोर – भारत केसरी टीवी

धर्मशाला से ‘न्याय प्रबोध–अवेकनिंग टू जस्टिस’ अभियान का शुभारंभ, न्याय को आमजन तक पहुंचाने पर जोर

[ मदन शर्मा]

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राज्यपाल और केंद्रीय विधि एवं न्याय राज्य मंत्री ने ‘न्याय प्रबोध– अवेकनिंग टू जस्टिस’ अभियान का शुभारंभ किया

न्याय, समानता और कानून का शासन भारतीय लोकतंत्र की आधारशिला : राज्यपाल

राज्यपाल Kavinder Gupta ने आज कांगड़ा जिले के धर्मशाला स्थित राजकीय महाविद्यालय में केंद्रीय न्याय विभाग द्वारा आयोजित क्षेत्रीय कार्यशाला एवं सुधार उत्सव के दौरान ‘न्याय प्रबोध– अवेकनिंग टू जस्टिस’ अभियान का शुभारंभ किया।

इस अवसर पर राज्यपाल ने कहा कि भारतीय लोकतंत्र न्याय, समानता और कानून के शासन के सिद्धांतों पर आधारित है। उन्होंने कहा कि संविधान केवल अधिकारों की गारंटी नहीं देता, बल्कि प्रत्येक नागरिक को गरिमा और न्याय तक समान पहुंच भी सुनिश्चित करता है।

उन्होंने कहा कि संविधान का अनुच्छेद 39(ए) राज्य को यह जिम्मेदारी सौंपता है कि आर्थिक या अन्य किसी कारण से कोई भी व्यक्ति न्याय से वंचित न रहे तथा जरूरतमंदों को निःशुल्क कानूनी सहायता उपलब्ध कराई जाए। न्याय केवल अदालतों से निर्णय प्राप्त करने तक सीमित नहीं है, बल्कि ऐसा समाज बनाने का माध्यम है जहां हर नागरिक स्वयं को सुरक्षित, सम्मानित और सशक्त महसूस करे।

राज्यपाल ने कहा कि हिमाचल प्रदेश के दूरदराज क्षेत्रों में न्याय तक पहुंच सुनिश्चित करना चुनौतीपूर्ण है, लेकिन तकनीक, डिजिटल सेवाओं, कानूनी जागरूकता कार्यक्रमों और स्थानीय सहायता तंत्र के माध्यम से न्याय को लोगों के करीब लाया जा रहा है।

उन्होंने DISHA, टेली-लॉ, न्याय बंधु और कानूनी जागरूकता अभियानों जैसी पहलों की सराहना करते हुए कहा कि इनसे कानूनी सेवाएं आम लोगों के लिए अधिक सुलभ हुई हैं। उन्होंने ‘न्याय प्रबोध– अवेकनिंग टू जस्टिस’ अभियान के शुभारंभ का स्वागत किया और कहा कि कानूनी जागरूकता, सभी के लिए न्याय सुनिश्चित करने की पहली सीढ़ी है। उन्होंने अधिवक्ताओं और विधि छात्रों से भी प्रो बोनो प्रतिज्ञा का समर्थन कर जरूरतमंद वर्गों को निःशुल्क कानूनी सहायता प्रदान करने का आह्वान किया।

राज्यपाल ने कहा कि न्यायिक ढांचे के सुदृढ़ीकरण, डिजिटलीकरण, ई-कोर्ट्स, वैकल्पिक विवाद निपटान प्रणाली और मजबूत कानूनी सहायता सेवाओं जैसी हालिया सुधारों से न्याय व्यवस्था अधिक पारदर्शी, प्रभावी और नागरिक हितैषी बनी है। उन्होंने युवाओं से संविधान को केवल एक शैक्षणिक विषय नहीं, बल्कि जीवन का मार्गदर्शक मानने का आग्रह किया।

केंद्रीय विधि एवं न्याय तथा संसदीय कार्य राज्य मंत्री Arjun Ram Meghwal ने कहा कि कार्यपालिका और न्यायपालिका दोनों अपनी शक्तियां संविधान से प्राप्त करती हैं और राष्ट्र सेवा में मिलकर कार्य करती हैं। उन्होंने कहा कि सरकार विशेष रूप से दूरदराज क्षेत्रों में न्याय तक पहुंच को बेहतर बनाने और न्यायिक प्रणाली को मजबूत करने के लिए प्रतिबद्ध है।

उन्होंने कहा कि कॉमन सर्विस सेंटर और टेली-लॉ जैसी सेवाओं ने भौगोलिक और आर्थिक बाधाओं का सामना कर रहे लोगों को विशेषज्ञ वकीलों से निःशुल्क कानूनी सलाह उपलब्ध कराई है, जिसका पूरा खर्च भारत सरकार वहन करती है।

इस अवसर पर न्याय विभाग ने DISHA कार्यक्रम के अंतर्गत औपचारिक रूप से ‘न्याय प्रबोध– अवेकनिंग टू जस्टिस’ अभियान का शुभारंभ किया। टेली-लॉ सेवा के लाभार्थियों ने भी अपने अनुभव साझा किए और इसके सकारात्मक प्रभावों पर प्रकाश डाला

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