खर्च का हिसाब मांगना क्रूरता नहीं: पत्नी से एक्सेल शीट बनवाने पर सुप्रीम कोर्ट की अहम टिप्पणी, FIR रद्द – भारत केसरी टीवी

खर्च का हिसाब मांगना क्रूरता नहीं: पत्नी से एक्सेल शीट बनवाने पर सुप्रीम कोर्ट की अहम टिप्पणी, FIR रद्द

[MADAN SHARMA]

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दिल्ली (भारत केसरी टीवी)।

सुप्रीम कोर्ट ने वैवाहिक विवादों को लेकर एक महत्वपूर्ण टिप्पणी करते हुए स्पष्ट किया है कि यदि पति पत्नी से घरेलू खर्चों का लेखा-जोखा रखने को कहता है—यहाँ तक कि एक्सेल शीट बनाने को भी—तो मात्र इस आधार पर इसे वैवाहिक क्रूरता नहीं माना जा सकता। इसी तर्क के साथ अदालत ने पत्नी द्वारा पति के खिलाफ दर्ज एफआईआर को रद्द कर दिया।

जस्टिस बी. वी. नागरत्ना और जस्टिस आर. महादेवन की पीठ ने कहा कि भारतीय समाज में अक्सर घर के वित्तीय मामलों को लेकर मतभेद होते हैं और कई बार पुरुष नियंत्रण रखने की कोशिश करते हैं, लेकिन केवल इस वजह से आपराधिक कार्रवाई शुरू करना उचित नहीं है। अदालत ने जोर देकर कहा कि आपराधिक कानून का इस्तेमाल निजी रंजिश या ‘स्कोर सेटल’ करने के साधन के रूप में नहीं होना चाहिए।

मामले में आरोप था कि पति ने पत्नी पर घर के खर्चों का पूरा रिकॉर्ड रखने का दबाव बनाया। पीठ ने माना कि यदि आरोपों को सत्य भी मान लिया जाए, तब भी इससे मानसिक या शारीरिक क्रूरता सिद्ध नहीं होती, खासकर जब उत्पीड़न या नुकसान का कोई ठोस सबूत पेश नहीं किया गया हो।

शीर्ष अदालत ने यह भी रेखांकित किया कि वैवाहिक मामलों में अदालतों को अत्यधिक सावधानी और व्यावहारिक समझ के साथ आगे बढ़ना चाहिए, क्योंकि कई शिकायतें दांपत्य जीवन की रोज़मर्रा की असहमति से जुड़ी होती हैं, जिन्हें आपराधिक क्रूरता की श्रेणी में नहीं रखा जा सकता।

पति की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता प्रभजीत जौहर की दलीलों को स्वीकार करते हुए कोर्ट ने कहा कि एफआईआर में लगाए गए आरोप सामान्य और अस्पष्ट हैं तथा किसी विशेष घटना या ठोस साक्ष्य का उल्लेख नहीं है। ऐसे मामलों में कानून के दुरुपयोग को रोकना आवश्यक है।

अंत में अदालत ने निष्कर्ष निकाला कि शिकायत में वर्णित बातें शादीशुदा जीवन की सामान्य खींचतान को दर्शाती हैं और इन पर आपराधिक मुकदमा चलाना न्यायोचित नहीं है।

 

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