किन्नौर के 42 स्थानों पर शुरू हुआ ‘खेत बचाओ अभियान-2026’, किसानों को मिलेंगी वैज्ञानिक खेती की जानकारी – भारत केसरी टीवी

किन्नौर के 42 स्थानों पर शुरू हुआ ‘खेत बचाओ अभियान-2026’, किसानों को मिलेंगी वैज्ञानिक खेती की जानकारी

[मदन शर्मा]

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किन्नौर के 42 स्थानों पर शुरू हुआ माहभर चलने वाला ‘खेत बचाओ अभियान’ डॉ. यशवंत सिंह परमार औद्यानिकी एवं वानिकी विश्वविद्यालय, नौणी के अधीन कार्यरत कृषि विज्ञान केंद्र (केवीके), किन्नौर ने हिमालयी पारिस्थितिकी तंत्र में सतत एवं जलवायु-अनुकूल कृषि को बढ़ावा देने के उद्देश्य से जिले भर में एक माह तक चलने वाले जागरूकता अभियान ‘खेत बचाओ अभियान-2026’ का शुभारंभ किया। यह अभियान भारत सरकार के कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय तथा भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (आईसीएआर) के सहयोग से देशव्यापी स्तर पर संचालित किया जा रहा है।

अभियान का औपचारिक शुभारंभ पूह विकास खंड के उच्च हिमालयी गांवों नाको और स्पीलो से किया गया। यह पहल दूर-दराज के किसानों तक वैज्ञानिक एवं सतत कृषि तकनीकों को पहुंचाने की प्रतिबद्धता को दर्शाती है।

इस अभियान के लिए केवीके किन्नौर के प्रभारी एवं सह-निदेशक (अनुसंधान) डॉ. प्रमोद शर्मा ने उपनिदेशक उद्यान डॉ. शमशेर सिंह तथा आत्मा परियोजना निदेशक डॉ. रमेश लाल के साथ मिलकर दो बहु-विषयक टीमों का गठन किया है। इन टीमों में केवीके के वैज्ञानिक पादप रोग विशेषज्ञ डॉ. डी.पी. भंडारी, फल वैज्ञानिक डॉ. अरुण कुमार, कीट वैज्ञानिक डॉ. बुधि राम एवं फल वैज्ञानिक डॉ. दीपिका के साथ-साथ उद्यान एवं कृषि विभाग की आत्मा परियोजना के अधिकारी शामिल हैं।

डॉ. शर्मा ने बताया कि यह अभियान किन्नौर जिले के तीनों विकास खंडों के 42 स्थानों को कवर करेगा। प्रशिक्षण कार्यक्रमों, किसान-वैज्ञानिक संवाद, क्षेत्रीय प्रदर्शनों और जागरूकता गतिविधियों के माध्यम से किसानों तक वैज्ञानिक कृषि सिफारिशें पहुंचाई जाएंगी तथा उन्हें सतत कृषि पद्धतियों को अपनाने के लिए प्रेरित किया जाएगा।

अभियान के प्रथम चरण के अंतर्गत नाको और स्पीलो गांवों में जागरूकता कार्यक्रम, समूह चर्चाएं और क्षेत्रीय प्रदर्शन आयोजित किए गए। किसानों को रासायनिक उर्वरकों के अंधाधुंध उपयोग के दुष्प्रभावों तथा मृदा परीक्षण आधारित पोषक तत्व प्रबंधन के महत्व के बारे में जानकारी दी गई। वैज्ञानिकों ने प्राकृतिक खेती, समेकित पोषक तत्व प्रबंधन तथा पर्यावरण-अनुकूल कृषि तकनीकों के लाभों पर प्रकाश डाला, जो मृदा स्वास्थ्य संरक्षण, उत्पादकता वृद्धि और कृषि आय में सुधार के लिए महत्वपूर्ण हैं।

विश्वविद्यालय के विस्तार शिक्षा निदेशक डॉ. डी.पी. शर्मा ने कहा कि यह अभियान वैज्ञानिक ज्ञान, पर्यावरण संरक्षण और किसान कल्याण को एक साथ जोड़ते हुए सतत पर्वतीय कृषि को बढ़ावा देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। उन्होंने बताया कि विश्वविद्यालय के कृषि विज्ञान केंद्रों—सोलन, शिमला, चंबा और स्पीति में भी ‘खेत बचाओ अभियान-2026’ के तहत इसी प्रकार के माहभर चलने वाले जागरूकता एवं विस्तार कार्यक्रम प्रारंभ किए गए हैं।

यह अभियान किसानों में सतत कृषि पद्धतियों के प्रति जागरूकता बढ़ाने के साथ-साथ दीर्घकालिक मृदा स्वास्थ्य, पर्यावरणीय स्थिरता तथा हिमालयी क्षेत्र में आजीविका सुरक्षा को मजबूत करने में महत्वपूर्ण योगदान देगा।

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