भविष्य में उत्तराखंड और पूर्वोत्तर राज्यों में बढ़ सकती हैं बादल फटने की घटनाएं : सुक्खू – भारत केसरी टीवी

भविष्य में उत्तराखंड और पूर्वोत्तर राज्यों में बढ़ सकती हैं बादल फटने की घटनाएं : सुक्खू

[मदन शर्मा]

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आने वाले वर्षों में उत्तराखंड और पूर्वोत्तर राज्यों में बढ़ सकती हैं बादल फटने की घटनाएं : मुख्यमंत्री

मुख्यमंत्री ने टिकेंद्र पंवार की पुस्तक का किया विमोचन

मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविंदर सिंह सुक्खू ने मंगलवार शाम गेयटी थिएटर, शिमला में नगर निगम शिमला के पूर्व उपमहापौर टिकेंद्र पंवार द्वारा संपादित पुस्तक ‘सिटी लिमिट्स – द क्राइसिस ऑफ अर्बनाइजेशन’ का विमोचन किया।

इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रकृति ने हिमाचल प्रदेश को स्वच्छ हवा और पानी जैसी अमूल्य धरोहरें दी हैं और इन्हें संरक्षित रखना प्रत्येक नागरिक की सामूहिक जिम्मेदारी है। उन्होंने कहा कि राज्य की राजधानी और सबसे बड़े शहर शिमला में वर्षों के दौरान तेजी से बदलाव आया है। “मैंने अपने बचपन से शिमला को बदलते देखा है। जहां पहले जंगल हुआ करते थे, वहां अब भवन बन गए हैं। यहां ऊर्ध्वाधर निर्माण (वर्टिकल कंस्ट्रक्शन) की आवश्यकता है,” उन्होंने कहा।

मुख्यमंत्री ने बताया कि शिमला शहर की सुंदरता बढ़ाने और बिजली व अन्य तारों को भूमिगत करने के लिए 145 करोड़ रुपये की लागत से अंडरग्राउंड डक्ट प्रणाली बनाई जा रही है। उन्होंने कहा कि वर्तमान सब्जी मंडी क्षेत्र में 600 करोड़ रुपये की लागत से आधुनिक परिसर विकसित किया जा रहा है। लिफ्ट क्षेत्र के पास अंडरपास बनाने का भी प्रस्ताव है।

उन्होंने कहा कि शिमला शहर में 24 घंटे पेयजल उपलब्ध करवाने के लिए 800 करोड़ रुपये की जलापूर्ति योजना पर कार्य चल रहा है। इसके अतिरिक्त सर्कुलर रोड को चौड़ा करने के लिए भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया जारी है तथा शहर की सुंदरता बनाए रखने के लिए ग्रीन एरिया बढ़ाने के प्रयास किए जा रहे हैं।

मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार सतत विकास को प्राथमिकता देते हुए राजधानी के सौंदर्यीकरण और पर्यावरण संतुलन बनाए रखने के लिए कई परियोजनाओं पर कार्य कर रही है। उन्होंने कहा कि हिम-चंडीगढ़, हिम-पंचकूला और कांगड़ा में एयरो सिटी जैसी नई टाउनशिप विकसित करने की योजना बनाई जा रही है। पर्यटन से जुड़ा बुनियादी ढांचा भी मजबूत किया जा रहा है।

सतत विकास पर जोर देते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि पिछले तीन वर्षों में हिमाचल प्रदेश ने दो बड़ी प्राकृतिक आपदाओं का सामना किया है, जिससे राज्य को भारी नुकसान हुआ। उन्होंने कहा कि अब बादल फटने की घटनाओं का वैज्ञानिक अध्ययन किया जा रहा है, क्योंकि ये घटनाएं केवल ऊंचाई वाले क्षेत्रों तक सीमित नहीं रहीं, बल्कि निचले इलाकों में भी हो रही हैं। उन्होंने सिराज विधानसभा क्षेत्र के कुछ हिस्सों में हुई घटनाओं का उदाहरण दिया।

मुख्यमंत्री ने कहा, “केंद्रीय गृह मंत्री के साथ बैठक के दौरान मैंने कहा था कि भविष्य में बादल फटने की घटनाएं केवल हिमाचल प्रदेश तक सीमित नहीं रहेंगी। उत्तराखंड और पूर्वोत्तर राज्यों में भी ऐसी घटनाओं में वृद्धि होने की संभावना है।” उन्होंने दोहराया कि राज्य सरकार प्राकृतिक पर्यावरण, संस्कृति और सामाजिक संतुलन को सुरक्षित रखते हुए हिमाचल प्रदेश को विकास के पथ पर आगे बढ़ाने के लिए प्रतिबद्ध है।

झारखंड उच्च न्यायालय के पूर्व मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति तरलोक सिंह चौहान ने इस अवसर पर कहा कि दूसरों को दोष देने से पहले लोगों को अपने आचरण में सुधार लाने की आवश्यकता है। पर्यटन से जुड़ी समस्याओं का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि केवल पर्यटकों पर प्रतिबंध लगाने से समाधान नहीं होगा, बल्कि नागरिकों को भी जिम्मेदारी निभानी होगी। उन्होंने कहा कि कई लोग पार्किंग सुविधा न होने के बावजूद कई वाहन खरीद रहे हैं।

उन्होंने कहा कि स्कूल समय के दौरान ट्रैफिक जाम का मुख्य कारण पर्यटकों के वाहन नहीं, बल्कि हिमाचल में पंजीकृत वाहन होते हैं। “हमें आत्ममंथन करने की आवश्यकता है,” उन्होंने कहा।

न्यायमूर्ति चौहान ने कहा, “राज्य को पूर्ण संस्थागत जवाबदेही की आवश्यकता है। शहरीकरण केवल जनसंख्या परिवर्तन नहीं, बल्कि पूरे समाज के पुनर्गठन की प्रक्रिया है। लाखों लोग सार्वजनिक जीवन में प्रवेश कर रहे हैं, साझा संसाधनों का उपयोग कर रहे हैं और शहरी निकायों तथा नियोजन व्यवस्था पर निर्भर हैं। लेकिन हमारी संस्थाएं इस परिवर्तन की गति के अनुरूप नहीं चल पा रही हैं। इस संस्थागत विफलता की सबसे बड़ी कीमत हमेशा समाज के कमजोर वर्गों को चुकानी पड़ती है।”

इस अवसर पर नगर निगम शिमला के महापौर सुरेंद्र चौहान, मुख्यमंत्री के प्रधान मीडिया सलाहकार नरेश चौहान, शिक्षा सचिव राकेश कंवर, महानिदेशक होमगार्ड सतवंत अटवाल, पूर्व उपमहापौर टिकेंद्र पंवार, ट्रिब्यून की ब्यूरो प्रमुख प्रतिभा चौहान सहित अन्य गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहे।

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