नौणी विश्वविद्यालय में नई नियुक्तियां: डॉ. भारद्वाज बने डीएसडब्ल्यू, डॉ. सतीश शर्मा लाइब्रेरियन – भारत केसरी टीवी

नौणी विश्वविद्यालय में नई नियुक्तियां: डॉ. भारद्वाज बने डीएसडब्ल्यू, डॉ. सतीश शर्मा लाइब्रेरियन

[मदन शर्मा]

Advertisement

 

Advertisement

नौणी विश्वविद्यालय को मिले नए डीएसडब्ल्यूलाइब्रेरियन और विभागाध्यक्ष प्लांट पैथोलॉजी

डॉ. डी.आर. भारद्वाज ने डॉ. यशवंत सिंह परमार औद्यानिकी एवं वानिकी विश्वविद्यालय, नौणी में डीन छात्र कल्याण (डीएसडब्ल्यू) का कार्यभार संभाल लिया है। डॉ. भारद्वाज के पास शिक्षण, अनुसंधान, प्रशासन एवं प्रसार कार्यों का 37 वर्षों से अधिक का अनुभव है।

सिल्वीकल्चर एवं एग्रोफॉरेस्ट्री के विशेषज्ञ डॉ. भारद्वाज इससे पहले सिल्वीकल्चर एवं एग्रोफॉरेस्ट्री विभाग के प्रोफेसर एवं विभागाध्यक्ष तथा विश्वविद्यालय लाइब्रेरियन के रूप में भी सेवाएं दे चुके हैं। उन्होंने पुस्तकालय सेवाओं के डिजिटलीकरण को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण कार्य किए। उन्होंने 59 स्नातकोत्तर विद्यार्थियों का मार्गदर्शन किया है तथा हिमाचल प्रदेश की कृषि-जलवायु परिस्थितियों के अनुरूप हिमालयी एग्रोफॉरेस्ट्री एवं बांस आधारित प्रणालियों पर केंद्रित 19 बाह्य वित्तपोषित परियोजनाओं का सफल संचालन किया है। डॉ. भारद्वाज भारत के सर्वोच्च न्यायालय द्वारा गठित वी.पी. मोहन समिति में सिल्वीकल्चरल फेलिंग से संबंधित सदस्य भी रह चुके हैं तथा राष्ट्रीय बांस मिशन, हिमाचल प्रदेश के कार्यकारी सदस्य के रूप में भी सेवाएं दे चुके हैं।

डॉ. सतीश शर्मा ने विश्वविद्यालय लाइब्रेरियन के रूप में कार्यभार संभाला है। इससे पहले वे प्लांट पैथोलॉजी विभाग के विभागाध्यक्ष के पद पर कार्यरत थे। पीएयू लुधियाना एवं आईसीएआर-आईएआरआई सहित विभिन्न संस्थानों में शिक्षण, अनुसंधान एवं प्रसार कार्यों का 30 वर्षों से अधिक का अनुभव रखने वाले डॉ. शर्मा फलों की रोग विज्ञान के विशेषज्ञ हैं। वे विशेष रूप से सेब की बीमारियों एवं अनार में बैक्टीरियल ब्लाइट रोग के निदान एवं प्रबंधन के लिए जाने जाते हैं। उनके मार्गदर्शन में 15 से अधिक विद्यार्थियों ने स्नातकोत्तर शिक्षा पूरी की है। लाइब्रेरियन के रूप में उनकी प्राथमिकताओं में पुस्तकालय प्रणाली का आधुनिकीकरण एवं डिजिटलीकरण, विद्यार्थियों की सहभागिता बढ़ाना तथा ई-बुक्स एवं अन्य संसाधनों की उपलब्धता को मजबूत करना शामिल है।

इसके अतिरिक्त, डॉ. अनिल हांडा ने प्लांट पैथोलॉजी विभागाध्यक्ष का कार्यभार संभाल लिया है। आणविक पादप विषाणु विज्ञान के विशेषज्ञ डॉ. हांडा के पास शिक्षण, अनुसंधान एवं प्रसार कार्यों का लगभग 30 वर्षों का अनुभव है। वे चेक गणराज्य की मेंडल यूनिवर्सिटी तथा यूनाइटेड किंगडम की यूनिवर्सिटी ऑफ वारविक में विजिटिंग प्रोफेसर के रूप में सेवाएं दे चुके हैं। डॉ. हांडा ने यूके सरकार, विश्व बैंक, डीआरडीओ, डीबीटी, डीएसटी एवं आईसीएआर जैसी संस्थाओं द्वारा वित्तपोषित 25 से अधिक अनुसंधान परियोजनाओं का संचालन किया है।

विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. राजेश्वर सिंह चंदेल ने तीनों वैज्ञानिकों को नई जिम्मेदारियों के लिए बधाई दी तथा विश्वास व्यक्त किया कि उनका अनुभव विश्वविद्यालय की शैक्षणिक, अनुसंधान एवं छात्र कल्याण गतिविधियों को और सशक्त बनाएगा।

व्हाट्सप्प आइकान को दबा कर इस खबर को शेयर जरूर करें

विज्ञापन बॉक्स (विज्ञापन देने के लिए संपर्क करें)


स्वतंत्र और सच्ची पत्रकारिता के लिए ज़रूरी है कि वो कॉरपोरेट और राजनैतिक नियंत्रण से मुक्त हो। ऐसा तभी संभव है जब जनता आगे आए और सहयोग करे
Donate Now
               
हमारे  नए ऐप से अपने फोन पर पाएं रियल टाइम अलर्ट , और सभी खबरें डाउनलोड करें
डाउनलोड करें

जवाब जरूर दे 

2027 में कौन होगा हिमाचल का मुख्य मंत्री

View Results

Loading ... Loading ...


Related Articles

Close
Facebook Instagram Twitter Youtube Whatsapp
Website Design By Mytesta.com +91 8809666000