रोजगार आंकड़ों की सटीकता के लिए PLFS पर दो दिवसीय राज्य स्तरीय कार्यशाला – भारत केसरी टीवी

रोजगार आंकड़ों की सटीकता के लिए PLFS पर दो दिवसीय राज्य स्तरीय कार्यशाला

[MADAN SHARMA]

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आवधिक श्रम बल सर्वेक्षण (PLFS) पर राज्य स्तरीय कार्यशाला का आयोजन

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हिमाचल प्रदेश सरकार के अर्थशास्त्र एवं सांख्यिकी विभाग द्वारा 12 मार्च 2026 को शिमला में आवधिक श्रम बल सर्वेक्षण (Periodic Labour Force Survey – PLFS) पर फील्ड अधिकारियों के लिए दो दिवसीय राज्य स्तरीय कार्यशाला का आयोजन किया गया।

इस कार्यशाला का उद्देश्य प्रदेश में आवधिक श्रम बल सर्वेक्षण के क्रियान्वयन को मजबूत करना और जिला स्तर पर श्रम बाजार से जुड़े प्रमुख संकेतकों जैसे वर्कर पॉपुलेशन रेशियो (WPR), लेबर फोर्स पार्टिसिपेशन रेट (LFPR) और बेरोजगारी दर (UR) के वार्षिक और त्रैमासिक अनुमान तैयार करना है। इन आंकड़ों को राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय (NSO) और राज्य के अर्थशास्त्र एवं सांख्यिकी विभाग द्वारा एकत्रित नमूनों को मिलाकर तैयार किया जाएगा।

गौरतलब है कि आवधिक श्रम बल सर्वेक्षण अप्रैल 2017 में शुरू किया गया था, जो देश में रोजगार और बेरोजगारी से संबंधित आंकड़े तैयार करने का प्रमुख राष्ट्रीय सर्वेक्षण है। यह सर्वेक्षण श्रम भागीदारी, रोजगार संरचना, बेरोजगारी स्तर और अन्य श्रम बाजार संकेतकों से जुड़े आंकड़े उपलब्ध कराता है, जो विकास कार्यक्रमों की योजना, नीति निर्माण और निगरानी के लिए महत्वपूर्ण होते हैं।

सर्वेक्षण कार्यक्रम के तहत राज्य के लगभग 180 ग्रामीण ब्लॉकों और 120 शहरी ब्लॉकों से आंकड़े एकत्रित किए जाएंगे। इसके साथ ही केंद्र सरकार के नमूने के तहत भी लगभग इतने ही ब्लॉकों से जानकारी ली जाएगी। फील्ड अन्वेषकों के लिए प्रशिक्षण सत्र अर्थशास्त्र एवं सांख्यिकी निदेशालय के अधिकारियों द्वारा आयोजित किए गए।

कार्यशाला का उद्घाटन आर्थिक सलाहकार डॉ. विनोद राणा ने किया। उन्होंने कहा कि साक्ष्य आधारित शासन और प्रभावी विकास योजना के लिए सांख्यिकी की महत्वपूर्ण भूमिका होती है। उन्होंने जोर दिया कि श्रम बाजार से जुड़े विश्वसनीय संकेतक तैयार करने के लिए सटीक और भरोसेमंद आंकड़ों का संग्रह बेहद आवश्यक है।

उन्होंने फील्ड अन्वेषकों को सर्वेक्षण के दौरान सही फील्ड तकनीकों, सावधानीपूर्वक डेटा संग्रह और कंप्यूटर असिस्टेड पर्सनल इंटरव्यूइंग (CAPI) तकनीक के उपयोग पर विशेष ध्यान देने का आग्रह किया, ताकि सर्वेक्षण के परिणाम समय पर और प्रभावी तरीके से संकलित किए जा सकें।

डॉ. विनोद राणा ने प्रदेश के लोगों और जनप्रतिनिधियों से अपील की कि जब सर्वेक्षण अधिकारी उनके घरों पर जानकारी लेने आएं तो उन्हें पूरा सहयोग दें और सही व प्रमाणिक जानकारी उपलब्ध कराएं। उन्होंने कहा कि विश्वसनीय आंकड़े रोजगार सृजन और राज्य के समग्र सामाजिक-आर्थिक विकास के लिए प्रभावी नीतियां बनाने में सहायक होंगे।

 

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