विधवाओं की बेटियों को उच्च शिक्षा में सहारा, सुख शिक्षा योजना का दायरा बढ़ा – भारत केसरी टीवी

विधवाओं की बेटियों को उच्च शिक्षा में सहारा, सुख शिक्षा योजना का दायरा बढ़ा

[MADAN SHARMA]

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प्रदेश सरकार की ‘व्यवस्था परिवर्तन’ पहल के अंतर्गत सामाजिक कल्याण को सशक्त बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए ‘इंदिरा गांधी सुख शिक्षा योजना’ का दायरा बढ़ा दिया गया है। अब इस योजना के तहत विधवाओं की बेटियों को राज्य के भीतर और बाहर उच्च शिक्षा प्राप्त करने के लिए आर्थिक सहायता प्रदान की जाएगी।

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यह योजना पहले से ही विधवा, निराश्रित या तलाकशुदा महिलाओं तथा दिव्यांग अभिभावकों के बच्चों को शिक्षा, स्वास्थ्य और पोषण के क्षेत्र में व्यापक सहयोग प्रदान करती रही है। संशोधित प्रावधानों के अनुसार अब पात्र बेटियों को 27 वर्ष की आयु तक उच्च शिक्षा हेतु लाभ मिलेगा।

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संशोधित प्रावधानों के तहत राज्य से बाहर सरकारी संस्थानों में व्यावसायिक पाठ्यक्रमों में अध्ययनरत लाभार्थियों को, यदि सरकारी छात्रावास सुविधा उपलब्ध नहीं है, तो किराया या पीजी आवास व्यय हेतु 10 माह तक प्रतिमाह 3000 रुपये की वित्तीय सहायता दी जाएगी।

विस्तारित योजना के अंतर्गत इंजीनियरिंग एवं प्रौद्योगिकी, व्यवसाय एवं प्रबंधन, चिकित्सा एवं संबद्ध स्वास्थ्य विज्ञान, विधि, कंप्यूटर एप्लीकेशन एवं आईटी प्रमाणपत्र, शिक्षा एवं मानविकी, राज्य व्यावसायिक प्रशिक्षण परिषद (SCVT) के कार्यक्रम, क्राफ्ट्समैन ट्रेनिंग स्कीम तथा सेंट्रल इंस्टीट्यूट ऑफ पेट्रोकेमिकल्स इंजीनियरिंग एंड टेक्नोलॉजी (CIPET) के पाठ्यक्रम शामिल किए गए हैं।

वर्तमान में यह योजना पात्र महिलाओं और दिव्यांग अभिभावकों के 18 वर्ष तक के बच्चों को मासिक वित्तीय सहायता प्रदान करती है, साथ ही राज्य के भीतर सरकारी संस्थानों में पढ़ने वाले विद्यार्थियों की ट्यूशन फीस, छात्रावास शुल्क एवं अन्य शैक्षणिक व्यय भी वहन करती है।

इस समय 18 से 27 वर्ष आयु वर्ग की 504 बालिकाएं इस योजना का लाभ उठा रही हैं, जिनमें से लगभग 20 प्रतिशत के विस्तारित प्रावधानों के तहत व्यावसायिक पाठ्यक्रम अपनाने की संभावना है। अनुमानित मांग को ध्यान में रखते हुए लगभग एक करोड़ रुपये का अतिरिक्त वार्षिक बजट प्रावधान किया जाएगा।

चालू वित्त वर्ष के लिए ‘इंदिरा गांधी सुख शिक्षा योजना’ के अंतर्गत 31.01 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है, जिसमें से 3 फरवरी 2026 तक 22.96 करोड़ रुपये व्यय किए जा चुके हैं।

मुख्यमंत्री Thakur Sukhvinder Singh Sukhu ने समाज के कमजोर वर्गों के उत्थान के प्रति सरकार की प्रतिबद्धता दोहराते हुए कहा कि इस योजना का मुख्य उद्देश्य लाभार्थियों को निरंतर आर्थिक एवं लॉजिस्टिक सहयोग देकर उन्हें आत्मनिर्भर बनाना है।

उन्होंने कहा कि यह पहल सामाजिक-आर्थिक रूप से वंचित बच्चों को समान शैक्षिक अवसर उपलब्ध कराने और उन्हें वित्तीय बाधाओं से मुक्त होकर अपने शैक्षणिक सपनों को साकार करने में सक्षम बनाने की दिशा में एक ठोस कदम है।

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