विपक्ष ने ‘जनसंकल्प’ को जश्न बताया; CM बोले—रैली में आपदा राहत का पैसा नहीं लगेगा – भारत केसरी टीवी

विपक्ष ने ‘जनसंकल्प’ को जश्न बताया; CM बोले—रैली में आपदा राहत का पैसा नहीं लगेगा

[MADAN SHARMA]

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धर्मशाला के तपोवन विधानसभा के शीत सत्र के पांचवें दिन भी 27 दिंसबर के सत्र में शुरू हुई नियम-130 के तहत आपदा पर चर्चा मंगलवार को भी जारी रही। आपदा में चर्चा के दौरान मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविंदर सिंह सुक्खू व जयराम ठाकुर में तीखी नोक-झोंक हुई। सीएम के नेता विपक्ष की चर्चा का जवाब देने के बाद जयराम ठाकुर को विधानसभा अध्यक्ष की ओर से दोबारा बोलने का समय न दिए जाने पर वह सदन से बाहर तक निकल गए। मुख्यमंत्री सुक्खू ने सदन में कहा कि पूर्व मुख्यमंत्री की ओर से जन संकल्प कार्यक्रम को जश्न का नाम दिया जा रहा है।

सीएम ने कहा कि जन संकल्प रैली में आपदा की बजाय राज्य सरकार की ओर से ही सारी राशि खर्च की जाएगी। सीएम ने कहा कि सराज में सबसे पहले हेलिकॉप्टर वही पहुंचे थे और अनाज भी वितरित करके आए थे। नेता विपक्ष बाद में पहुंचे थे। सीएम ने कहा कि सराज में हुई भयानक आपदा में राहत के लिए तुरंत प्रभाव से 50 के करीब पोकलेन भी लगाई गई, जबकि भाजपा ने अपने-अपने लोगों को राहत बांटी। केंद्र से प्रधानमंत्री आवास योजना में मात्र एक लाख 30 घर बनाने को आता है, जबकि राज्य में आपदा पर आठ लाख दिया जा रहा है।

जयराम बोले, आपदा प्रभावितों को बसाने के लिए कोई काम नहीं

नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर ने सदन में बात रखते हुए सत्तापक्ष पर तीखे प्रहार किए। उन्होंने कहा कि आपदा में प्रभावित लोगों को पुन: बसाने को सुचारू रूप से कोई काम नहीं हो पा रहा है। पूर्व सीएम ने कहा कि मंडी जिला में पूरी तरह से क्षतिग्रस्त घरों को सात लाख राशि देने की बात कही है। उन्होंने कहा कि आपदा प्रभावित लोगों को मदद देने के समय नेता विपक्ष व संबंधित क्षेत्रों के विधायकों को बुलाया ही नहीं गया, जबकि उसमें मात्र पीएम मोदी व पूर्व सीएम जयराम के खिलाफ ही भाषण दिया गया। पीएम पहली बार आपदा होने पर राज्य में आए थे, और 1500 करोड़ निश्चित रूप से लोगों को मिलेगा। उन्होंने कहा कि सराज में 22 दिन पैदल चलकर गए, जबकि राज्य के अन्य हिस्सों में आपदा आने पर भी गए, जबकि सीएम कई आपदाग्रस्त क्षेत्रों में पहुंच ही नहीं पाए। जयराम ठाकुर ने कहा कि डिजाजस्टर एक्ट लगाकर चुनाव टाले जा रहे हैं, जबकि तीन साल का जश्न किए जाने की तैयारी की जा रही है। उन्होंने कहा कि जश्न को सफल बनाने के लिए आपदा के पैसे को खर्च किए जाने की बात कही जा रही है।

सीएम बोले, एचआरटीसी में भी किया जा रहा युक्तिकरण

धर्मशाला — शीतकालीन सत्र के दौरान सीएम सुखविंदर सिंह सुक्खू ने कहा कि पूरे एचआरटीसी में रेशलाइजेशन यानी युक्तिकरण की जरूरत है। सरकार की ओर से हर वर्ष 780 करोड़ रुपए कॉरपोरेशन को जनता के कल्याण में रूट चलाने के लिए जारी किए जाते हैं। उन्होंने कहा कि निगम में पेंशनर्ज व अन्य मसलों पर भी लगातार शिकायत आ रही है। ऐसे में अब कुछ क्षेत्रों में निजी बसें भी चलाई जाएंगी। इसमें 480 रूटों को लेकर काम किया जा रहा है। इससे पहले अर्की के विधायक संजय अवस्थी ने कंधर-बग्गा से दिल्ली के लिए 15 वर्षों से चल रही बस सेवा को बंद करने को पुन: बहाल करने की बात रखी। इस पर शिक्षा मंत्री रोहित ठाकुर ने कहा कि अब यह बस सेवा चंडीगढ़ तक सेवा दे रही है। उन्होंने कहा कि अधिकतर रूट वेलफेयर स्टेट के तहत रूट चलाए जा रहे हैं। उन्होंने बताया कि एचआरटीसी में 2200 करोड़ घाटा है, जबकि 1300 करोड़ की देनदारी भी लंबित है। नाचन के विधायक विनोद कुमार ने बसों की संख्या और उनके बार-बार खराब होने से संबंधित सवाल पूछा। इस पर शिक्षा मंत्री रोहित ठाकुर ने कहा कि कहीं बसें अधिक व कहीं कम हैं।

200 रुपए में सालभर का कार्ड

सीएम सुक्खू ने कहा कि कई स्थानों में जरूरत से अधिक बसें चल रही थीं, उन्हें ही बंद किया गया है। उन्होंने बताया कि सरकारी बसों में छात्रों को नि:शुल्क सुविधा है। निगम की बसों के लिए 200 रुपए में वर्ष भर के लिए कार्ड बनाया जा रहा है। विधायक त्रिलोक जम्वाल ने कहा कि जाहू कंदरौर बस सेवा बंद की गई है, जिसमें स्कूल व कॉलेज के छात्र आवाजाही करते हैं। शिक्षा मंत्री ने कहा कि इस रूट पर अल्टरनेट बस की सुविधा प्रदान की गई है।

प्रदेश सरकार ने करुणामूलक आय सीमा बढ़ाई

धर्मशाला — सदन में मुख्यमंत्री सुक्खू ने कहा कि वर्ष 2019 में करुणामूलक आधार पर मात्र चतुर्थ श्रेणी को ही रखा जाता था। इसमें अब क्लास थ्री को भी शामिल किया गया है। साथ ही अब आय सीमा को बढ़ाया गया है, जोकि अढ़ाई लाख से तीन लाख की गई है। सीएम ने बताया कि अब विभिन्न विभागों में पदों को सर्जित कर जल्दी भरा जाएगा। मुख्यमंत्री सुक्खू ने बताया कि पॉलिसी में लगातार बदलाव हुए हैं। उन्होंने कहा कि 1988 का कोई मामला है, तो अगर वह ओवरएज हो गया होगा तो उसमें अध्ययन किया जाएगा। सदन में एक सवाल का जबाव पर बोलते हुए सीएम ने कहा कि डेली वेजिज कर्मियों को भी अब करुणामूल्क किए जाने पर विचार रखते हैं। सीएम ने कहा कि हमें उनकी चिंता है, जिनकी आयु अधिक हो गई है, हालांकि उन्हें नियमों के तहत पेंशन भी प्रदान की जाती है। इसमें केस के आधार पर अहम फैसले किए जाते हैं। इसमें आय बढ़ाने के बाद विधवा व अनाथ बच्चों को आवेदन करने की सुविधा प्रदान की गई है। सीएम ने कहा कि पूर्व सरकार की ओर से कुछ नहीं किया गया है। इससे पहले करसोग के विधायक दीप राज द्वारा करुणामूल्क नियुक्तियों संबंधी प्रश्न के जवाब में सीएम सुखविंदर सिंह सुक्खू सदन में बोल रहे थे।

प्रदेश सरकार के प्रयास सराहे

आशीष बुटेल ने करुणामूलक आश्रितों के मामले में हुए सुधारों को सराहा और कहा कि पुराने लंबित मामलों को दोबारा आवेदन का मौका मिल पाएगा या नहीं। नयनादेवी के विधायक रणधीर शर्मा ने भी आवेदनों के रिजेक्ट होने पर बात उठाई है। पांवटा साहिब के विधायक ने कहा कि तीन लाख इनकम परिवार या व्यक्ति की रही है। नेता विपक्ष जयराम ठाकुर ने कहा कि पूर्व सरकार में सबसे अधिक करुणामूलक को नौकरियां दी गई थी।

व्हाइट फ्लावर हॉल केस में प्रदेश को मिलेंगे 300 करोड़

धर्मशाला — सदन में सीएम सुखविंदर सिंह सुक्खू ने कहा कि व्हाइट फ्लावर हॉल शिमला के केस जीतकर 300 करोड़ हिमाचल को मिलने वाला है। इसके अलावा जेएसडब्ल्यू के मामले में भी 150 करोड़ लाभ होना तय है। उन्होंने बताया कि हिमाचल के हितों के सभी मुद्दों को सुप्रीम कोर्ट में उठाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि सभी मामलों की फीस का ब्यौरा भी सदन में रख दिया जाएगा। इस पर नेता विपक्ष जयराम ठाकुर ने कहा कि ओबराय केस पहले से चल रहा था। उन्होंने संसदीय सचिव को लेकर भी खर्चे की बात पूछ। इससे पहले विधायक विपिन सिंह परमार की ओर से अधिवक्ताओं की नियुक्ति को लेकर पूछे गए सवाल पर सीएम ने सदन में सूचना रखी। सीएम ने इसका जबाव देते हुए उन्हें दिए जा रहे वेतन की सूचना भी सदन में रखी है।

अब पांच साल होगा मेयर-डिप्टी मेयर का कार्यकाल

धर्मशाला — शीतकालीन सत्र में मेयर और डिप्टी मेयर का कार्यकाल बढ़ाने से जुड़े नगर निगम संशोधन विधेयक को मंगलवार को सदन में पेश किया गया। ग्रामीण विकास मंत्री अनिरुद्ध सिंह ने इस विधेयक को पेश किया। ऐसे में अब प्रदेश के सभी नगर निगमों में महापौर व उप महापौर का कार्यकाल पांच साल होगा। नगर निगम कानून संशोधन से पहले सरकार ने इस संबंध में एक अध्यादेश जारी किया था। संशोधन विधेयक के पारित होने के बाद महापौर और उप महापौर का कार्यकाल बढ़ेगा। मौजूदा समय में नगर निगम के मेयर व डिप्टी मेयर का कार्यकाल अढ़ाई साल है। संशोधन विधेयक के प्रावधानों के अनुसार महापौर और उप महापौर के पद की अवधि उनके चुनाव की तारीख से पांच साल तक होगी। मेयर की ओर से अपने पद से त्यागपत्र देने की स्थिति में अथवा पद के किसी कारणवश खाली होने की स्थिति में उप महापौर, महापौर का पदभार संभालेंगे। महापौर पद के खाली होने पर एक माह के भीतर उसी वर्ग से शेष अवधि के लिए नए मेयर का चुनाव करवाया जाएगा।

अब कैग करेगा नगर पालिकाओं का ऑडिट

धर्मशाला। हिमाचल प्रदेश में अब प्रधान महालेखाकार (सीएजी) नगर पालिकाओं का ऑडिट करेगा। नगर पालिकाओं में वित्तीय जिम्मेदारी बढ़ाने के लिए सरकार द्वारा इन शहरी निकायों का ऑडिट करवाने के उद्देश्य से कानून में संशोधन किया जाएगा। ग्रामीण विकास मंत्री अनिरुद्ध सिंह ने इस संबंध में हिमाचल प्रदेश नगर पालिका संशोधन विधेयक सदन में पेश किया। संशोधन के मसौदे में किसी भी नगर पालिका के नगर निगम में शामिल होने पर उसका कार्यकाल भी तय किया गया है। संशोधन के मुताबिक नगर पालिका के किसी भी वार्ड के नगर निगम में शामिल किए जाने पर इसके सदस्यों को शेष कार्यकाल पूरा करने का मौका मिलेगा। नगर निगम में रिक्तियों की स्वीकृति की रिपोर्टिंग भी समयबद्ध तरीके से करना जरूरी होगा#HimachalAssembly #DisasterRelief #JanSankalpRally #HimachalPolitics
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