MLA क़े सम्मान में खड़े ना होना डॉक्टर को पड़ा भारी, मगर हाई कोर्ट ने सरकार की खटिया खड़ी कर दी; 50 हजार का जुर्माना ठोका – भारत केसरी टीवी

MLA क़े सम्मान में खड़े ना होना डॉक्टर को पड़ा भारी, मगर हाई कोर्ट ने सरकार की खटिया खड़ी कर दी; 50 हजार का जुर्माना ठोका

चंडीगढ़ भारत केसरी टीवी 22 नवंबर

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पंजाब-हरियाणा हाई कोर्ट ने हरियाणा सरकार की एक कार्रवाई पर ऐसी फटकार लगाई कि पूरे मामले की हवा ही बदल गई। मामला एक सरकारी डॉक्टर का है, जिस पर सिर्फ इसलिए अनुशासनात्मक कार्रवाई शुरू कर दी गई क्योंकि वह कोविड ड्यूटी के दौरान इमरजेंसी वार्ड में आए एक विधायक के सम्मान में खड़ा नहीं हुआ था।

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जस्टिस अश्विनी कुमार मिश्रा और जस्टिस रोहित कपूर की बेंच ने इस कार्रवाई को “बेहद असंवेदनशील और चिंताजनक” बताते हुए सरकार पर 50,000 रुपए का जुर्माना लगाया। यह राशि PGIMER, चंडीगढ़ के गरीब मरीज कल्याण कोष में जमा करने के आदेश दिए गए हैं। साथ ही, सरकार को डॉक्टर को PG कोर्स के लिए जरूरी NOC तुरंत जारी करने के निर्देश भी मिले।

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क्या है पूरा मामला?
याचिकाकर्ता डॉ. मनोज, जो हरियाणा में कैजुअल्टी मेडिकल ऑफिसर थे, कोविड के उफान के समय इमरजेंसी वार्ड में ड्यूटी कर रहे थे। इसी दौरान एक विधायक निरीक्षण के लिए पहुंचे और इस बात पर भड़क गए कि डॉक्टर खड़े होकर उनका अभिवादन करने नहीं आए। इसके बाद हरियाणा सिविल सर्विस रूल्स-2016 के तहत डॉक्टर को कारण बताओ नोटिस थमा दिया गया।

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डॉक्टर ने साफ कहा कि उन्होंने जानबूझकर ऐसा नहीं किया—बस वह विधायक को पहचान नहीं पाए। लेकिन सरकार ने न उनकी सफाई मानी, न ही उनकी PG की एनओसी जारी की।

कोर्ट की तीखी टिप्पणी
अदालत ने कहा कि इमरजेंसी ड्यूटी पर लगा डॉक्टर मरीजों की ज़िंदगी बचाने के लिए होता है, न कि नेताओं को सलामी देने के लिए। ऐसे आरोपों पर कार्रवाई करना “राज्य की असंवेदनशीलता” को दिखाता है। कोर्ट ने एनओसी रोकने को मनमाना और डॉक्टर की उच्च शिक्षा के अधिकार का उल्लंघन बताया।

सिस्टम पर भी सवाल
पीठ ने यह भी कहा कि अक्सर डॉक्टरों के साथ मारपीट या दुर्व्यवहार की घटनाएं सामने आती हैं, और अब वक्त आ गया है कि ऐसी हरकतों पर सख्त रोक लगे। समर्पित डॉक्टर सम्मान के हकदार हैं, न कि अपमान के।

याचिका को मंजूर करते हुए कोर्ट ने सरकार को फटकार लगाई और डॉक्टर को तुरंत राहत देने का आदेश दे दिया।

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