केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह ने दी जानकारी, 2040 तक चांद पर जाएगा भारतीय अंतरिक्ष यात्री – भारत केसरी टीवी

केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह ने दी जानकारी, 2040 तक चांद पर जाएगा भारतीय अंतरिक्ष यात्री

नई दिल्ली। भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन अंतरिक्ष के क्षेत्र में तेजी से अपने कदम आगे बढ़ा रहा है।केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह ने आज (11 दिसंबर) एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में भारत की भविष्य की अंतरिक्ष योजनाओं के बारे में बताते हुए कहा कि भारत 2035 तक अपना अंतरिक्ष स्टेशन स्थापित करेगा, जिसका नाम भारत अंतरिक्ष स्टेशन होगा।इसके साथ ही उन्होंने यह भी बताया कि भारत की योजना किसी भारतीय अंतरिक्ष यात्री को चंद्रमा पर भेजने की भी है।

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दिल्ली में विज्ञान मंत्रालयों की उपलब्धियों पर एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में भारत की महत्वाकांक्षी अंतरिक्ष योजनाओं को साझा करते हुए कहा, हम अपना खुद का अंतरिक्ष स्टेशन बनाने जा रहे हैं, हम अमेरिका और 1 या 2 अन्य देशों के बाद ऐसा करने वाले पहले देशों में से होंगे।उन्होंने आगे कहा, इसे 2035 तक भारत अंतरिक्ष स्टेशन के रूप में जाना जाएगा और 2040 तक हम किसी भारतीय को चांद पर उतार सकते हैं।

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सिंह ने गगनयान मिशन के बारे में भी बताया कि 2024 के अंत या 2026 की शुरुआत में भारत पहला मानव अंतरिक्ष यान भेजेगा। इस मिशन के तहत भारतीय अंतरिक्ष यात्री अंतरिक्ष में जाएंगे।इसके साथ ही, भारत 6,000 मीटर की गहराई तक समुद्र तल पर एक मानव भेजने की योजना बना रहा है। यह समुद्र की अधिकतम गहराई हो सकती है।यह दोनों मिशन भारत के अंतरिक्ष और समुद्र खोज में महत्वपूर्ण कदम होंगे।

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सिंह ने भारत के सैटेलाइट लॉन्च और जैव प्रौद्योगिकी में प्रगति पर चर्चा की।उन्होंने बताया कि पिछले दशक में भारत ने श्रीहरिकोटा से 397 विदेशी सैटेलाइट्स को लॉन्च किया और नरेंद्र मोदी की सरकार में 432 विदेशी सैटेलाइट्स को लॉन्च किया है।उन्होंने यह भी कहा कि प्रधानमंत्री मोदी ने जैव-अर्थव्यवस्था से संबंधित नीति जैव प्रौद्योगिकी ई3 को बढ़ावा देने में महत्वपूर्ण योगदान दिया, जिससे भारत दुनिया के अग्रणी देशों में शामिल हुआ।

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भारत 2035 तक अपना भारत अंतरिक्ष स्टेशन लॉन्च करेगा। इसमें 5 मुख्य मॉड्यूल होंगे, जिनमें बेस, कोर, विज्ञान प्रयोगशाला और कार्य मॉड्यूल शामिल हैं।अंतरिक्ष स्टेशन को कई चरणों में स्थापित किया जाएगा। सबसे पहले 4 मिशन भेजे जाएंगे, जो भारत के अंतरिक्ष यात्रियों के अभियानों को समर्थन देंगे।इसके साथ ही, यह मिशन लंबी अवधि के अंतरिक्ष जीवन के लिए नई तकनीकों के परीक्षण में भी मदद करेगा।

भारत का पहला अंतरिक्ष मॉड्यूल 52 टन वजनी होगा। यह माइक्रोग्रैविटी में जीवन समर्थन प्रणाली और अन्य जरूरी तकनीकों का परीक्षण करेगा।पहले अंतरिक्ष मॉड्यूल बिना चालक दल के लॉन्च किया जाएगा। सफल परीक्षणों के बाद, इसे चालक दल के मिशन के लिए तैयार किया जाएगा। इसरो 2028 तक बेस मॉड्यूल (बीएएस-1) को एलवीएम-3 रॉकेट से लॉन्च करेगा। इस मिशन में भारत में बने स्पेससूट्स का भी उपयोग किया जाएगा।

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