सुपर स्पेशलिटी के लिए अब 90 लाख बांड मनी, सरकार ने पीजी-सुपर स्पेशलिटी पॉलिसी में किया बदलाव – भारत केसरी टीवी

सुपर स्पेशलिटी के लिए अब 90 लाख बांड मनी, सरकार ने पीजी-सुपर स्पेशलिटी पॉलिसी में किया बदलाव

[MADAN SHARMA]

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बांड की शर्तों से बचने के लिए स्टाइपेंड नहीं छोड़ सकते डाक्टर

राज्य सरकार ने पीजी-सुपर स्पेशलिटी पॉलिसी में बदलाव किया

जीडीओ को इन्सेंटिव मिलेगा एनओसी के लिए भी नई शर्तें

हिमाचल सरकार ने राज्य के मेडिकल कालेजों और सरकारी अस्पतालों के हित में पीजी और सुपर स्पेशलिटी पॉलिसी में बड़े बदलाव किए हैं। स्टेट स्पॉन्सरशिप के तहत पोस्ट ग्रेजुएट या सुपर स्पेशलिटी करने के बदले बांड मनी को बढ़ा दिया गया है। पोस्ट ग्रेजुएशन के मामले में यह 40 लाख और सुपर स्पेशलिटी के मामले में 90 लाख रुपए होगा। स्वास्थ्य सचिव की ओर से नई पॉलिसी की अधिसूचना जारी कर दी गई है। इसके अनुसार बांड से बचने के लिए स्टाइपेंड को छोडऩे का विकल्प डाक्टर के पास नहीं होगा। अब स्टाइपेंड भी लेना होगा और बांड की शर्तों का भी पालन करना होगा। पोस्ट ग्रेजुएशन के मामले में 40 लाख, जबकि सुपर स्पेशलिटी के मामले में 90 लाख का एडवांस चेक जमा करवाना होगा। इस पॉलिसी के मुताबिक पीजी के लिए राज्य सरकार में सेवारत जनरल ड्यूटी ऑफिसर और डायरेक्ट कैंडीडेट के बीच रेशो 67 और 33 फीसदी की रहेगी। इस पॉलिसी के मुताबिक जीडीओ कैडर में इन्सेंटिव भी मिलेगा। इसका फार्मूला पॉलिसी में नए सिरे से परिभाषित किया गया है। पॉलिसी कहती है कि डाक्टरों को नो ऑब्जेक्शन सर्टिफिकेट सिर्फ इंस्टीट्यूट आफ नेशनल इम्र्पोटेंस में पोस्ट ग्रेजुएशन के लिए ही मिलेगा।

जनरल ड्यूटी ऑफिसर को पोस्ट ग्रेजुएशन कोर्स पूरा करने के 10 दिन के भीतर रिपोर्ट करना होगा, नहीं तो इसे बांड की वायलेशन माना जाएगा। डिग्री पूरी करने के बाद एक्स्ट्राऑर्डिनरी लीव या स्टडी लीव इत्यादि के लिए अप्लाई करना भी प्रतिबंधित रहेगा। बांड का पालन न करने पर सरकारी कोटा से स्पॉन्सर किए गए डाक्टर को दी गई सैलरी 18 फीसदी ब्याज के साथ वापस देनी होगी। बांड के अमाउंट की रिकवरी के लिए निदेशक स्वास्थ्य कानूनी प्रक्रिया भी अलग से शुरू करेंगे। ऐसे डाक्टरों के ओरिजिनल बैचलर डिग्री सर्टिफिकेट भी वापस नहीं किए जाएंगे। इससे पहले राज्य सरकार ने मेडिकल कालेज में नियुक्त होने वाले सीनियर रेजिडेंट्स के लिए भी अलग से पॉलिसी नोटिफाई की थी। अब पीजी पॉलिसी नोटिफाई की गई है। हैल्थ सेक्टर में बेहतर रिजल्ट के लिए पहली बार फील्ड अस्पतालों और मेडिकल कालेज का कैडर अलग-अलग बनाया गया है

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